दिल जीतने वाले ऐसे ही कोरोना योद्धाओं से भारत में जंग हारेगा Coronavirus

नई दिल्ली- भारत में रोजाना कोरोना वायरस के मामले बढ़ जरूर रहे हैं, लेकिन अगर दुनिया से तुलना करें तो आज भी हम इस जंग में बहुत आगे हैं। इसकी वजह देश के वैसे हजारों-लाखों कोरोना वॉरियर्स हैं, जो इस आपदा के वक्त में भी न सिर्फ कोरोना से मोर्चे पर जंग लड़ रहे हैं, बल्कि देश के नागरिकों का हौसला भी बढ़ा रहे हैं और देश की जनता भी उन्हें अपने दिलों-जान में बिठा चुकी है। इस वक्त देश में इस महामारी की नकारात्मकता के बीच ऐसी-ऐसी खबरें आ रही हैं, जो न सिर्फ कोरोना योद्धाओं का आत्मबल बढ़ाता है, बल्कि घरों में बंद रहकर कोरोना से लड़ रहे आम लोगों को भी इस भयानक बीमारी की वजह से पैदा होने वाली नकारत्मकताओं को दूर करता है। इस आर्टिकल में ऐसी तीन कहानियों को शामिल किया गया है, जिसे हर किसी को पढ़ना चाहिए।

डॉक्टर किराएदार के लिए खाना बनाकर रखते हैं बुजुर्ग लैंडलॉर्ड

डॉक्टर किराएदार के लिए खाना बनाकर रखते हैं बुजुर्ग लैंडलॉर्ड

हाल के दिनों में देश में ऐसी घटनाएं सुनने को मिली हैं, जिसमें डॉक्टरों को उनके मकान मालिकों ने इसलिए घर खाली करने को कहा है, क्योंकि उनकी वजह से उन्हें इंफेक्शन का डर सता रहा है। कई बार तो सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश देने पड़े जो कोरोना के खिलाफ फ्रंटलाइन में रहकर मुकाबला कर रहे डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से भेदभाव करते हैं। लेकिन, 30 साल के होनहार डॉक्टर कौशिक बरुआ को उनके कोरोना से जंग लड़ने की वजह से ही उनके मकान मालिक से जो उन्हें सम्मान मिल रहा है, उसकी तारीफ शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। बरुआ दिल्ली के एक अस्पताल में क्रिटिकल केयर यूनिट में काम करते हैं और जब भी कोरोना से लड़कर रात में घर लौटते हैं, उनके बुजुर्ग मकान मालिक रोज उनके लिए भी गर्म खाना बनाकर रखते हैं। बरुआ ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि वह खुद को इसलिए ज्यादा भाग्यशाली समझते हैं क्योंकि, उनकी एक डॉक्टर मित्र से लैंड लॉर्ड घर खाली करने को कह चुका है। घर में मकान मालिक रोहित सुरी और बरुआ दोनों अकेले-अकेले रहते हैं और इस कोरोना संकट ने उनकी दोस्ती को और भी जीवंत बना दिया है।

पुलिस वालों ने अकेले बुजुर्ग का बर्थ डे मनाया

ये तो हुई वो कहानी जिसमें एक कोरोना वॉरियर को वह सहायता मिल रही है, जिसके वो हकदार हैं। दूसरी कहानी हरियाणा के पंचकूला की है। जिसमें करन पुरी नाम के एक बुजुर्ग सेक्टर 7 के अपने घर में अकेले रहते हैं। एक दिन कुछ पुलिस वाले अचानक उनके घर के गेट तक पहुंचते हैं। बुजुर्ग को समझ नहीं आ रहा कि पता नहीं कौन किस काम से आ गया। वो परेशान हालत में ये कहते हुए आगे बढ़ते हैं कि 'मैं करन पुरी हूं, मैं अकेला रहता हूं और मैं एक वरिष्ठ नागरिक हूं।' उन्हें अंदाजा ही नहीं था कि पंजकूला की पुलिस उन्हें एक ऐसा सरप्राइज देने पहुंची है, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। दरअसल, उनका बर्थडे था और पुलिस वाले उनके लिए केक और कैप लेकर पहुंच गए थे। जैसे ही पुरी को पूरा माजरा समझ में आया, उनकी आंखों से आंसू निकल आए। पुलिस वालों ने उनसे कहा कि उन्हें अकेला महसूस करने की जरूरत नहीं है, वो भी उनके परिवार की ही तरह हैं। फिर पुलिस वालों के गाने के बीच उन्होंने केक काटा। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो चुका है।

जब 15 साल लड़के का बर्थ डे मनाने पहुंची पुलिस

तीसरी कहानी महाराष्ट्र के पिंपड़ी चिंचवाड की है। यहां वत्सल शर्मा नाम के एक किशोर इस निराशा में डूबे थे कि उन्हें अपना 15वां बर्थडे उनके पिता की गैर-मौजूदगी में ही मनाना पड़ेगा। उनके पिता किसी काम से अमेरिका गए थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से वहां फंस गए। लेकिन, वत्सल शर्मा तब हैरान रह गए, जब उनके पिता अमेरिका में रहते हुए भी बेटे के लिए केक मैनेज करवाने में कामयाब रहे और उनकी मदद के लिए एक बार फिर सामने आई वहां की पुलिस। वत्सल के पिता ने अमेरिका से स्थानीय पुलिस वालों से गुजारिश की थी वो कृप्या करके उनकी तरफ से उनके बेटे को हैप्पी बर्थ डे विश कर दें। फिर क्या था पुलिस वत्सल के पास केक भी लेकर पहुंची और पुलिस की गाड़ी की बोनट पर ही वत्सल ने केक भी काटा।

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