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Delhi Blast: 5 मालिक, 1 कार और आतंक का नेटवर्क! गुरुग्राम से पुलवामा होते दिल्ली कैसे पहुंची मौत की i-20

Delhi Red Fort Blast: दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण आतंकी ब्लास्ट ने देश को झकझोर दिया है, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई है। प्रारंभिक जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है कि धमाके में इस्तेमाल हुई हरियाणा नंबर की i-20 कार (HR 26-CE 7674) का लिंक गुरुग्राम (Gurugram) निवासी मोहम्मद सलमान से जुड़ा है, जिसे पुलिस ने हिरासत में लिया है।

जांच में सामने आया है कि कार को फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बार-बार बेचा गया, और यह आखिर में मुख्य संदिग्ध आतंकी उमर तक पहुंची। इस जटिल मालिकाना श्रृंखला और फर्जीवाड़े से जांच एजेंसियों के लिए साजिश के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गई है।

Delhi Red Fort Blast

गुरुग्राम से जुड़ा कार का पहला लिंक

धमाके में इस्तेमाल हुई i-20 कार (HR 26-CE 7674) हरियाणा के गुरुग्राम RTO में रजिस्टर्ड थी। यह जानकारी मिलते ही हरियाणा पुलिस सक्रिय हुई और कार के पहले मालिक मोहम्मद सलमान को गुरुग्राम से हिरासत में ले लिया गया। पुलिस सलमान से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने यह कार कब और किस सेकंड हैंड कंपनी को बेची थी। इस शुरुआती लिंक ने जांच एजेंसियों को साजिश की जड़ तक पहुंचने में पहला अहम सुराग दिया है।

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आतंकी कार के 5 मालिक: साजिश का हैरान कर देने वाला जाल

दिल्ली लाल किला ब्लास्ट (Delhi Red Fort Blast) में इस्तेमाल हुई i-20 कार (HR 26-CE 7674) अब आतंकी साजिश (Terror Plot) का सबसे बड़ा सबूत बन गई है। जांच में खुलासा हुआ है कि इस कार के कुल 5 मालिक थे। गुरुग्राम के मोहम्मद सलमान से शुरू हुई यह श्रृंखला, फर्जी दस्तावेजों (Fake Documents) के साथ नदीम, कार डीलर, तारिक और अंत में मुख्य संदिग्ध आतंकी उमर तक पहुंची। पुलिस ने पहले मालिक सलमान और पुलवामा के तारिक को हिरासत में लिया है।

तारिक से पूछताछ में सामने आया कि कार को आमिर, तारिक और उमर के हाथों तक पहुंचाया गया था। इस खरीद-बिक्री में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ, जिससे कार का मालिकाना हक़ (Ownership) ठीक से ट्रांसफर नहीं हो पाया। जांच एजेंसियां इस लंबी मालिकाना श्रृंखला (Chain of Ownership) की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कार को विस्फोटक लगाने के लिए कब, कहाँ और किसने बेचा था, ताकि मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।

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फरीदाबाद की पार्किंग और चालान कनेक्शन

जांच में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है कि धमाके से पहले इस कार को फरीदाबाद (Faridabad) की एक अवैध पार्किंग में भी खड़ा किया गया था। इस दौरान कार का चालान भी काटा गया था। यह तथ्य जांच एजेंसियों को आतंकी की पिछली मूवमेंट और फरीदाबाद आतंकी मॉड्यूल (Faridabad Terror Module) के साथ उसके संभावित संपर्क को स्थापित करने में मदद कर सकता है। पुलिस अब चालान और पार्किंग रिकॉर्ड की गहनता से जांच कर रही है।

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