अफ्रीकियों-मुसलमानों को नहीं देती दिल्ली रेंट पर घर
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) भले ही साऊथ अफ्रीका में अश्वेतों के साथ बुरा व्यवहार का दौर खत्म हो गया हो पर हमारे इधर जारी है। अगर बात दिल्ली की करें तो अफ्रीकी नागरिकों को और मुसलमानों को रेंट पर घर मिलना लगभग नामुमकिन ही रहता है।
तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें रेंट पर घर नहीं मिल पाता है। एक फ्लैट के लिए 15 बार कोशिश करने पर रेंट पर घर देने के लिए कोई मकान मालिक तैयार होता है। [अब दिल्ली हुई बेदिल, होती बुजुर्गों की बेकद्री]
किया सर्वे
राजधानी की प्रमुख रीयल एस्टेट एडवाइजरी 21 सैंचुरी के सीईओ डा. देवेन्द्र गुप्ता ने हाल ही में अपने साथियों के साथ एक सर्वे किया। उन्होंने उन घरों में फोन किया जहां पर किराएदार की तलाश थी। सैंचुरी 21 को किराएदार की तलाश करने वालों की जानकारी बहुत से रीयल एस्टेट वेबसाइट्स से मिली।
लगभग नामुमकिन
सर्वे के मुताबिक, दिल्ली में मुसलमानों को गैर-मुस्लिम इलाकों में रेंट पर घर मिलना लगभग नामुमकिन है। बड़ी ही मुश्किल से 50 में से किसी एक को घर मिलता है। [OMG! यहां बिक रहे हैं 72 रुपये में घर!]
मुसलमानों के इलाके
इसलिए ही मुसलमान उन इलाकों में रहने के लिए चले जाते हैं,जहां पर उनकी आबादी खासी है। जैसे कि ओखला, अबू फजल नगर, जामिया नगर, दरियागंज वगैरह।
जन्नत के दर्शन
वरिष्ठ चिंतक फिरोज बख्त अहमद कहते हैं कि मुसलमानों को दिल्ली में गैर-मुसलमानों के इलाकों में घर मिलना जन्नत के दर्शन के समान है। आप भले ही रेंट एग्रीमेंट करें पर लोग नहीं मानते।
सवाल पर सवाल
सर्वे के मुताबिक, राजधानी में करीब 20 हजार अफ्रीकी नागरिक भी रहते हैं। अफ्रीकी देशों की लगभग दो दर्जन तो एंबेसी है दिल्ली में। इनमें काम करने वाले राजनयिकों के अलावा दिल्ली में बड़ी संख्या में अफ्रीकी छात्र और दूसरे लोग रहते हैं। इन्हें भी कोई घर नहीं देता। यहां तक की अफ्रीकी राजनयिकों को भी घर देने से पहले लोग दस बार सवाल खड़े करते हैं।
खराब लाइफस्टाइल
डा. देवेन्द्र गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर दिल्ली वाले कहते हैं कि अफ्रीकियों का लाइफस्टाइल उनकी समझ से परे हैं। ये देर रात तक संगीत सुनना पसंद करते है। बेहद लड़ाके किस्म के होते हैं ये।
ईस्ट दिल्ली के एक मकान मालिक मनोज सहगल ने कहा कि वे किसी अफ्रीकी को अपना घर इसलिए रेंट पर नहीं देना पसंद करते क्योंकि उन्हें पता चला है कि ये कहीं से कुत्ते-खरगोश वगैरह मारकर घर में पकाते हैं। जाहिर है, इस तरह के लोगों को वे तो घर नहीं दे सकते रेंट पर।













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