काबिलेतारीफ : जो आईसीसी नहीं कर पाया वो क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कर दिया
अफगानिस्तान में राजनीति की कीमत क्रिकेट को चुकानी पड़ी। 27 नवम्बर को होबार्ट में अफगानिस्तान के खिलाफ खेले जाने टेस्ट मैच को ऑस्ट्रेलिया ने रद्द कर दिया है। अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा जमाने के बाद तालिबानी शासकों ने दो महीना पहले ही महिला क्रिकेट को प्रतिबंधित कर दिया था। ऑस्ट्रेलिया ने मानवीय आधार पर तालिबान के इस फैसले का विरोध किया था। उसने उस समय ही इस टैस्ट मैच को रद्द करने की धमकी दी थी। अब इसकी औपचारिक घोषणा कर दी गयी है। ऑस्ट्रलिया पहला देश है जिसने तालिबान के कारण किसी क्रिकेट टेस्ट मैच को रद्द किया है। यह ऐतिहासिक फैसला है।

क्या कहा क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने ?
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा, इस महीने होबार्ट में खेला जाने वाला पुरुष टेस्ट मैच योजना के अनुसार आगे नहीं बढ़ेगा। आस्ट्रेलिया के वरिष्ठ खिलाड़ियों ने संकेत दिया है कि अगर अफगानिस्तान में महिला क्रिकेट पर वास्तविक प्रतिबंध लगा रहता है तो वे मैच को रद्द होते हुए देखना चाहेंगे। क्रिकेट आस्ट्रेलिया ने अपने बयान में कहा है, वह अफगानिस्तान समेत दुनिया भर में महिलाओं तथा पुरुषों के खेल को बढ़ावा देने और समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान अनिश्चितता (अफगानिस्तान) को देखते हुए वह इस टेस्ट मैच को तब तक के लिए स्थगित करना चाहता है जब तक कि स्थिति स्पष्ट न हो जाए। हम आगे की सोच रहे हैं कि अफगानिस्तान में महिला और पुरुष क्रिकेट का आयोजन अब भविष्य में दूर की बात नहीं है।

तालिबान का महिला क्रिकेट पर प्रतिबंध
तालिबान ने 15 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान पर कब्जा जमाया था। तालिबान ने शरिया कानून के हिसाब से शासन चलाने की घोषणा की थी। तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के उपप्रमुख अहमदुल्ला बसीक ने सितम्बर 2021 में कहा था, "महिलाएं नये शासन में क्रिकेट या अन्य खेल नहीं खेलेंगी। यह जरूरी नहीं है कि महिलाएं क्रिकेट खेलें। क्रिकेट में उन्हें ऐसी स्थिति का सामना कारना होगा जहां उनका चेहरा और शरीर ढका नहीं होगा। इस्लाम महिलाओं को इस तरह की इजाजत नहीं देता।" तालिबान के इस फैसले पर ऑस्ट्रेलिया ने एतराज जताया था। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) पुरुष और महिला टीम में कोई भेदभाव नहीं करती। आइसीसी के नियमों के मुताबिक हर पूर्ण सदस्य देश के लिए पुरुष के साथ-साथ महिला टीम को भी मैदान में उतारना जरूरी है। जब अफगानिस्तान में अशरफ गनी की सरकार थी तब वहां इसी नियम के तहत राष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम को बनाने की मुहिम शुरु हुई थी। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने 2020 में 25 महिलाओं को अनुबंध पत्र सौंपे थे। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां की औरतें काफी डर गयीं थीं। रोया शमीम नाम की महिला क्रिकेटर अपनी दो बहनों के साथ अफगानिस्तान छोड़ कर कनाडा चली गयीं थीं। हालांकि अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के कार्यवाहक अध्यक्ष अजिजुल्ला फजली ने कहा था कि बोर्ड से अनुबंधित सभी 25 महिला खिलाड़ी अफगानिस्तान में ही हैं। देश छोड़ कर कोई बाहर नहीं गया है।

क्या आइसीसी ने महिला क्रिकेटरों की मदद नहीं की ?
ऑस्ट्रेलिया ने लैंगिक भेदभाव के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले सभी 12 पूर्ण सदस्य देशों में से सिर्फ आस्ट्रेलिया ने ही तालिबान के फैसले का साहसिक विरोध किया। उसने तालिबान की महिला विरोधी नीति को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पुरजोर तरीके से उठाया। बल्कि कहा जाय तो ऑस्ट्रेलिया ने क्रिकेट के जरिये तालिबान की राजनीतिक सोच पर एक बड़ा हमला किया है। ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम के कप्तान टिम पेन ने कहा था कि उस देश के साथ क्यों क्रिकेट खेला जाय जहां आधी आबादी के साथ भेदभाव किया जाता हो। ऑस्ट्रेलिया का यह फैसला इस लिए भी तारीफ के काबिल है क्यों इस मामले में आइसीसी ने अफगानी महिला क्रिकेटरों की मदद नहीं की। अफगानिस्तानी क्रिकेट बोर्ड से अनुबंधित रोया शमीम ने आरोप लगाया था, सभी 25 अनुबंधित महिला क्रिकेटरों ने अपनी सुरक्षा को लेकर आइसीसी को एक मेल किया था। लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि आइसीसी ने इस तरह के किसी मेल का खंडन किया था। आइसीसी तो खुल कर तालिबान के खिलाफ नहीं आ सका लेकिन क्रिकेट आस्ट्रेलिया ने मानवीय कारणों के लिए काबिलेतारीफ फैसला लिया। महिला अधिकारों की रक्षा के लिए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की यह लाजवाब बैटिंग हमेशा याद रखी जाएगी।












Click it and Unblock the Notifications