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केजरीवाल सरकार ने कहा- केंद्रीय कमेटी रोक रही विज्ञापन, CJI बोले- रोज तो अखबारों में दिखते हैं

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नई दिल्ली। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के बीच आए दिन किसी ना किसी मुद्दे पर तकरार होती रहती है। पहले भी अधिकारों का मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक जा चुका है। वहीं, एक और नया मामला सामने आया है जहां दिल्ली सरकार ने अखबारों में छपने वाले विज्ञापन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में दिल्ली सरकार ने कहा है कि केंद्रीय कमेटी उनके विज्ञापनों को अखबारों में छपने नहीं दे रही है।

हम रोज अखबारों में दिल्ली सरकार के विज्ञापन देखते हैं- सीजेआई

हम रोज अखबारों में दिल्ली सरकार के विज्ञापन देखते हैं- सीजेआई

दिल्ली सरकार ने याचिका में इस मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को लेकर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है। याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि उनके विज्ञापन नहीं छप पा रहे हैं क्योंकि केंद्रीय कमेटी इसकी अनुमति नहीं दे रही है। इसपर सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि हम तो रोज अखबारों में दिल्ली सरकार के विज्ञापन देखते हैं। ऐसे में विज्ञापन कहां रुक रहे हैं?

सर्वोच्च अदालत ने खारिज की तत्काल सुनवाई की मांग

सर्वोच्च अदालत ने खारिज की तत्काल सुनवाई की मांग

सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। राज्य और केंद्र की सरकारें अपनी योजनाओं और उपलब्धियों को लेकर अखबार, टीवी और रेडियो में विज्ञापन देती हैं। हालांकि, दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराव की स्थिति आ चुकी है। दिल्ली सरकार के अधिकारों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।

ये भी पढ़ें: अयोध्या जमीन विवाद: मध्यस्थता पैनल फेल, सुप्रीम कोर्ट में 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई

दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच पहले भी विवाद आए हैं सामने

दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच पहले भी विवाद आए हैं सामने

उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस, जमीन और अफसरों के ट्रांसफर से जुड़े फैसले लेने की शक्ति उपराज्यपाल (एलजी) को सौंप दी थी, जबकि अन्य मामलों पर दिल्ली सरकार फैसला ले सकती थी। दिल्ली की आप सरकार पहले भी आरोप लगाती रही है कि केंद्र की बीजेपी सरकार उनको काम नहीं करने देती है। जबकि बीजेपी इन आरोपों को खारिज करती रही है।

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English summary
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