डिप्रेशन पर बात कर रहीं दीपिका को शादी के सवाल पर आया गुस्सा, पत्रकार को लगाई लताड़

नई दिल्ली। बॉलीवुड सुंदरी दीपिका पादुकोण इन दिनों अपनी शादी को लेकर चर्चा में हैं, खबर हैं कि लंबे वक्त से एक-दूसरे के प्रेम में गिरफ्तार दीपिका-रणवीर सिंह दोनों नवंबर में ब्याह रचाएंगे, हालांकि दोनों ही ओर से अभी इस बारे में कुछ कहा नहीं गया है लेकिन बॉलीवुड गलियारों मे शादी के चर्चे चरम सीमा पर है। हाल ही में एक मेंटल हेल्थ इवेंट में पहुंचीं दीपिका पादुकोण से जब इस बारे में सवाल किया गया तो वो एकदम से गुस्सा हो गईं, उन्होंने कहा कि ये निश्चित रूप से असंवेदनशील सवाल है, जिसका आज के इवेंट से कोई लेना-देना नहीं है। ना तो ये सब्जेक्ट है आज बात करने का और ना ही तुक, मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगी।

शादी के सवाल पर भड़कीं दीपिका पादुकोण

शादी के सवाल पर भड़कीं दीपिका पादुकोण

आपको बता दें कि इवेंट में अपने डिप्रेशन से उबरने के एक्सपीरियंस को दीपिका मौजूद ऑडियंस के साथ शेयर कर रही थीं। तभी किसी रिपोर्टर ने दीपिका से उनकी शादी को लेकर सवाल किया कि क्या वह इस साल नवंबर में रणवीर संग शादी के बंधन में बंधने जा रही हैं, जिस पर अभिनेत्री को गुस्सा आ गया और उन्होंने पत्रकार को लताड़ लगा दी।

डिप्रेशन की शिकार थीं दीपिका पादुकोण

डिप्रेशन की शिकार थीं दीपिका पादुकोण

गौरतलब है कि दीपिका ने खुद बताया था कि एक वक्त था जब वो डिप्रेशन में चली गई थीं, बेहद ही कम वक्त में हिंदी सिनेमा की टॉप अभिनेत्रियों में शामिल होने वाली खूबसरत मस्तानी कहा था कि आज से करीब 4 साल पहले वो भी अवसाद ग्रसित थीं, अगर उनकी मां का सपोर्ट नहीं होता तो शायद वो भी आज किसी मानसिक अस्पताल में अपना इलाज करवा रही होतीं।

दीपिका मेंटल हेल्थ के लिए एनजीओ चलाती है

दीपिका मेंटल हेल्थ के लिए Live Love Laugh Foundation नाम का एनजीओ भी चलाती हैं, उन्होंने कहा कि कि अक्सर लोग इस बीमारी को सीरयसली नहीं लेते और जब ये बीमारी भयावह स्थिति में पहुंच जाती है, तब इसके लिए परेशान होते हैं। आजकल इस रोग की चपेट में सबसे ज्यादा हमारे युवागण हैं, जिसके पीछे कारण हद से ज्यादा लोगों का प्रतिस्पर्धी होना है।

 संवेदनाओं और भावनाओं का कत्ल

संवेदनाओं और भावनाओं का कत्ल

फिल्मी हसीना ने कहा कि आज लोग एक-दूसरे से आगे निकलने के चक्कर में संवेदनाओं और भावनाओं का कत्ल बड़ी आसानी से कर देते हैं, बस जहां ये कत्ल होता है वहीं से अवसाद के अंकुर फूटते हैं, ऐसे में मैं लोगों से कहना चाहती हूं वो घर में ऐसा माहौल अपने बच्चों के लिए पैदा करें जहां उन्हें किसी बात की असुरक्षा ना हो और बच्चा खुशी महसूस करे, वो अपनी भावनाओं से जुड़ी हर बात चाहे वो बीमारी हो या फिर डर, आराम से शेयर कर पाए।

सामाजिक कलंक

दीपिका ने कहा कि मानसिक बीमारी एक सामाजिक कलंक है,जिस दिन हम साथ मिलकर इससे पार पा लेंगे और जागरूकता फैलाएंगे, उस दिन हमें इस पर जीत मिल जाएगी। इस विषय पर सबको एक जुट होकर काम करना होगा।

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