खतरनाक प्रदूषण को भूले लोग, उसी हवा में घंटों लगती हैं लाइनें

जो दिल्ली चंद दिनों पहले प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंच गई थी, आजकल न केवल वहां, बल्कि पूरे देश में सिर्फ नोटबंदी की चर्चा हो रही है।

नई दिल्ली। हाल ही में ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज की रिपोर्ट आई है, जिसके अनुसार चीन के वायु प्रदूषण के मुकाबले, भारत में मरने वालों की संख्या कहीं अधिक है। 2015 के आंकड़ों को देखा जाए तो वायु प्रदूषण से हर रोज 3,280 लोगों की मौत हुई है, जबकि चीन में यह आंकड़ा 3,230 रहा है।

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जो दिल्ली चंद दिनों पहले प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंच गई थी, आजकल न केवल वहां, बल्कि पूरे देश में सिर्फ नोटबंदी की चर्चा हो रही है। सरकार की तरफ से 500 और 1000 रुपए के नोट बंद हो जाने के बाद पूरे देश का ध्यान इसी ओर केन्द्रित हो गया है। न कोई मीडिया इस पर बात कर रहा है, न हि किसी राज्य प्रदूषण से निपटने के कोई कड़े कदम उठा रहा है।

अभी चंद दिन ही बीते हैं, जब दिवाली के अगले दिन पूरे देश में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। उस समय हर ओर प्रदूषण की ही चर्चा होती थी। लोगों को मास्क पहनने की सलाह दी जा रही थी, लेकिन नोटों की चिंता ने सबके मास्क उतार दिए। ऐसा लग रहा था जैसे कुछ दिनों में दिल्ली तबाह ही हो जाएगी, लेकिन नोटबंदी के आते ही सारा प्रदूषण जैसे खत्म सा हो गया।

एनजीटी की सख्ती भी हुई हवा

एनजीटी ने दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार को फटकार लगाई थी और कहा था कि आखिर वे प्रदूषण से निपटने के लिए क्या कर रहे हैं? इस बीच एनजीटी भी बैंकों के बाहर कतार में लगकर नोट बदलने लग गई है शायद। राज्यों की बात की जाए तो हर देश से बैंकों के बाहर लगी लंबी-लंबी कतारों की तस्वीरों वहां का हाल बयां करती ही हैं।

एनजीटी की फटकार के बाद दिल्ली में सड़कों पर उड़ती धूल से निपटने के लिए पानी डालना शुरू कर दिया गया था, लेकिन नोटबंदी की बाढ़ में धूल से हो रहे प्रदूषण से निपटने की कोशिशें भी मानो धूमिल हो गई हैं।

जिस प्रदूषण के चलते केन्द्र सरकार तक से सवाल पे सवाल पूछे जा रहे थे और लोगों को कम से कम बाहर निकलने की सलाह दी जा रही थी, नोटबंदी के बाद अब उन्हीं लोगों को घंटों बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी कतारों में खड़े रहना पड़ रहा है। जिस हवा में सांस लेना खतरनाक हो गया था, अब उसी हवा में घंटों लाइन में लगने के बाद जब किसी के पैसे बदल जाते हैं तो वह चैन की सांस लेता है।

मास्क पहनकर निकलने की दी थी सलाह

डॉक्टरों ने लोगों को कुछ दिन मुंह पर मास्क पहनने की सलाह दी थी। हवा की गुणवत्ता और मौसम का आकलन करने वाली सरकारी संस्था SAFAR ने बताया था कि दिवाली पर आतिशबाजी के चलते दिल्ली में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 का स्तर 507 तक पहुंच गया है, जबकि पीएम 10 का स्तर 511 तक रहा। इसे बेहद खतरनाक स्तर बताया गया था। SAFAR के मुताबिक नोएडा में पीएम 2.5 का स्तर 450 था, जबकि पीएम 10 का स्तर 493 था।

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