NIT के 900 छात्रों ने एक साथ छोड़ा कैंपस, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

नई दिल्ली। देश में शिक्षा व्यवस्था का का क्या हाल दिन पर दिन चरमराता जा रहा है। उत्तराखंड के राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान (NIT) के लिए खुद का स्थायी परिसर न होने की वजह से 932 छात्रों ने कैंपस छोड़ दिया है और घरों को रवाना हो गए हैं। बता दें कि 4 अक्टूबर से ही छात्र परिसर को असुरक्षित बताते हुए कही और स्थानांतरित करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। लेकिन वैसे नहीं होने पर छात्रों ने स्थायी कैंपस और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने पर ही वापस लौटने की घोषणा की है।

राष्ट्रपति और पीएम को लिखा पत्र

राष्ट्रपति और पीएम को लिखा पत्र

छात्रों ने मेल और फैक्स के जरिए अपने इस कदम की सूचना राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और देश के मुख्य न्यायाधीश और मानव संसांधन विकास मंत्री के अलावा उत्तराखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेज दी है। एनआईटी का वर्तमान कैंपस राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर स्थित है। लेकिन वहां असुविधा होने की वजह से उसे दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं। बता दें कि राजमार्ग पर स्थित इस अस्थाई कैंपस में एक क्लस्टर से दूसरे क्लस्टर तक जाने के दौरान बीटेक के तीन छात्र घायल हो गए थे। जबकि इसी महीने की शुरुआत में दो छात्राओं को भी चोट लग गई थी। जिसके बाद से ही छात्र आंदोलन पर बैठ गए थे।

पैरामीटर को पूरा नहीं करता कैंपस

पैरामीटर को पूरा नहीं करता कैंपस

अस्थाई कैंपस छोड़ चुके छात्रों ने कहा है कि एनआईटी राष्ट्रीय स्तर का संस्थान है लेकिन यह कैंपस उसके पैरामीटर पर खरा नहीं उतरता है। यहां तक की लैब में पर्याप्त और उपयुक्त इक्यूपमेंट भी नहीं है। ऐसे में कैंपस में पढ़ाई करना मुश्किल हो गया है। छात्रों ने कहा कि कैंपस के हालात को सुधारने के लिए कई बार मांग रखी गई लेकिन अभी तक कोई बदलान नहीं हुआ है।

अधिकारियों को नहीं है सूचना

अधिकारियों को नहीं है सूचना

एनआईटी उत्तराखंड के अधिकारियों ने कहा है कि छात्रों ने हॉस्टल छोड़ने की कोई सूचना नहीं दी है। संस्थान ने कहा है कि उनके पास बस इतनी सी सूचना है कि कुछ छात्रों ने रजिस्टर मं बाहर जाने की बात लिखी है। इसके अलावा संस्थान को कोई जानकीर नहीं है। छात्रों ने नियमानुसार अपने बाहर जाने की जानकारी नहीं दी है। लेकिन अब छात्र तो कैंपस छोड़ घर चले गए हैं।

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