नई दिल्ली में ‘अनश्वर’ का लोकार्पण, पहली बार सामने आए दलाई लामा के जीवन के अनछुए पहलू
नई दिल्ली के प्रतिष्ठित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में शनिवार का दिन इतिहास बन गया, जब दलाई लामा की पहली मौलिक हिंदी जीवनी 'अनश्वर' का भव्य विमोचन हुआ। यह केवल एक पुस्तक का लोकार्पण नहीं था, बल्कि तिब्बत की आत्मा, भारतीय आध्यात्मिक विरासत और मानवता के एक महानायक की जीवनगाथा का उत्सव था। मंच पर देश के प्रतिष्ठित चिंतक, राजनेता और लेखक मौजूद थे, लेकिन असली केंद्रबिंदु वह कृति थी, जिसने दलाई लामा के संघर्ष, निर्वासन, करुणा और अदम्य साहस को पहली बार इतने प्रमाणिक और विस्तृत रूप में हिंदी पाठकों के सामने रखा है।
समारोह में उपस्थित लोगों ने इस बात को विशेष रूप से महसूस किया कि 'अनश्वर' केवल शब्दों का ग्रंथ नहीं, बल्कि इतिहास के उन अध्यायों का जीवंत दस्तावेज है, जिन्हें दुनिया ने सुना तो है, पर कभी पूरी सच्चाई के साथ जाना नहीं। जीवनी की पहली प्रति पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी को भेंट की गई। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार, छात्र और दलाई लामा के अनुयायी बड़ी संख्या में मौजूद थे। दलाई लामा के प्रतिनिधि के रूप में गेशे दोर्जी दमदुल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

डॉ. कर्ण सिंह बोले - 'अनश्वर' हिंदी साहित्य की बड़ी उपलब्धि
अपने संबोधन में डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि यह पुस्तक सिर्फ एक जीवनी नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने बताया कि 1956 में पंडित नेहरू ने पहली बार उनका परिचय दलाई लामा से कराया था, और तब से उनका संबंध कायम है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में दलाई लामा की करुणा, साहस और आध्यात्मिकता का पूरा सार मिलता है।
डॉ. मुरली मनोहर जोशी बोले - आने वाली पीढ़ियों के लिए दस्तावेज
डॉ. जोशी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि दलाई लामा की शिक्षाएँ बहुत सरल, लेकिन जीवन बदलने वाली हैं। उन्होंने इस जीवनी को आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, "यह किताब उन्हें समझने का अवसर देती है, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी मानवता और शांति के लिए समर्पित की।"
गेशे दोर्जी दमदुल ने की लेखक की तारीफ
दलाई लामा के प्रतिनिधि गेशे दोर्जी दमदुल ने कहा कि लेखक ने तीन साल तक शोध करके यह जीवनी लिखी, इसमें दुर्लभ स्रोतों और ऐतिहासिक घटनाओं का विस्तार से वर्णन है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में भारत और तिब्बत के आध्यात्मिक रिश्ते का बहुत सुंदर चित्रण हुआ है।
दलाई लामा का विशेष संदेश
इस अवसर पर दलाई लामा ने भेजे अपने संदेश में कहा कि यह पुस्तक उनके जन्म से लेकर निर्वासन तक की यात्रा, तिब्बत के संघर्ष और उनकी अहिंसा की नीति को सामने लाती है। उन्होंने लिखा, "डॉ. अरविंद यादव ने तिब्बती लोगों की प्रतिबद्धता और मेरे कार्यों को ईमानदारी से प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक तिब्बत के इतिहास, संस्कृति और हमारे संघर्ष को दुनिया तक पहुँचाएगी।"
पहली बार सामने आए कई अनसुने तथ्य
'अनश्वर' को खास बनाता है कि इसमें कई ऐसे तथ्य पहली बार सामने आए हैं, जो किसी किताब या रिपोर्ट में दर्ज नहीं थे। इसमें बताया गया है -
- कैसे एक साधारण तिब्बती बच्चे की पहचान दलाई लामा के रूप में हुई
- कैसे उन्होंने मठों में शिक्षा ली
- चीन के आक्रमण के बाद कैसे उन्हें तिब्बत छोड़ना पड़ा
- भारत आने के बाद कैसे उन्होंने अपने धर्म, भाषा, चिकित्सा प्रणाली और कला को बचाने के लिए संघर्ष किया
- कैसे समय के साथ वे दुनिया के सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक नेता बन गए
तिब्बती संघर्ष और इतिहास का जीवंत वर्णन
पुस्तक में चीन के तिब्बत पर कब्ज़े के बाद तिब्बती समाज के संघर्ष का मार्मिक विवरण है। इसमें तिब्बती बौद्धों के उस प्रयास का भी जिक्र है, जिसमें उन्होंने हर हाल में अपनी परंपराओं, भाषा और संस्कृति को बचाए रखा।
सिर्फ जीवनी नहीं, प्रेरणा का स्रोत
यह जीवनी केवल दलाई लामा के जीवन की कहानी नहीं, बल्कि करुणा, धैर्य और आध्यात्मिकता का दस्तावेज़ है। इसमें इतिहास भी है, दर्शन भी और प्रेरणा भी।
कई भाषाओं में होगी प्रकाशित
डॉ. अरविंद यादव की यह कृति हिंदी के अलावा अंग्रेज़ी और अन्य भारतीय भाषाओं में भी प्रकाशित होगी, ताकि अधिक से अधिक लोग दलाई लामा के जीवन और विचारों को पढ़ सकें।
क्यों जरूरी है यह किताब
- यह दलाई लामा की पहली मौलिक हिंदी जीवनी है
- इसमें अनकही घटनाएँ और दुर्लभ जानकारियां शामिल हैं
- यह भारत-तिब्बत संबंधों की समझ को मजबूत करती है
- आने वाली पीढ़ियों को तिब्बती संघर्ष और अहिंसा के सिद्धांतों से परिचित कराती है
'अनश्वर' एक ऐसी कृति है, जो आध्यात्मिकता, इतिहास और मानवीय मूल्यों के संगम को समझने वालों के लिए अनमोल है। यह सिर्फ किताब नहीं, बल्कि एक दस्तावेज है जो बताता है कि करुणा और शांति की राह पर चलकर भी दुनिया बदली जा सकती है।
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