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COVID-19, कम सुनाई देना भी क्या कोरोना का है लक्षण? डाक्‍टरों ने दी ये चेतावनी

COVID-19, कम सुनाई देना भी है क्या कोरोना का है लक्षण? मरीज ने खोई एक कान से सुनने की क्षमता

नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस का जब से प्रकोप शुरु हुआ है तभी से लेकर अब तक इसके लक्षणों को लेकर कई नई बातें सामने आ रही है। पहले जहां सर्दी, जुकाम और सूंघने की शक्ति प्रभावित होना इसके मूल लक्षण माने जाते थे वहीं अब कोरोना लोगों की सुनने की शक्ति प्रभावित कर रहा है। इसे देखकर डॉक्टर और शोध में जुटे वैज्ञानिक और चिंतित हो गए हैं। हालांकि ये मामले भारत समेत अन्‍य देशों में अभी बहुत ही कम लोगों में पाए जा रहे हैं। लेकिन मामले भी सामने आने लगे हैं जिन्हें या तो सुनाई नहीं पड़ता है या कम सुनाई पड़ने लगा है।

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कोरोना स्पष्ट रूप से केवल एक कान को प्रभावित करता है। हाल ही में ब्रिटेन में एक 45 वर्षीय व्यक्ति जो कोरोनोवायरस से उबर चुका था जिसके बाद उसकी एक कान से सुन नहीं पा रहा था। विशेषज्ञों ने इसे एक गंभीर स्थिति कहा है जिसे तत्काल और शुरुआती उपचार की आवश्यकता है। मालूम हो कि अगस्‍त माह में उत्‍तरप्रदेश के गोरखपुर जिले में ऐसे केस सामने आ चुके हैं जिनमें कोरोना मरीजों की कान सुनने की क्षमता प्रभावित हुई थी।

ऐसा पहला मामला जिसमें एक कान से कोरोना मरीज हुआ बहरा

COVID -19 संक्रमण के बाद "सेंसिनुरल हियरिंग लॉस" बीएमजे जर्नल में प्रकाशित एक पेपर के अनुसार इस तरह का पहला मामला है। अध्ययन कहता है कि अचानक सुनने में तकलीफ की प्रारंभिक पहचान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शीघ्र उपचार नहीं किया गया तो व्‍यक्ति को बहरा बना देगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपचार केवल यूके के रोगी की दुर्बलता को आंशिक रूप से सुधार सकता है। बता दें ये तेज आवाज ही सुनाई देना या स्‍पष्‍ठ आवाज नहीं सुनाई देना या बहरापन स्पष्ट रूप से केवल एक कान को प्रभावित करता है।

कोरोना एक कान की सुनने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है

रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉक्टरों को कोरोनोवायरस रोगियों को ओटोलर्यनोलोजी के लिए भेजा जाना चाहिए। उन्‍होंने बताया कि जिस रोगी की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई उस रोगी को दमा था। उन्होंने अस्पताल में ही उससे सुनने में तकलीफ होना शुरु हो गई थी। जहां उन्हें अपनी बीमारी के दसवें दिन भर्ती कराया गया था। सांस लेने में समस्या के कारण उन्हें गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में स्थानांतरित कर दिया गया। मरीज ने अस्पताल में 30 दिन बिताए। रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी स्थिति वेंटीलेटर-जुड़े निमोनिया, उच्च रक्तचाप और एनीमिया" से जटिल हो गई। ब्रिटेन के व्यक्ति को उसके उपचार के दौरान रेमेडिसविर, अंतःशिरा स्टेरॉयड और प्लाज्मा एक्सचेंज से उपचार किया गया था। ICU से बाहर स्थानांतरित होने के एक सप्ताह बाद, उन्होंने बाएं कान में अचानक भारीपन महसूस किया इसके बाद धीमा सुनाई पड़ने लगा रिसर्च में पाया गया कि कोरोना एक कान की सुनने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है।

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