सभी पक्ष सुनने के बाद होगा तय, अयोध्या केस बड़ी बेंच को भेजा जाएगा या नहीं: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद मामले पर शुक्रवार के एक बड़ा बयान दिया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यी बेंच ने कहा कि, हम दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद तय करेंगे, कि मामला पांच न्यायाधीशों की पीठ को भेजना है या नहीं। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 27 अप्रैल तय की है।

आपको बता दें कि मुस्लिम पक्षकार की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने 1994 के इस्माइल फारुखी फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की थी। धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि अयोध्या भूमि विवाद मुसलमानों के बीच बहुपत्नी विवाह से ज्यादा महत्वपूर्ण है। पूरा देश इसका जबाव चाहता है।
राजीव धवन ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा था कि 1994 का संविधान पीठ का फैसला अनुच्छेद 25 के तहत दिए आस्था के अधिकार को कम करता है। आपको बता दें कि इस्लाम के तहत मस्जिद का बहुत महत्व होता है। एक बार मस्जिद बन जाए तो वो अल्लाह की संपत्ति मानी जाती है। उसे तोड़ा नहीं जा सकता। फारूकी मामले पर फैसले में अयोध्या में कुछ क्षेत्रों का अधिग्रहण अधिनियम, 1993 की संवैधानिक वैधता पर विचार किया गया था
इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर की विशेष पीठ ने कहा था कि, पहले हमें 1994 के फैसले पर इस विवाद को खत्म करना चाहिये। हम पूरे फैसले या उसके कुछ हिस्से को बड़ी पीठ के पास भेज सकते हैं।












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