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शादी के बाद बेटी की नहीं होती विदाई, देश की इकलौती मस्जिद में हजारों साल से जल रहा दीया, जानें दिलचस्प फैक्ट्स

शादी के बाद इस गांव में बेटियों की विदाई नहीं होती है। माता-पिता उनके लिए अलग से कमरा बनाते हैं। दूल्हा अपने ससुराल में ही बस जाते हैं।

चेरामन मस्जिद

Cheraman Juma Masjid: केरल के कुन्नूर में एक गांव ऐसा है जहां शादी के बाद बेटी की विदाई नहीं होती है। दूल्हा बारात लेकर तो आता है, लेकिन उन्हें उसी गांव में बसना पड़ता है। अगली सुबह दूल्हा के पिता-भाई समेत रिश्तेदार वापस चले जाते हैं, लेकिन दूल्हा को यहीं रहना होता है। होने वाले बच्चे पिता के सरनेम की जगह मां का सरनेम लगाते हैं। इस गांव का बहुत ही अनोखा परंपरा है। हजारों साल से लोग इस परंपरा का पालन कर रहे हैं। इस रिवाज को जानकर लोगों को घोर आश्चर्य भी होता है।

इस गांव से कुछ दूरी पर एक मस्जिद है। यह मस्जिद बाकी मस्जिदों की तरह नहीं दिखती है। यह किसी बंगला से कम नहीं है। खास बात यह है कि इस मस्जिद में महिलाएं नमाज पढ़ती हैं। केरल की यह मस्जिद देश की ऐसी पहली मस्जिद है और दुनिया की दूसरी मस्जिद। इसमें कई चौंकाने वाले फैक्टस हैं, इस मस्जिद में हजारों साल से दीया जल रहा है। हिंदू लोग भी इस मस्जिद में रहते हैं। वे दुकान भी चलाते हैं। अन्य धर्मों के लोग यहां नौकरी करते हैं। इस मस्जिद में देश से एक दिन पहले ईद मनाई जाती है।

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    यह दीया करीब 2000 साल पुराना है। इस दीये में सभी धर्म के लोग तेल डालते हैं। सभी धर्म के लोग आते हैं और दुआ मांगते हैं। इस मस्जिद के प्रमुख सिक्योरिटी गार्ड जैन हैं। सुरक्षाकर्मी 20 साल से इस मस्जिद में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस मस्जिद में हिंदू-मुस्लिम जैसा कुछ नहीं है। मस्जिज के बाहर हिंदू और ईसाई की अधिकतर दुकानें हैं। इस मस्जिद का निर्माण 626 ईस्वी में हुआ था।

    मुस्लिम महिलाएं हिंदू रिवाज के तहत मंगलसूत्र पहनती हैं। हालांकि उत्तर भारत में इस्लामिक संस्कृति में ऐसा नहीं है। शादी के बाद लड़की के लिए उनके माता-पिता वहीं गांव में अलग रूम बनवाते हैं। बेटियों के लिए अलग कमरे बनाए जाते हैं, जिससे वह वहां रह सके। बेटी अपने ससुराल नहीं आती हैं। निकाह के वक्त कबूल है कबूल है भी नहीं बोला जाता है। इस गांव की खास बात यह है कि महिलाएं ही सारे फैसले लेती हैं। महिला ही गांव की प्रमुख होती हैं।

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