Dahi History: जब 'चमड़े की थैली' में रखा दूध दही बन गया, Curd Tamil साहित्य में भी मिलता है, जानिए रोचक इतिहास
दही की कहानी काफी दिलचस्प है। दक्षिण भारत में दही को अलग-अलग नामों से जानते हैं। तमिलनाडु में दही और हिंदी भाषा से पनपा विवाद मौका है, Curd यानी दही के इतिहास को जानने का। जानिए रोचक तथ्य

Dahi History: दही का जिक्र आते ही अक्सर एक साथ कई डेयरी उत्पादों की छवि भी जेहन में उभरती है। तमिलनाडु में डेयरी उत्पादों के पैकेट पर हिंदी वर्जन वाले नाम लिखने की बात हो रही है। मुख्यमंत्री और भाजपा समेत क्षेत्रीय उत्पादकों के विरोध के बाद फैसला बदला गया है। ऐसे में जानना काफी रोचक है कि जिस दही के नाम पर 'सियासी दंगल' जैसे हालात हैं, इसका इतिहास कितना पुराना है।
दही कितना पुराना
भले ही Tamil Nadu सांस्कृतिक रूप से भारत की सबसे पुरानी जगहों में एक है और कई बार पीएम मोदी भी यहां के कवियों और संस्कृति का जिक्र कर चुके हैं, लेकिन फिलहाल भारत का ये तटीय राज्य दही के कारण विवाद जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। विवाद और भाषाई रार से इतर ये मौका है दही के बारे में कुछ रोचक बातें जानने का। कुछ फूड हिस्ट्री में रूचि रखने वाले लोगों के अनुसार दही का इस्तेमाल कम से कम 4500 साल या इससे भी अधिक पुराना है। अधिकांश भारतीय लोग दही खाकर बड़े हुए अगर ऐसा कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं। बड़े चाव से खाई जाने वाली दही का इस्तेमाल श्रीखंड बनाने में भी होता है। इससे रायता भी बनाते हैं और लस्सी और छाछ यानी मट्ठा, दही से तैयार होने वाले बहुत कॉमन आइटम हैं।
दही तमिल साहित्य में भी!
दी हिंदू की रिपोर्ट में चित्रा बालासुब्रमण्यम लिखती हैं कि वेदों में भी दही का उल्लेख है। चित्रा के अनुसार, तमिल साहित्य में दही को काली मिर्च, दालचीनी और अदरक का उपयोग करके मसालेदार बनाया जाता है। इस आधार पर ऐसा अनुमान है कि दही वड़े में दही मिलाना और इसे अलग-अलग जायके वाली चटनी और अनार के दानों के साथ मसालेदार बनाना प्राचीन आदत (Ancient Habit) हो सकती है।
Dahi History ईसा-पैगंबर के जन्म से भी पुराना
दही का इस्तेमाल नॉन वेज खाने में भी होता है। आम धारणा है कि मरिनेड्स (Marinades) मुस्लिम लोगों के नॉनवेज पकाने के तरीकों से शुरू हुआ। हालांकि, इस संबंध में हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में वीर सांघवी ने खाने पीने की चीजों के जानकार और फूड हिस्टॉरियन केटी आचार्य के हवाले से बताया है कि दही से मैरिनेड्स का उल्लेख अर्थशास्त्र में भी मिलता है। इसकी रचना ईसा मसीह या पैगंबर मोहम्मद के जन्म से बहुत पहले हुई। इस आधार पर दही को कई हजार साल पुराना माना जा सकता है।
वैदिक काल में भी दही का इस्तेमाल!
बकौल वीर सांघवी, केटी आचार्य कहते हैं कि भारतीय व्यंजनों में दही का महत्व प्रागैतिहासिक काल (prehistoric times) से है। ऋग्वेद में भी दही चावल के व्यंजन का उल्लेख मिलता है। वैदिक काल में, चावल के साथ दही खाई जाती थी। श्रीखंड का पहला संदर्भ लगभग 500 ईसा पूर्व (या बुद्ध के जन्म से पहले भी) आया था। 1000 ईस्वी तक, दही का नियमित रूप से खाना पकाने में उपयोग किया जाता था।
दही का इतिहास भारत जितना पुराना
मसालों और दही में पकाई गई सब्जियों को जटिल व्यंजन माना जाता है। पकाने के अंत में इसमें तेल में तले हुए मसालों से वघार लगाई जाती है। हालांकि दही-वड़े का पहला संदर्भ 12वीं शताब्दी में मिलता है। वीर सांघवी के अनुसार, केटी आचार्य बताते हैं कि दही के इस्तेमाल वाले व्यंजन की उत्पत्ति पहले भी हुई होगी। दही कितना पुराना इसे महसूस करने के लिए, आपको याद रखना चाहिए कि अब हम जिन फूड आइटम्स को भारतीय भोजन का अभिन्न अंग मान चुके हैं। इनमें से कई चीजें ऐसी हैं जो मूल रूप से भारती नहीं हैं। मसलन आलू, मिर्च, टमाटर और यहां तक कि मैदा। मध्ययुगीन या आधुनिक काल तक इनका भारत में जिक्र नहीं मिलता। हालांकि, इसके विपरीत, दही लगभग उतनी ही पुरानी है, जितना पुराना भारत है।
पहली बार चमड़े की थैली में जमी दही
दही की रिकॉर्डेड हिस्ट्री के बारे में मशहूर शेफ रणवीर बरार बताते हैं कि ये वैसी ही स्थिति है कि मुर्गी पहले आया या अंडा पहले। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि दही का जिक्र 10000 BC के बाद से माना जाता है। ऐसे में कम से कम 10 हजार साल पुराना कहना गलत नहीं। बरार के अनुसार सबसे पहली बार गलती से दही जमने के बाद शुरु होता है खाने में दही के इस्तेमाल का किस्सा। पुराने समय में मशकों में पानी और दूध जैसी चीजें लेकर जाते थे। मशक यानी चमड़े की थैली में दूध रखने जाने के बाद तापमान और एंजाइम मिलने के कारण दूध जमकर दही बन गया। इतिहास काफी रोचक है लेकिन साइंस के इस युग में सामान्य समझ यही है कि दही का इतिहास कम से कम 10 हजार साल पुराना जरूर है। खास बात ये कि उर्दू भाषा का शब्द मशक को भिश्ती भी कहा जाता है। इसका जिक्र प्रेमचंद की कहानियों में मिलता है।
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कितनी पुरानी है दही
10 हजार बीसी को कितना पुराना माना जाए, इस पर अमेरिका के न्यूयॉर्क की कोलगेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रॉबर्ट गारलैंड बताते हैं कि इतिहास का ये समय मेसोपोटामिया यानी वर्तमान दौर के इराक, दक्षिण-पूर्व तुर्की का हिस्सा और पूर्वोत्तर सीरिया से जुड़ा है। मेसोपोटामिया एक ग्रीक शब्द है जिसका अर्थ है 'दो नदियों के बीच की जमीन' इतिहास में दोनों नदियों को टाइग्रिस और यूफ्रेट्स नाम से जाना जाता है। इनके अनुसार 10 हजार बीसी नवपाषाण काल पाषाण युग का अंतिम काल था। 10 हजार बीसी लगभग 12,000 साल पहले उस दौर को कहते हैं जब मानव जीवन अधिक सुरक्षित हुआ। इसी समय मानव जीवन का एक दैनिक पैटर्न भी स्थापित हुआ।
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