दर्शन सिंह धालीवाल: एयरपोर्ट से लौटाए गए थे, मोदी सरकार अब दे रही अवॉर्ड

भारत सरकार मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में 8 से 10 जनवरी तक 17वां प्रवासी भारतीय दिवस मना रही है, जिसमें विदेशों में रह रहे 27 लोगों को सम्मानित किया जाएगा.

भारत सरकार मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में 8 से 10 जनवरी, 2023 के बीच 17वां प्रवासी भारतीय दिवस मना रही है.

इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान, चुनिंदा प्रवासियों को भारत और विदेशों में विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए भारत सरकार की ओर से प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित किया जाएगा.

इस बार अधिवेशन के तीसरे दिन 10 जनवरी को 27 हस्तियों को प्रवासी भारतीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा.

इनमें से एक नाम मूल रूप से पटियाला के डॉ. दर्शन सिंह धालीवाल का है. मूल रूप से पटियाला के रखरा गांव के धालीवाल अमेरिका में कारोबार कर रहे हैं और अपने समुदाय के कल्याण के लिए सक्रिय हैं.

ये वही दर्शन सिंह धालीवाल हैं जिन्हें अक्टूबर 2021 में दिल्ली एयरपोर्ट से वापस अमेरिका भेजा गया था.

कौन हैं दर्शन सिंह धालीवाल?

दर्शन सिंह धालीवाल तब चर्चा में आए थे, जब किसानों के आंदोलन के दौरान उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर रोक दिया गया था और भारत में प्रवेश पर रोक लगाने के बाद उन्हें वापस अमेरिका लौटना पड़ा था.

डॉ. दर्शन सिंह धालीवाल के छोटे भाई और वरिष्ठ अकाली नेता सुरजीत सिंह राखड़ा ने बीबीसी पंजाबी से अपने भाई के अमेरिका जाने और उनके काम के बारे में फोन पर बात की.

सुरजीत सिंह राखड़ा कहते हैं, ''मेरा भाई (दर्शन सिंह धालीवाल) 1972 में अमेरिका गया था और वहां तीन साल तक मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. वह शुरू से ही मेहनती थे."

सुरजीत सिंह राखड़ा अपने भाई के बिज़नेस के बारे में भी बताते हैं.

वह कहते हैं, "मेरे भाई अमेरिका के शिकागो में गैस स्टेशन (पेट्रोल पंप) चलाते हैं. इसके साथ ही हमारा प्रॉपर्टी का बिज़नेस भी है.

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किसान आंदोलन
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किसान आंदोलन

'लंगर बंद करो, किसानों के साथ सौदा करो या अमेरिका वापस जाओ'

अक्टूबर 2021 में किसान आंदोलन के दौरान दर्शन सिंह धालीवाल को एयरपोर्ट से वापस भेजे जाने वाला समय याद करते हुए उनके भाई सुरजीत कहते हैं, "जब दर्शन सिंह को दिल्ली एयरपोर्ट से वापस अमेरिका जाने के लिए कहा गया तो अधिकारियों ने कहा, 'लंगर बंद करो, किसानों से समझौता करो या अमेरिका वापस जाओ.''

तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए पंजाब, हरियाणा और कई अन्य राज्यों के किसानों ने एक साल से अधिक समय तक दिल्ली की सीमाओं पर धरना दिया था.

सुरजीत सिंह राखड़ा के मुताबिक साल 1997 में विश्व पंजाबी सम्मेलन की शुरुआत भी उनके भाई दर्शन सिंह धालीवाल ने की थी. सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों ने भाग लिया.

सुरजीत सिंह राखड़ा का कहना है कि भारत सरकार की ओर से उनके भाई को दिए जाने वाले प्रवासी भारतीय पुरस्कार के बारे में घोषणा सुनकर वो हैरान रह गए.

वो कहते हैं, ''लोग इस अवॉर्ड के लिए आवेदन करते हैं लेकिन हमने इसके लिए अप्लाई नहीं किया. सरकार की ओर से जब इस संबंध में जानकारी हमारे पास आई तो हम हैरान रह गए."

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समाज सेवा गतिविधियों में परिवार

डॉ. दर्शन सिंह धालीवाल का परिवार लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़ा हुआ है. उनके भाई सुरजीत सिंह राखड़ा इस बारे में बताते हैं.

उनका कहना है कि उनके पिता सूबेदार करतार सिंह धालीवाल फौज में थे.

वो कहते हैं, ''बापू जी ज़रूरतमंदों की सेवा करने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे, कपड़े बांटने से लेकर लंगर लगाने तक हर सेवा उन्होंने लगन से की.''

"अमेरिका के विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय में बापू जी के नाम से एक चेयर भी स्थापित की गई है जिसके तहत हर साल वहां पढ़ने जाने वाले सैकड़ों छात्रों को चार हजार डॉलर का स्टाइपेंड दिया जाता है."

उनका कहना है कि आनंदपुर साहिब स्थित दशमेश अकादमी जब बंद होने लगी तो परिवार ने एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद भी की.

इसके अलावा तमिलनाडु में आई सुनामी के दौरान भी उनके परिवार ने लंगर लगाए थे.

इसी सिलसिले में भारत सरकार के लाए तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली की सीमाओं पर लंगर लगाए गए थे.

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दर्शन सिंह धालीवाल
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दर्शन सिंह धालीवाल

"हम बापू से डरते थे"

संयुक्त परिवार में रहने वाले इस परिवार के बेटे सुरजीत सिंह राखड़ा अपने पिता के स्वभाव के बारे में बताते हुए कहते हैं कि उनके पिता का व्यवहार बहुत सख्त था.

वो कहते हैं, ''बापू जी सेना में थे, इसलिए उनका स्वभाव बहुत सख्त था. हम बापू से डरते थे."

"हमने बापू जी से कभी कोई सवाल नहीं किया, उन्होंने जो कहा वह हमारे लिए कानून था."

अपने पिता के बारे में वे आगे बताते हैं कि 1985 में उनके निधन के बाद "बापू जी के नाम पर पंजाबी साहिब अकादमी अवार्ड भी शुरू किया गया."

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प्रवासी भारतीय दिवस क्या है?

आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार , यह दिन हर दो साल में एक बार मनाया जाता है. इसका उद्देश्य भारत से बाहर रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों के साथ भारत सरकार के बंधन को मज़बूत करना और उन्हें उनकी जड़ों से फिर से जोड़ना है.

प्रवासी भारतीय दिवस की शुरुआत 9 जनवरी 2003 को हुई थी.

2015 से ये हर दो साल में एक बार मनाया जाता है.

2021 में, कोरोना महामारी के दौरान, 16वां प्रवासी भारतीय दिवस ऑनलाइन आयोजित किया गया, जिसका विषय था "आत्मनिर्भर भारत में योगदान".

इस वर्ष के 17वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का विषय है... "प्रवासी: अमृत के युग में भारत की प्रगति के लिए एक विश्वसनीय भागीदार".

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द्रौपदी मुर्मू
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द्रौपदी मुर्मू

प्रवासियों को सम्मानित करेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

मध्य प्रदेश के इंदौर में 17वें प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने काम से प्रसिद्धि हासिल करने वाले प्रवासियों को सम्मानित करेंगी.

इन प्रवासियों को प्रवासी भारतीय पुरस्कार दिए जाएंगे.

किन देशों के भारतीयों को मिलेगा अवॉर्ड

प्रवासी भारती पुरस्कार से सम्मानित होने वाली हस्तियों में वे लोग शामिल हैं जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपने काम और योगदान के लिए प्रसिद्धि हासिल की है.

17वें प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर भारतीय मूल की 27 हस्तियों को प्रवासी भारतीय पुरस्कार दिया जाएगा.

ये 27 हस्तियां दुनिया के अलग-अलग देशों में रहती हैं.

सम्मान के लिए चुने गए ये लोग अलग-अलग क्षेत्रों के हैं. इनमें कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, संस्कृति, व्यवसाय, सामाजिक सरोकार, मीडिया और अन्य क्षेत्र शामिल हैं.

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