Cyclone Biparjoy: आधी रात तक जारी रहेगी लैंडफॉल की प्रक्रिया, हवाओं की रफ्तार 140KM प्रति घंटे का अनुमान
Cyclone Biparjoy: आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने जानकारी दी है कि चक्रवात 'बिपरजॉय' के लैंडफॉल की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो आधी रात तक जारी रहेगी। हवाओं की रफ्तार में इजाफा होगा।
Cyclone Biparjoy: शक्तिशाली चक्रवात बिपरजॉय के लैंडफॉल की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह प्रक्रिया गुरुवार की आधी रात तक जारी रहेगी। यह जानकारी भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दी है। साथ ही यह भी बताया कि लैंडफॉल के दौरान हवाओं की रफ्तार 115-125 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 140 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र कहते हैं कि चक्रवात 'बिपरजॉय' कराची और मांडवी के बीच और गुजरात के जखाऊ बंदरगाह के करीब तट से टकराएगा। सौराष्ट्र और कच्छ के तटीय जिलों में लैंडफॉल प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह प्रक्रिया आधी रात तक जारी रहेगी।

NDRF-SDRF तैनात
उधर, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार सुबह गांधीनगर में राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। चक्रवात 'बिपरजॉय' बैठक का मुख्य मुद्दा रहा। चक्रवात 'बिपरजॉय' से पूर्वोत्तर अरब सागर में अस्त-व्यस्त रहेगा। वहीं, मछली पकड़ने के सभी कार्यों को बंद रखा गया है। गुजरात के तटों पर चक्रवात से बचाव की तैयारी जोरों पर है। निकटवर्ती चक्रवात के बीच, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) को पहले ही तैनात किया गया है।
आईएमडी ने एक दिन पहले ही जारी की थी चेतावनी
वहीं, एक दिन पहले यानी बुधवार को आईएमडी ने सौराष्ट्र और कच्छ तटों के लिए रेड अलर्ट जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि वीएससीएस (वेरी सेवर साइक्लोनिक स्टॉर्म) बिपारजॉय गुरुवार शाम तक मांडवी और कराची के बीच जखाऊ पोर्ट के पास सौराष्ट्र और कच्छ और पाकिस्तान के आस-पास के तटों को पार कर जाएगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा उच्च गति वाली हवाओं, उच्च ज्वार और भारी वर्षा के कारण अस्थायी आवास संरचनाओं को व्यापक क्षति और पेड़ों और शाखाओं के गिरने के बारे में चेतावनी पहले ही जारी की जा चुकी है।
क्या होता है साइक्लोन लैंडफॉल?
मालूम हो कि जब चक्रवात समुद्र की ओर से आगे बढ़ते हुए जमीन पर पहुंच जाता है, तो उसे साइक्लोन का लैंडफॉल कहा जाता है। इस दौरान साइक्लोन का असर पानी के बाद जमीन पर नजर आता है। तेज हवाएं और तेज बारिश। इसी के साथ समुद्र का जल स्तर भी बढ़ता जाता है।












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