अरुणाचल प्रदेश के तवांग में आज होगा दलाई लामा का स्वागत और बढ़ेगा चीन का ब्लड प्रेशर
चीन की लगातार धमकियों के बाद आज अरुणाचल प्रदेश के तवांग में होगा तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा का स्वागत। दलाई लामा तीन दिनों तक रहेंगे अरुणाचल प्रदेश में और बढ़ेगा चीन का ब्लड प्रेशर।
तवांग। तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा आज तीन दिनों के अरुणाचल दौरे के तहत तवांग पहुंच रहे हैं। यहां पर उनके भव्य स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दिलचस्प बात है कि इस दौरे को लेकर न तो दलाई लामा और न ही भारत को चीन की लगातार धमकियों को कोई असर पड़ा है। ऐसे में जब दलाई लामा तवांग पहुंचेंगे तो जाहिर सी बात है कि चीन का ब्लड प्रेशर हाई होगा।

लगातार चीन की धमकियां
चीन लगातार दलाई लामा के इस दौरे का विरोध करता आ रहा है क्योंकि तवांग चीन और भारत के बीच विवाद की असली वजह है। चीन इस हिस्से पर अपना हक जताता है। 81 वर्षीय दलाई लामा शनिवार को असम की राजधानी गुवाहाटी पहुंचे थे। तवांग और अरुणाचल के पश्चिमी कमांग के जिले बेसब्री से दलाई लामा का इंतजार कर रहे हैं।

खराब मौसम ने डाली बाधा
खराब मौसम की वजह से दलाई लामा का अरुणाचल दौरा देर से शुरू हो सका। दलाई लामा अरुणाचल के लुमला, तवांग बौद्ध मठ और दिरंग में नग्निगमापा बौद्ध मठ जाएंगे। स्थानीय प्रशासन दोनों ही जिलों में उनके स्वागत की तैयारियों में व्यस्त है। तवांग को धरती का 'आखिरी शांगरी ला' कहा जाता है।

सरकार से मिला तवांग को सम्मान
तवांग के बौद्ध मठ को 30 मार्च 2009 को भारत सरकार की ओर से चलाए गए 'इनक्रेडिबल इंडिया' कैंपेन के तहत भारत को 'सांतवां आश्चर्य' कहा गया था। अरुणाचल की रणनीतिक स्थिति कुछ ऐसी है कि यह बिहार के सारनाथ, तिब्बत के ल्हासा, भुटान और कई दक्षिणी पश्चिमी देशों के बीच पड़ता है। इसे भारत के बौद्ध पर्यटन के तौर पर आग बढ़ाया जा सकता है।

तनाव के बीच हो रहा है दौरा
दलाई लामा का अरुणाचल प्रदेश दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन के रिश्ते कुछ मुद्दों की वजह से पहले ही तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। भारत और चीन के रिश्तों पर इस समय जिन मुद्दों का असर पड़ रहा है उनमें चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) का भारत की ओर से विरोध, चीन की ओर से भारत की न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) में एंट्री को बैन करना और चीन की जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मौलाना मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने वाली याचिका में चीन का अड़ंगा डालना।

चीन के लिए अलगाववादी नेता
चीन हमेशा से दलाई लामा का अलगाववादी नेता मानता आया है और कहता है कि वह वर्ष 1959 में असफल सैन्य विद्रोह के बाद तिब्बत से भागकर भारत आए थे। चीन, दलाई लामा की उस प्रतिक्रिया को खारिज कर देता है जिसमें उन्होंने कहा था कि चीनी सेना की बढ़ती कार्रवाई की वजह से उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पड़ा था।

क्या कहा था दलाई लामा ने
एक अप्रैल को जब दलाई लामा असम पहुंचे थे तो उन्होंने उस पल को याद किया था कि कैसे उन्हें तिब्बत छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था। दलाई लामा ने बताया था, 'चीन की सेना की कार्रवाई लगातार बढ़ रही थी। मेरे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। 17 मार्च को मैं वहां से निकला।' उन्होंने आगे कहा था कि 58 वर्ष पहले तवांग में उन्हें जिस तरह का स्वागत मिला था, वह उनके लिए 'आजादी का पल' था।












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