दिल्ली हिंसा: जिस नाले से निकाले गए 11 शव, अब लोग उसे किस नाम से जानते हैं?

नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को भड़की हिंसा के बाद से हालात अब सामान्य हैं और लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में फिर से वापस आने का प्रयास कर रहे हैं। इस हिंसा ने दिल्ली समेत पूरे देश को झगझोर कर रख दिया था, दो दिनों तक हुई हिंसक घटनाएं दिल्ली वालों के दिलों में काली याद बनकर बैठ गया है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में फैले नाले और नालियों को अब तक हर कोई कूड़ा डालने और लैंडमार्क के लिए काम आता था लेकिन हिंसा के बाद से अब लोग उसे मौत के नाले के लिए जानते हैं।

नालों से बरामद किए गए करीब 11 शव

नालों से बरामद किए गए करीब 11 शव

जी हां, हिंसा की रात से लेकर अगले कई दिनों तक इन नालों से एक के बाद एक करीब 11 शव बरामद किए गए। इनमें से एक इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा का भी शव इसी नाले से बरामद किया गया था। पिछले एक हफ्ते में उत्तर-पूर्वी दिल्ली का नाला सुर्खियों में बना हुआ है। अस्पतालों और जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंसा के दौरान मारे गए लोगों की पिछले पाँच दिनों में इस नाले में अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग शव बरामद किए गए।

दिल्ली हिंसा का गवाह बना नाला

दिल्ली हिंसा का गवाह बना नाला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 47 हो गई है जबकि 350 लोग इस घटना में घायल हुए थे। हिंसा का भयानक गवाह बने नाले में से सबसे पहले 26 फरवरी को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा का शव बरामद किया गया था। उनके परिवार वालों का कहना है कि दिल्ली हिंसा के दौरान अंकित पर हमला किया गया। वहीं, रविवार और सोमवार को नाले से बरामद किए गए अंतिम पांच शवों की पहचान अभी तक नहीं की जा सकी है।

शवों के कारण चर्चा का विषय बना

शवों के कारण चर्चा का विषय बना

नाले से निकाले गए कई मृतकों के शव इस तरह क्षत-विक्षत हो गए हैं कि उनकी पहचान डीएनए परीक्षण से ही की जा सकती है, पुलिस और अस्पताल के अधिकारियों ने अंतिम उपाय के रूप में डीएनए परीक्षण की सिफारिश की है। हालांकि पुलिस ने कहा कि उन्हें नहीं लगता की निकाले गए सभी शव हिंसा में मारे गए लोगों के हैं। खजूर के निवासी आकाश गुप्ता ने कहा कि ये नाले अब शवों के कारण चर्चा का विषय बन गए हैं।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नालियों की भूलभुलैया

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नालियों की भूलभुलैया

दंगा प्रभावित इलाके के पड़ोसी यमुना विहार के निवासी हमजा अहमद ने बताया कि पूर्वोत्तर दिल्ली की नालियां एक भूलभुलैया बनाती हैं जो अक्सर निवासियों को भ्रमित करती हैं। इसका एक कारण यह है कि वे सभी एक जैसे दिखते हैं, एक और बात यह है कि अधिकांश निवासी इन नालियों को इलाकों के नामों से पहचानते हैं। लेकिन कई नालियां इनमें से कुछ इलाकों से होकर गुजरती हैं। यह संभव है कि जब हम कहते हैं कि गोकलपुरी नाला या भजनपुरा नाला तो हम अलग-अलग नालों का जिक्र कर रहे होते हैं।

कीचड़ और कचरे से पटा हुआ है

कीचड़ और कचरे से पटा हुआ है

यमुना विहार की कनिष्क कुमार ने बताया कि यह नाला तैरते हुए कचरे और गाद (कीचड़) से पटा पड़ा है, जब जब अधिकार क्षेत्र की बात आती है संबंधित एजेंसियों के बारे में किसी को जानकारी नहीं होती। इनमें से कुछ नालियां दिल्ली सरकार के सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के अंतर्गत आती हैं, अन्य पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC) के अंतर्गत आती हैं।

इन हिंसा प्रभावित इलाकों में फैला है नाला

इन हिंसा प्रभावित इलाकों में फैला है नाला

दिल्ली सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नेटवर्क में एक 'मुख्य नाला' होता है जिसे नाला नंबर 1 कहा जाता है जिसका मूल उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पूर्वी यमुना नहर में है। यह 12 किमी का नाला लोनी के माध्यम से दिल्ली में प्रवेश करता है और ओखला बैराज के माध्यम से नोएडा में बहाव से बाहर निकलने से पहले पूर्वोत्तर दिल्ली और पूर्वी दिल्ली के बड़े हिस्से को कवर करता है। उन्होंने बताया कि चार प्रमुख नालियां हैं जो नाला नंबर 1 को काटती हैं। यह नाला करावल नगर, चांद बाग, गोकलपुरी, भजनपुरा, बृजपुरी, भागीरथ विहार, मंडोली, मुस्तफवाद, शिव विहार, बाबरपुर और जाफराबाद को से गुजरता है जो हिंसा प्रभावित क्षेत्र हैं।

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