कोरोना वायरस के बीटा और डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ असरकारक कोवैक्सिन- रिसर्च
एक नई स्टडी में कोवैक्सिन को कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस के B.1.617.2 वेरिएंट के प्रति कम असरकारक बताया गया है।
नई दिल्ली, 9 जून। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) के नये अध्ययन में पता चला है कोवैक्सिन कोरोना वायरस के डेल्टा (B.1.617.2) और वीटा (B.1.351) वेरिएंट के प्रति सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि इस अध्ययन का अभी पीयर रिव्यू नहीं हुआ और लेकिन इस अध्ययन को bioRxiv प्रीप्रिंट रिपॉजिटरी में छापा गया है।

इस अध्ययन में कोरोना से ठीक हुए 20 लोगों और कोवैक्सिन की दोनों डोज ले चुके 17 लोगों की बीटा और डेल्टा वेरिएंट के असर को कम करने की क्षमता का आकलन किया गया और इसकी तुलना प्रोटोटाइप D614G वेरिएंट से की। वैज्ञानिकों ने फैसला किया कि इन प्रकारों के खिलाफ उपलब्ध टीकों की प्रभावकारिता का आकलन करना अनिवार्य है। आकलन में वैज्ञानिकों ने पाया कि कोवैक्सिन इन वेरिएंट के खिलाफ असरकारक है।
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इस अध्ययनकर्ता समूह की लीडर रहीं वैज्ञानिक डॉ. प्रज्ञा यादव ने कहा कि बीटा और डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ कोवैक्सिन का टीका लगवाने वाले लोगों में न्यूट्रलाइजेशन मूल्यों में कमी देखी थी, लेकिन यह कमी उन लोगों की तुलना में कम थी जो स्वाभाविक रूप से संक्रमित थे। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि यह टीका इन वेरिएंट्स के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।
रक्त में एंटीबॉडी की सुरक्षा का का सीधा संबंध टीके द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा से संबंधित है। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि वैक्सीन बीटा के खिलाफ तीन गुना और डेल्टा के खिलाफ 2.7 गुना एंटीबॉडी की सुरक्षा करता है। इससे पहले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) के वैज्ञानिकों ने कोवैक्सिन की B.1, B.11.7, B.1.1.28.2 और B.1.617.1 वेरिएंट को बेअरसर करने की क्षमता का अध्ययन किया और इसे इन वेरिएंट्स पर असरदार माना।












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