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Democracy Index: क्यों मजबूत हो रहा है भारतीय लोकतंत्र? 5 प्रमुख वजह पढ़िए, Economist ने दी है रिपोर्ट

Democracy Index: ब्रिटेन का प्रतिष्ठित अखबार द इकोनॉमिस्ट की इकॉनमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) की ओर से दुनिया भर के लोकतंत्र को लेकर एक डेमोक्रेसी इंडेक्स की रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में इस सूची में भारत 41वें स्थान पर रहा है।

अगर चार साल पहले यानी 2020 से तुलना करें तो भारत इस इंडेक्स में 12 पायदान ऊपर चढ़ा है। तब यह 53वें स्थान पर था। जबकि, इस सूचकांक में शामिल विश्व के 167 देशों में से 130 में लोकतंत्र के कमजोर होने के संकेत मिले हैं। इनमें बांग्लादेश भी है, जहां लोकतांत्रिक मूल्यों का सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। आइए समझते हैं कि वे कौन सी 5 प्रमुख वजहें रही हैं,जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र को लगातार मजबूती प्रदान की है?

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Democracy Index: किन मापदंडों के आधार पर जारी हुई है रिपोर्ट?

बता दें कि इकॉनमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) वैश्विक लोकतंत्र की स्थिति का आंकलन पांच प्रमुख मापदंडों-चुनावी प्रक्रिया और बहुलवाद, सरकार की कार्यप्रणाली, राजनीतिक भागीदारी, लोकतांत्रिक राजनीतिक संस्कृति और नागरिक स्वतंत्रता-के आधार पर करता है।

वैसे अभी भी इस रिपोर्ट में भारत को अमेरिका की तरह ही त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र (Flawed Democracy) की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन कई आयामों में इसकी स्थिति बेहतर और सकारात्मक हो रही है और शायद यही वजह है कि हमारा लोकतंत्र आगे बढ़ रहा है-

Democracy Index: लगातार मजबूत रहा भारत का लोकतांत्रिक ढांचा

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की एक अटूट परंपरा रही है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) एक स्वतंत्र संस्था है, जो चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

आम चुनावों में मतदान प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है; और हाल के वर्षों में महिला मतदाताओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और चुनावी सुधारों के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया गया है। यह भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूती को जाहिर करता है।

Democracy Index: सरकार की बेहतर और पारदर्शी कार्यप्रणाली

सरकार की जवाबदेही और प्रशासनिक कार्यप्रणाली लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। भारत में केंद्रीकृत और विकेंद्रीकृत दोनों स्तरों पर प्रभावी शासन व्यवस्था देखने को मिलती है। डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस, और नागरिक सेवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता ने पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाया है।

कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार की त्वरित नीतियों और वैक्सीनेशन ड्राइव ने पूरी दुनिया को यह दिखाया है कि हमारी प्रशासनिक क्षमता और कौशल कितना मजबूत हो रहा है।

Democracy Index: भारतीय जनता की निरंतर बढ़ती राजनीतिक भागीदारी

भारत में राजनीतिक भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। पहले राजनीति को एक विशिष्ट वर्ग तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब समाज के सभी वर्ग, विशेषकर युवा और महिलाएं, इसमें सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं।

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने आम नागरिकों को राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने और जागरूकता फैलाने का एक आसान मंच दिया है। हाल के चुनावों में मतदाता जागरूकता अभियानों ने भी मतदाताओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया है।

Democracy Index: लोकतंत्र की मजबूत जड़ें और असहमति जताने के लिए विकल्पों की भरमार

भारत में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्राचीन काल से गहरी आस्था रही है। भले ही कभी-कभी राजनीतिक असहमति या ध्रुवीकरण की स्थिति बनती है, लेकिन लोकतंत्र की जड़ों को कोई हिला नहीं सका है।

बहुदलीय व्यवस्था और विभिन्न विचारधाराओं के सह-अस्तित्व ने भारतीय लोकतंत्र को हमेशा समृद्ध किया है। संसद और राज्य विधानसभाओं में बहस और संवाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करते हैं। साथ ही, मीडिया की स्वतंत्रता और न्यायपालिका की निष्पक्षता लोकतांत्रिक संस्कृति को बनाए रखने में सहायक साबित हुए हैं।

Democracy Index: नागरिकों को संविधान के माध्यम से मिली स्वतंत्रता

भारतीय संविधान नागरिकों को व्यापक आजादी देता है, जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता और कानूनी सुरक्षा शामिल हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म और मीडिया के माध्यम से नागरिक स्वतंत्रता को एक नया आयाम मिला है।

साथ ही, न्यायपालिका ने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाकर नागरिक अधिकारों की रक्षा की है। सूचना का अधिकार (RTI) और डेटा संरक्षण संबंधी उपायों ने भी नागरिक स्वतंत्रता को मजबूती दी है।

'क्या दुनिया भर में लोकतंत्र संकट में है?'

हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर से एक सवाल पूछा गया था कि 'क्या दुनिया भर में लोकतंत्र संकट में है?' यह सवाल दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद पूछा गया।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक तब विदेश मंत्री ने अपनी उंगली पर लगी स्याही दिखाते हुए कहा, 'मेरी तर्जनी पर जो निशान है, वह उस व्यक्ति का निशान है जिसने अभी-अभी वोट दिया है। मेरे राज्य में अभी-अभी चुनाव हुए हैं। पिछले साल, हमारे यहां राष्ट्रीय चुनाव हुए थे।'

उन्होंने आगे कहा, 'भारतीय चुनावों में,राष्ट्रीय मतदाताओं में से दो-तिहाई मतदान करते हैं। हम एक ही दिन में मतों की गिनती करते हैं और परिणाम घोषित होने के बाद कोई भी उस पर विवाद नहीं करता। आज दशकों पहले की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक मतदाता मतदान करते हैं। संदेश ये है कि कुछ हद तक वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र संकट में है; और मुझे इससे असहमत होना पड़ेगा। हम अच्छे से मतदान कर रहे हैं,हम लोकतंत्र के बारे में आशावादी हैं और हमारे लिए लोकतंत्र ने वास्तव में काम किया है।'

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