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Covid19: जानिए, किसके लिए सिरदर्द बन गए हैं मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपाय

नई दिल्ली। कोरोनोवायरस महामारी के प्रसार के बीच सुरक्षा एजेंसियों के लिए बुरे सपने की तरह हैं। यह इसलिए, क्योंकि महामाारी के कारण उनके सामने विभिन्न खतरे उभरे हैं। इनमें फ़िशिंग, साइबर हमले, इन्फोडेमिक और मालवेयर जैसी समस्याएं प्रमुख हैं। इसके अलावा Covid19 संक्रमण के प्रसार के रोकथाम के लिए प्रभावी मास्क भी सुरक्षा अधिकारियों के लिए परेशान का बड़ा सबब बन गए हैं।

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सुरक्षा से जुड़े एक सुरक्षा अधिकारी ने वनइंडिया को बताया कि मास्क उनके लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है, क्योंकि सीसीटीवी फुटेज देखकर अपराधों पर नकेल कसना बेहद मुश्किल हो गया है, क्योंकि संदेह वाले अपराधियों का चेहरा भी मास्क से ढंका होगा।

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उन्होंने बताया कि यह समस्या सीसीटीवी फुटेज तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि मास्क की वजह से हवाई अड्डों और अन्य स्थानों पर लोगों की स्क्रीनिंग करना भी बहुत मुश्किल होगा। उन्होंने बताया कि यह अभी भी चुनौतीपूर्ण बना रहेगा, क्योंकि संदेहास्पद व्यक्ति को अपना चेहरा ढंकना होगा।

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गौरतलब है सुरक्षा अधिकारियों के लिए सोशल डिस्टेंसिंग मानदंड भी एक अतिरिक्त चुनौती बना हुआ हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि यह एक असाधारण समय हैं और मास्क के साथ ही साथ सोशल डिस्टेंसिंग मानदंड दोनों बेहद महत्वपूर्ण हैं।

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हालांकि इस बीच हमलावर तकनीकों में फ़िशिंग सबसे आम बनी हुई है, जिसका प्रमुख टारगेट WHOहैं, जहां हमलावर दुनिया भर में कथित प्राधिकरण के संदर्भ में एक स्पैमिंग ईमेल और संदेश के माध्यम से भेष बदलकर हमला करता है। हमलावर ईमेल यूजर्स को सुरक्षा छलावों के जरिए एक URL अथवा डाक्यूमेंट को डाउनलोड करवाकर पीड़ितों को नुकसान पहुंचाने का कोशिश करेगा।

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इसके अलावा स्कैमर भी दर्शकों को भ्रमित करने के लिए हूबहू असली की तरह एक नकली डोमेन पंजीकृत करेगा। इन्फोडेमिक भी एक एक और बड़ी समस्या है, जिसका दुनिया सामना कर रही है। इसके बारे में कहा जाता है कि हमलावर बायो हथियार के रूप में इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर हिस्टीरिया पैदा किया जा रहा है। इसका उपयोग नस्लवाद को उकसाने के लिए भी किया जाता है।

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दूसरा मुद्दा है कि कोरोनोवायरस के प्रकोप के बाद पंजीकृत वेबसाइटों की बढ़ती संख्या है, जहां गलत सूचना फैलाई गई है। ऐसे वेबसाइट्स पर फ़िशिंग पृष्ठों को होस्ट किया जा रहा है और वहां पर वैध ब्रांडों को लगाया जा रहा है। इसके अलावा यह भी देखा गया है कि इंटरनेट मास्क और अन्य सुविधाओं वाले विज्ञापनों से भर गए हैं, जो कि बिटकॉइन और उसके कस्टमाईज्ड रूपों के बदले में रियायती दरों पर लोगों को ऑफर किए जा रहे हैं।

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