दिल्ली हिंसा: वो छात्र जो न पढ़ पा रहे, न परीक्षा दे पा रहे

दिल्ली में दंगों की आग
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दिल्ली में दंगों की आग

दिल्ली के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में फैली हिंसा की आग दुकानों-मकानों के बाद अब छात्रों के भविष्य तक पहुंच गई है.

जिल्ली समेत देशभर में इस समय सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं जारी हैं.

लेकिन हिंसा के कारण बोर्ड ने बुधवार के बाद अब गुरुवार को भी हिंसाग्रस्त इलाक़ों में होने वाली दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है.

दिल्ली सरकार ने भी इन इलाक़ों में सभी स्कूलों को बंद कर दिया है.

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की बोर्ड परीक्षाओं का सेंटर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तो पड़ता ही है, लेकिन कई छात्र ऐसे हैं हैं जो हिंसाग्रस्त इलाकों में रहते हैं लेकिन उनका सेंटर इन इलाक़ों से बाहर पड़ता है.

ऐसे में उन छात्रों का भविष्य अधर में है जिनके स्कूल उत्तर-पूर्वी दिल्ली ज़िले के बाहर हैं. इसे लेकर छात्र और अभिभावक दोनों परेशान भी हैं.

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफ़राबाद, भजनपुरा जैसे इलाक़ों में रहने वाले कई छात्रों ने या तो परीक्षाएं छोड़ी हैं या हिंसाग्रस्त इलाक़े से बाहर निकलकर परीक्षा सेंटर तक देने जाने की हिम्मत की है.

परीक्षा न दे पाने पर तनाव

ऐसी ही 10वीं की एक छात्रा मदीहा नाज़ (16 वर्ष) हैं जिनको बीते बुधवार को अपनी बोर्ड की परीक्षा छोड़नी पड़ी है.

तीस हज़ारी के क्वीन मेरीज़ सीनियर सेकंडरी स्कूल में पढ़ने वाली मदीहा का बुधवार को अंग्रज़ी का पेपर था.

बेहद तनाव और निराशा में महीदा ने बीबीसी को बताया कि अब उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आगे क्या होगा?

दिल्ली में एक स्कूल में छात्र
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दिल्ली में एक स्कूल में छात्र

जाफ़राबाद इलाक़े के चौहान बांगर में रहने वाली मदीहा कहती हैं कि सोमवार से हिंसा शुरू हुई, उसी दिन उनकी उर्दू विषय की परीक्षा थी.

वो कहती हैं, "सोमवार को उर्दू का एग्ज़ाम देकर मैं अपने पापा के साथ घर आई. उस वक़्त बहुत हल्ला हो रहा था. उसके बाद से मैं एक दिन भी नहीं पढ़ पाई हूं. पूरे जाफ़राबाद में तनाव का माहौल था और दिन-रात शोर मचता रहा. आज तक यह डर बना हुआ है कि कोई कहीं से आकर लड़ाई न करे."

"मैं आज एग्ज़ाम देने जाने के लिए भी तैयार हो गई थी लेकिन मैं अपनी ख़ुद की और पापा की सिक्योरिटी के कारण नहीं जा पाई क्योंकि मुझे डर था कि दाढ़ी होने की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा सकता है."

पुलिस से मांगी मदद

हिंसा का शिकार स्कूल
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हिंसा का शिकार स्कूल

मदीहा सवाल करती हैं कि अगर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सेंटर पर सीबीएसई ने परीक्षा रद्द की है तो उन्हें उन छात्रों का भी ध्यान रखना चाहिए जो इन हिंसाग्रस्त इलाक़ों में रहते हैं लेकिन दूसरे इलाक़ों के स्कूलों में परीक्षा देने जाते हैं.

वो कहती हैं कि उन्होंने सीबीएसई में इसके लिए संपर्क किया लेकिन वहां किसी ने कोई जवाब नहीं दिया तो फिर स्कूल की शिक्षिका को उन्होंने एप्लिकेशन लिखकर दी है कि वो हिंसाग्रस्त इलाक़े में रहती हैं उनकी परीक्षा दोबारा कराई जाए.

मदीहा की अगली परीक्षा 4 मार्च को विज्ञान और उसके बाद गणित के विषय की है. वो दुआ कर रही हैं कि हालात तब तक ठीक हो जाएं ताकि वो तैयारी कर सकें और परीक्षा दे सकें.

स्कूल
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स्कूल

मदीहा की मां उज़मा भी बेटी के भविष्य को लेकर तनाव में हैं. वो कहती हैं कि उन्होंने बेटी की परीक्षा के लिए सीबीएसई के बाद दिल्ली पुलिस के कंट्रोल रूम में फ़ोन किया था ताकि उनकी बेटी को सुरक्षित एग्ज़ाम सेंटर तक पहुंचाया जाए लेकिन उनका कहना था कि सुरक्षा पहले है और भविष्य में परीक्षाएं तो होती रहेंगी.

उज़मा सीबीएसई पर सवाल उठाती हैं कि बोर्ड परीक्षाओं को पूरे दिल्ली में स्थगित किया जाना चाहिए था लेकिन सीबीएसई ने केवल उत्तर-पूर्वी दिल्ली में ही ऐसा किया है.

कुछ ऐसी ही स्थिति भजनपुरा में रहने वाले मोहम्मद आक़िब सईद (17 वर्ष) की है.

फ़तेहपुरी मुस्लिम सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाले 12वीं के छात्र आक़िब का एग्ज़ाम सेंटर पुरानी दिल्ली के गुरुद्वारा शीशगंज के नज़दीक है.

गुरुवार को उनकी अंग्रेज़ी की परीक्षा होनी है. हिंसा के कारण उनकी पढ़ाई बिलकुल नहीं हो पाई है लेकिन वो इस चिंता में हैं कि वो एग्ज़ाम कैसे देंगे.

'रखवाली के बीच नहीं हुई पढ़ाई'

जली हुई कार
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जली हुई कार

आक़िब कहते हैं कि वो रात-रात भर जागकर घर की रखवाली कर रहे हैं जिस कारण न वो सो पा रहे हैं और न ही पढ़ पा रहे हैं.

वो कहते हैं, "सोमवार को मेरा फ़िज़िकल एजुकेशन का एग्ज़ाम था. मैं एग्ज़ाम देकर आया तो हिंसा शुरू हो गई. लेकिन मुझे बुधवार को किसी भी हालत में एग्ज़ाम देना है. अगर नहीं दिया तो मालूम नहीं आगे क्या होगा. मैं अपने दोस्त के साथ एग्ज़ाम देने जाने की कोशिश करूंगा."

आक़िब कहते हैं कि उन्होंने सीबीएसई दफ़्तर में फ़ोन किया तो कोई जवाब नहीं आया कि ऐसे छात्रों की परीक्षा का क्या होगा जो हिंसाग्रस्त इलाक़ों में फंसे हैं.

आक़िब के भाई काशिफ़ भी इसी स्कूल में 11वीं कक्षा के छात्र हैं. बुधवार को उनकी बिज़नेस स्टडीज़ की सालाना परीक्षा थी लेकिन वो परीक्षा देने नहीं जा सके.

काशिफ़ कहते हैं कि जब उन्होंने स्कूल में परीक्षा के बारे में पूछा तो स्कूल प्रशासन का कहना था कि परीक्षा बुधवार को ही देनी होगी.

अहमदाबाद
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अहमदाबाद

जाफ़राबाद की दूसरी ओर वेलकम इलाक़ा है. इसी इलाक़े में रहने वाली ईशा शर्मा सिविल लाइंस के बीएम गंज गर्ल्स सीनियर सेकंडरी स्कूल की 12वीं कक्षा में पढ़ती हैं.

वो कहती हैं कि इलाक़े के आसपास तनाव है लेकिन वो गुरुवार को अंग्रेज़ी की परीक्षा देने ज़रूर जाएंगी. उनका कहना है कि उनका सेंटर मलकागंज में है.

ईशा कहती हैं कि इस तनाव पर उनका कम ध्यान है, उनका ध्यान परीक्षा देने पर है क्योंकि गुरुवार को बोर्ड की उनकी पहली परीक्षा है.

वेलकम में ही रहने वाले तरुण शाहदरा के गांधी मेमोरियल सीनियर सेकंडरी स्कूल की 12वीं कक्षा में पढ़ते हैं. यह उत्तर-पूर्वी दिल्ली का ही इलाक़ा है.

उनको इस बात का तनाव है कि गुरुवार को परीक्षा देने वो कैसे जाएंगे.

सीबीएसई के फ़ैसले पर सवाल

जाफ़राबाद के ही नदीम अराएन्स एडुप्लस नामक कोचिंग सेंटर के डायरेक्टर नदीम सीबीएसई द्वारा परीक्षाएं स्थगित किए जाने पर सवाल उठाते हैं.

वो कहते हैं, "परीक्षाएं पूरी दिल्ली में रद्द की जानी चाहिए थीं. एक ही सब्जेक्ट की दो बार परीक्षाएं कराने से क्वेश्चन पेपर के लेवल में अंतर आता है. कोई प्रश्न पत्र ज़्यादा कठिन होता है तो कोई ज़्यादा आसान होता है, इसके कारण छात्रों की मार्किंग में भी अंतर आएगा. आख़िर में सबको आगे कॉलेज में एडमिशन लेना है, इस वजह से किसी के मार्क्स ज़्यादा होंगे और किसी के कम."

वहीं, सीबीएसई उत्तर पूर्वी दिल्ली के इन छात्रों को लेकर आगे क्या करेगा ये अभी तक पूरी तरह साफ़ नहीं है.

सीबीएसई की पीआरओ रमा शर्मा ने बीबीसी को बताया कि स्थिति की पूरी समीक्षा की जाएगी और आगे सीबीएसई उचित कदम उठाएगा.

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