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लॉकडाउन के कारण यहां की महिलाएं लगातार प्रेग्नेंट हो रही हैं , जानिए क्या है पूरा मामला?

नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस महामारी के चलते घोषित 21 लॉकडाउन के कारण सूदर अफ्रीकी देश युगांडा की महिलाए असुरक्षित संबंधों के चलते अनचाहे गर्भवती हो रही है, क्योंकि लॉकडाउन के चलते लगभग सभी गर्भनिरोधकों उपायों की सप्लाई बंद है। ऐसे में अनचाहे गर्भ से परेशान अफ्रीकी देश जिम्बाबे की औरतें अब फोन करके आंसू बहा रही है। ग्रामीण जिम्बाब्वे की औरतें विनती करके पूछ रही हैं कि आखिर परिवार नियोजन सेवाओं की वापसी कब होगी?

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गौरतलब है कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए थोपे गए लॉकडाउन ने अफ्रीका, एशिया और अन्य जगहों की लाखों महिलाएं परिवार नियोजन और अन्य यौन और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी सामग्री मिलनी बंद हो गई हैं, जिससे अपने पति और पुरूष मित्रों के साथ घरों तक सीमित हुई औरतों को अवांछित गर्भधारण का सामना करना पड़ रहा हैं।

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जिम्बाव्वे के मैरी स्टॉप्स इंटरनेशनल के निदेशक अबेब शिब्रू ने मीडियासे बातचीत में कहा कि लॉकडाउन के अनिश्चित समयों में महिलाओं के गर्भाशय को बंद करना होगा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में इसका कोई रास्ता नहीं है। अफ्रीका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के अनुसार अफ्रीका के 18 देशों ने राष्ट्रीय लॉकडाउन की घोषणा की है, लेकिन अभी हफ्तों तक या शायद लंबे समय तक घर में रहना पड़ सकता है।

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उल्लेखनीय है उप-सहारा अफ्रीकी देश रवांडा पहला देश था, जिसने covid19 महामारी की रोकथाम के लिए लॉकडाउन लगाया, जिसे दो सप्ताह के बाद फिर बढ़ा दिया गया, जिससे लॉकडाउन खुलने और आवश्यक चीजों की सप्लाई की संभावना के संकेत मिलते हैं। जहां परिवार नियोजन साधन की उपलब्धता है, वहां प्रदाताओं का कहना है कि कई महिलाएं बाहर निकलने से डरती हैं और नए प्रतिबंधों तोड़ने के जुर्म में सुरक्षा बलों द्वारा पीट दी गई।

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दरअसल, महामारी के बीच एक समुदाय से दूसरे समुदाय तक संक्रमण को रोकने के लिए ग्रामीण महिलाओं तक पहुंचने वाली महत्वपूर्ण सेवाएं उनकी पहुंच से दूर हो गई हैं। इंटरनेशनल प्लान्ड पेरेंटहुड फेडरेशन (IPPF) ने गुरुवार को एक नई रिपोर्ट में कहा कि दुनिया भर के पांच सदस्यों वाले क्लीनिक में से एक से अधिक क्लीनिक महामारी और संबंधित प्रतिबंधों के कारण बंद हो गए हैं।

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बताया जाता है कि कुल 64 देशों में 5,000 से अधिक मोबाइल क्लीनिक बंद हो गए हैं, जिनमें से अधिकांश दक्षिण एशिया और अफ्रीका में हैं, लेकिन लैटिन अमेरिका और यूरोप में यह आंकड़ा सैकड़ों में है।

यह भी पढ़ें-यहां कोरोना वायरस शब्द के इस्तेमाल पर लगा प्रतिबंध, जानिए क्या है पूरा मामला?

लॉकडाउन में अफ्रीकी महिलाएं गर्भ निरोधकों की कमी का सामना कर रही हैं

लॉकडाउन में अफ्रीकी महिलाएं गर्भ निरोधकों की कमी का सामना कर रही हैं

पाकिस्तान से जर्मनी से लेकर कोलंबिया तक मौजूद आईपीपीएफ के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने एचआईवी टेस्ट और खतना( Gender based violence response work) बंद कर दिया है और गर्भ निरोधकों की कमी का सामना किया है। IPPF के महानिदेशक अल्वारो बेरमेज़ो ने एक बयान में कहा कि महिलाओं को उनकी ज़रूरत की चीजों के लिए और इंतजार नहीं कराया जा सकता है, जो सरकारों से अपने अंतरंग देखभाल के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण के लिए राष्ट्रीय सरकारों से मदद की गुहार लगा रही हैं।"

लॉकडाउन के चलते गर्भ निरोधक ही नहीं, कई सुविधाओं में कमी आई है

लॉकडाउन के चलते गर्भ निरोधक ही नहीं, कई सुविधाओं में कमी आई है

यूरोप में बुधवार को 100 गैर-सरकारी समूहों ने महामारी के दौरान प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकारों से आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि कई सुविधाओं में तेजी से कमी आई है या उन्हें बंद कर दिया गया है। फ्रांसीसी सरकार ने पिछले महीने कहा था कि लॉकडाउन के चलते डाक्टरों की सलाह लेने में असमर्थ महिलाओं को फॉर्मेसीज गर्भनिरोधक गोलियां की डिलीवर कर सकते हैं।

अफ्रीका में लॉकडाउन के चलते बच्चों के जन्म में उछाल की भविष्यवाणी

अफ्रीका में लॉकडाउन के चलते बच्चों के जन्म में उछाल की भविष्यवाणी

अकेले अफ्रीका में लॉकडाउन के चलते बच्चों के जन्म में उछाल की भविष्यवाणी की गई है जबकि कई देशों में जन्म दर में गिरावट आई है, क्योंकि वहां लड़कियों को अधिक शिक्षित किया जाता है, लेकिन लॉकडाउन में अनचाहे गर्भ से प्रग्नेंसी से वहां बच्चों के जन्म दर में वृद्धि संभव है जैसा कि पहले से ही अनुमान किया जा चुका है कि 2050 तक यहां मौजूद 130 करोड़ की आबादी दोगुनी हो जाएगी।

अफ्रीका में 60% से अधिक ग्राहकों तक सेवा पहुंचने वाली सुविधा निलंबित हैं

अफ्रीका में 60% से अधिक ग्राहकों तक सेवा पहुंचने वाली सुविधा निलंबित हैं

जिम्बाव्वे के मैरी स्टॉप्स इंटरनेशनल ने पिछले साल 400,000 से अधिक महिलाओं को परिवार नियोजन सेवाएं मुहैया कराई थीं। निदेशक शिब्रू ने बताया कि इनमें करीब 50,000 महिलाओं का असुरक्षित गर्भपात हैं, लेकिन 60% से अधिक ग्राहकों तक पहुंचने वाली संगठन की सेवाएं अब निलंबित हैं। यहां तक ​​कि क्लीनिक जो खुले रहते हैं, वहां ग्राहकों की संख्या में 70% की गिरावट आई है।

लॉकडाउन के चलते कामगार पुरुष घरों में खाली हाथ बैठे हैं

लॉकडाउन के चलते कामगार पुरुष घरों में खाली हाथ बैठे हैं

लॉकडाउन के चलते कामगार पुरुष घरों में बैठे हैं, क्योंकि अब खेतों या अन्य जगहों पर काम करने के लिए वो स्वतंत्र नहीं है और मनोरंजन के दूसरे साधनों के अभाव में पुरूष अब अपनी पत्नियों के साथ सप्ताह के अंत तक घरों तक सीमित रहते हैं। ऐसे में घरों में बंद पति और पत्नी उस घर में और क्या कर सकते हैं?"

अधिकांश गर्भ अनचाहे है, जो असुरक्षित गर्भपात व घरेलू हिंसा की वजह बनेंगी

अधिकांश गर्भ अनचाहे है, जो असुरक्षित गर्भपात व घरेलू हिंसा की वजह बनेंगी

मैरी स्टॉप्स इंटरनेशनल में एक आउटरीच कार्यकर्ता फ्यूचर ग्वेना ने कहा "मुझे लगता है कि हमारे पास बहुत सारी गर्भस्थ महिलाएं हैं और दुर्भाग्य यह है कि अधिकांश अनचाही है, जो असुरक्षित गर्भपात और घरेलू हिंसा की वजह बनेंगी। शिब्रू ने कहा, हमारा समुदाय पितृसत्तात्मक है। अगर घर में कुछ गलत होता है, तो मां की गलती है, भले ही आदमी ने इसे शुरू किया हो।सामान्य समय में भी गर्भनिरोधक चाहने वाली औसत महिला को अपने पति से सहमति लेना पड़ता है।

आपातकालीन गर्भ निरोधकों की शिपमेंट की प्रतीक्षा कर रहे कंपनियां

आपातकालीन गर्भ निरोधकों की शिपमेंट की प्रतीक्षा कर रहे कंपनियां

एशिया में महामारी के चलते यात्रा प्रतिबंध और मैन्यूफैक्चरिंग में मंदी में कुछ परिवार नियोजन प्रदाता आपातकालीन गर्भ निरोधकों और अन्य वस्तुओं के शिपमेंट की प्रतीक्षा कर रहे हैं क्योंकि घर पर मौजूद स्टॉक खत्म हो चुका है। शिब्रु ने कहा, "आज मैं एशिया से शिपमेंट की उम्मीद करता हूं, लेकिन यह निलंबित है और मुझे नहीं पता कि इस अंतर को कैसे भरा जाए, क्योंकि आने वाले छह महीने वो हमें सेवा देने वाले थे

 युगांडा में गर्भ निरोधकों का शिपमेंट का प्रमुख स्रोत भारत है

युगांडा में गर्भ निरोधकों का शिपमेंट का प्रमुख स्रोत भारत है

उन्होंने कहा कि यह त्रासदियों में से एक है, हम अफ्रीकी देशों में गर्भ निरोधकों की भारी कमी की उम्मीद कर रहे हैं, जिसमें कंडोम भी शामिल है। युगांडा में मैरी स्टॉप्स के निदेशक कैरोल सेकिम्पी ने कहा कि उन्हें नहीं पता है कि आपातकालीन गर्भ निरोधकों का शिपमेंट कब आएगा, क्योंकि उनके प्रमुख स्रोतों में से एक भारत में लॉकडाउन है। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने से उनके पास स्टॉक नहीं हैं और अब उन्हें ओरल गर्भनिरोधक गोलियों की भी जरूरत है।

केन्या नैरोबी में और मोम्बासा में लॉकडाउन के बारे में सोच रहा है

केन्या नैरोबी में और मोम्बासा में लॉकडाउन के बारे में सोच रहा है

बकौल कैरोल सेकिम्पी, "कल जब मैंने सुना कि (पड़ोसी देश) केन्या नैरोबी में और मोम्बासा में लॉकडाउन के बारे में सोच रहा है तो मैंने सोचा,, मेरे भगवान, हमारे सभी शिपमेंट में क्या होने जा रहा है?" "उन्होंने कहा "कुल मिलाकर, वहाँ निश्चित रूप से एक समस्या होने जा रही है।" उन्होंने कहा कि वो अपने चाचा और चचेरे भाइयों के साथ घरों में सीमित लड़कियों और महिलाओं के बारे में चिंतित थी, जो संभावित हमलावर हो सकते हैं। उनका कहा है कि उनके संगठन ने आउटरीच को निलंबित कर दिया है, जो लगभग 40 फीसदी सेवाएं प्रदान करता है, और खुले हुए क्लिीनिक में आने वाले ग्राहकों में तादाद में लगभग 20 फीसदी की गिरावट देखी गई है।

अफ्रीका में एक सेवा जो निलंबित की गई है, वह परिवार नियोजन सेवा

अफ्रीका में एक सेवा जो निलंबित की गई है, वह परिवार नियोजन सेवा

सेकीम्पी ने कहा कि यहां तक ​​कि राजधानी कंपाला भी इससे प्रभावित है। उन्होंने बताया कि सोमवार को एक बड़े सरकारी अस्पताल का दौरा किया, "लेकिन जब मैं वहां पहुंची तो मेरा दिल टूट गया, क्योंकि वहां भी एक सेवा जो निलंबित की गई है, वह परिवार नियोजन सेवा थी, क्योंकि उक्त सेवाओं में आमतौर पर भीड़ जमा होती है। "

अफ्रीकी महाद्वीप में बच्चों का जन्मदर बढ़ेगा और असुरक्षित गर्भपात होगा

अफ्रीकी महाद्वीप में बच्चों का जन्मदर बढ़ेगा और असुरक्षित गर्भपात होगा

उन्होंने कहा कि वह उम्मीद करती है कि इससे अफ्रीकी महाद्वीप में न केवल बच्चों का जन्मदर बढ़ेगा, बल्कि असुरक्षित गर्भपात और गर्भपात के बाद की देखभाल के मामलों में वृद्धि होगी। साथ ही घबराई हुई महिलाएं अपने आईयूडी (अंतर्गर्भाशयी उपकरण) या जन्म नियंत्रण किट को हटाने की मांग करती हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि कोई परिवार नियोजन कार्यकर्ता बाद में उन्हें हटाने के लिए नहीं मिलेगा।

युगांडा में अमेरिकी दूतावास ने महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान दिया

युगांडा में अमेरिकी दूतावास ने महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान दिया

युगांडा में अमेरिकी दूतावास ने महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान दिया और ट्वीट करके कहा कि "महामारी के लिए माहवारी नहीं रूकती है और घर पर धोने योग्य सैनिटरी पैड बनाने के बारे में सलाह साझा किया। जिम्बाब्वे में शिब्रू ने इथियोपिया, केन्या, मलावी, मेडागास्कर और अन्य जगहों पर मौजूद निदेशकों के साथ दैनिक कॉल का हवाला देते हुए कहा कि यह मुद्दा पूरे अफ्रीका में समान है।

Covid19 के बाद एक और तबाही आएगी, जो महिलाओं के स्वास्थ्य की होगी

Covid19 के बाद एक और तबाही आएगी, जो महिलाओं के स्वास्थ्य की होगी

उन्होंने कोरोना वायरस के कारण होने वाली बीमारी के बारे में कहा कि Covid19 महामारी के चलते सब कुछ बदल दिया गया है और अगर अभी कुछ नहीं किया जाता है तो Covid19 के बाद एक और तबाही आएगी, जो महिलाओं के स्वास्थ्य की होगी।

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