Delhi Lok Sabha Chunav: दिल्ली में किसका खेल बिगाड़ेगी BSP? 7 सीटों में उतारे 3 मुस्लिम उम्मीदवार
Delhi Lok Sabha Election: कई चुनावों के बाद राजधानी दिल्ली में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) इस बार पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतरी है। उसने सभी सातों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं और कुछ तो दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी छोड़कर हाथी की सवारी कर रहे हैं।
करीब दो दशक पहले दिल्ली में मायावती की बीएसपी दिल्ली में एक मजबूत ताकत बनकर उभरने लगी थी। लेकिन, राजधानी की राजनीति में आम आदमी पार्टी के उभरने के साथ ही यह अपना प्रभाव खोती चली गई। लेकिन, इस बार पार्टी दिल्ली में नई ऊर्जा के साथ चुनाव मैदान में नजर आ रही है।

दिल्ली में त्रिकोणीय मुकाबले की तैयारी में बीएसपी
बसपा ने दिल्ली की सभी सातों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। ईटी ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली प्रदेश बसपा प्रमुख लक्ष्मण सिंह ने विश्वास जताया है कि इस बार राजधानी की सारी सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा और उनकी पार्टी का वोट शेयर बढ़ेगा।
उन्होंने कहा, 'दिल्ली में अब सीधी लड़ाई नहीं हो रही है। हमारे उम्मीदवार सही में अच्छा कर रहे हैं।' उनका कहना है, 'अन्य पार्टियों की तरह से हमारा प्रचार बड़ा नहीं है। लेकिन, हमारे प्रत्याशी और कार्यकर्ता घर-घर जा रहे हैं और मतदाताओं से संपर्क बना रहे हैं।'
नई दिल्ली में दिया 'आप' के पूर्व मंत्री को टिकट
पार्टी जो कुछ कह रही है, उसके उम्मीदवारों को देखने से भी लगता है कि इस बार वह दिल्ली में लोकसभा चुनाव को लेकर काफी गंभीर है। मसलन, इसने नई दिल्ली की प्रतिष्ठित सीट पर दिल्ली के पूर्व मंत्री राज कुमार आनंद को टिकट दिया है। आनंद अप्रैल में ही सरकार और आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर आए हैं।
दिल्ली में तीन मुस्लिम चेहरों पर बसपा का दांव
पूर्वी दिल्ली में पार्टी ने मोहम्मद वकार चौधरी को मौका दिया है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वह पहले आम आदमी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे। पार्टी ने दो और सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है। चांदनी चौक से अब्दुल कलाम आजाद इसके प्रत्याशी हैं, जो पेशे से वकील हैं और दक्षिणी दिल्ली से अब्दुल बासित पर दांव लगाया है।
बसपा के एक और पदाधिकारी का कहना है, 'हमने इस बार तीन मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। राजधानी में उनके अच्छी संख्या होने के बावजूद किसी भी प्रमुख पार्टी ने मुसलमान उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है।'
पश्चिमी दिल्ली से विशाखा बसपा उम्मीदवार हैं, जो कि दिल्ली में पार्टी की एकमात्र महिला प्रत्याशी हैं। उत्तर पूर्वी दिल्ली से अशोक कुमार इसके उम्मीदवार हैं तो उत्तर पश्चिमी दिल्ली (सुरक्षित) से विजय बौद्ध को टिकट दिया है।
बसपा संस्थापक भी लड़ चुके हैं दिल्ली से लोकसभा चुनाव
बसपा के लिए दिल्ली चुनाव के लिहाज से अंजान नहीं है। पार्टी के संस्थापक कांशीराम भी पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं, जिन्हें 11.2% वोट मिले थे। 2008 के विधानसभा चुनाव में राजधानी में पार्टी ने अपना सबसे बेहतर प्रदर्शन किया था, जब उसका वोट शेयर 14% पर पहुंच गया और उसने 2 सीटें जीती भीं। यही नहीं 6 सीटों पर वह दूसरे स्थान पर रही थी।
लेकिन, 2014 के लोकसभा चुनावों से पार्टी कमजोर पड़ती गई, जब उसे 1.2% वोट मिले और 2019 तक आते-आते यह सिर्फ 1% वोट तक सिमट गई। 2007 के एमसीडी चुनाव में पार्टी के 17 पार्षद जीते थे, जो 2012 में 15, 2017 में 3 और 2022 में शून्य पर पहुंच गए।
बसपा नेता का कहना है, 'आप देखेंगे कि हमारे उम्मीदवार कड़ी टक्कर देंगे। राज कुमार आनंद का हमारी पार्टी में आना न सिर्फ नई दिल्ली में, जहां से वह लड़ रहे हैं, बल्कि सभी सीटों पर सकारत्मक प्रभाव डालेगा।'
इंडिया ब्लॉक कर रहा है बसपा के दावों को खारिज
बसपा के दावों को खारिज करने के लिए सबसे ज्याद इंडिया ब्लॉक की पार्टियां सक्रिय दिख रही हैं। मसलन, आम आदमी पार्टी के एक नेता ने नाम नहीं जाहिर होने देने के अनुरोध पर कहा कि 'बीएसपी अब प्रासंगिक नहीं है। कुछ निर्दलीयों को शायद बीएसपी प्रत्याशियों से ज्यादा वोट आ जाए।'
उसका यह भी कहना है कि 'आनंद ने विधानसभा चुनाव सिर्फ इसलिए जीता, क्योंकि वह आम आदमी पार्टी के निशान पर चुनाव लड़े थे।' वहीं पूर्व एमएलए और दिल्ली कांग्रेस के कम्युनिकेशन-इंचार्ज अनिल भारद्वाज भी यही कह रहे हैं कि इस बार बीएसपी के उम्मीदवारों से खास असर नहीं पड़ेगा। उनका दावा है, 'दलित वोटर कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं और वे इस बार गठबंधन के लिए वोट करेंगे।'
दिल्ली में बसपा ने बढ़ाया भाजपा का भरोसा!
लेकिन, दिल्ली बीजेपी के एक पदाधिकारी का दावा है कि बीएसपी निश्चित तौर पर नई दिल्ली,उत्तर पूर्वी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली और उत्तर पश्चिमी दिल्ली में कांग्रेस-आम आदमी पार्टी गठबंधन का वोट काटेगी।
उनके अनुसार, 'बीएसपी एक कैडर-आधारित पार्टी है और कुछ इलाकों में उसको अच्छा समर्थन प्राप्त है। अगर बीएसपी नहीं लड़ रही होती तो वैसे वोटर गठबंधन को वोट देते।'












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