नक्सली हमले में खाई 7 गोलियां, अब पॉलीथिन में आंत रख कर भटक रहा है CRPF जवान
नई दिल्ली। 2014 में सुकमा के नक्सली हमले में 17 सीआरपीएफ के जवान मारे गए थे। इस हमले में मध्य प्रदेश मुरैना के रहने वाले मनोज सिंह तोमर एकलौते ऐसे जवान थे जो जिंदा बच गए थे। उनके पेट में सात गोलियां लगीं, जान बच गई लेकिन बेहतर इलाज के अभाव में मनोज पेट से बाहर निकली आंत पॉलीथिन में लपेटकर जीवन बिताने को मजबूर हैं। गृहमंत्री राजनाथ सिंह शहीद जवानों को और उनके परिजनों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहने की बात करते हैं, लेकिन इसी सीआरपीएफ का एक जवान इलाज के लिए दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर है।

आंंत ही नहीं गोली लगाने से आंख भी हो गई खराब
इतना ही नहीं इस सिपाही की एक आंख गोली लगने की वजह से खराब हो गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी आंख की रोशनी फिर से आ सकती है और आंत भी दोबारा पेट में डाली जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए करीब 5 से 7 लाख रुपए की जरूरत है। मनोज के पास इतने पैसे नहीं है, यही कारण है कि वह पिछले चार सालों से इतना कष्टदायक जीवन जीने को मजबूर हैं। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी वह मिल चुके है। उन्होंने वादा किया था कि वह उन्हें 5 लाख रुपये की मदद कराएंगे। उनका आवेदन लेकर दो साल पहले जुलाई में सरकार को भेज दिया गया था लेकिन उसके बाद से आज तक उनके उस आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की सुरक्षा
मनोज तोमर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की सुरक्षा में भी कई सालों तक तैनात रहे हैं। मनोज ने बताया कि, उन्हें सीआरपीएफ से कोई शिकायत नहीं है। उन्हें सरकार और उसके नियमों से शिकायत है। सीआरपीएफ के नियम के मुताबिक अनुबंधित अस्पताल में इलाज कराया जा सकता है। लेकिन अगर सीआरपीएफ जवान अपने स्तर पर दूसरे अस्पताल में जाएगा तो उसका खर्चा सरकार नहीं उठाएगी। यह खर्चा उसे खुद उठाना पढ़ेगा।

शिवराज सिंह ने दी 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद
मनोज तोमर का मामला जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो छत्तीसगढ़ काडर के सीनियर आईएएस अफसर सोनमणि बोरा ने इस मामले को संज्ञान में लिया। उन्होंने न सिर्फ सोशल मीडिया पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को जवान की हालत से अवगत कराया बल्कि उनसे जवान की मदद की अपील भी की। इसके बाद सीआरपीएफ की ओर से इस मामले पर प्रतिक्रिया आई है। सीआरपीएफ की ओर से एम्स में इलाज करवाने में मदद की बात कही है। साथ ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिहं ने मनोज कुमार को 10 रुपए की आर्थिक सहायता और उनके भाई के लिए नौकरी का एलान किया है।

राज्य सरकार ने दिए मदद के निर्देश
मनोज के मुताबिक, एम्स में उनका इलाज कराने का प्रबंध केवल सरकार ही करवा सकती है। वहीं उनकी आंख का इलाज चेन्नई के अस्पताल में ही हो सकता है, इसका इंतजाम भी केवल सरकार ही करवा सकती है। राज्य सरकार ने मुरैना कलेक्टर को निर्देशित भी किया कि जवान मनोज को पूरी तरह से मदद दी जाए।
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