कोरोना वायरस: भारत का कौन-सा शहर पूरी तरह हुआ बंद?

कोरोना वायरस: भारत का कौन-सा शहर पूरी तरह हुआ बंद?

उत्तरी कर्नाटक का शहर कलबुर्गी भारत का ऐसा पहला शहर बन गया है जो कोरोना वायरस के कारण पूरी तरह बंद कर दिया गया है.

Covid-19 बीमारी के कारण देश के पहले मरीज़ की मौत इसी शहर में हुई थी. मृत व्यक्ति हाम में सऊदी अरब से लौटे थे. सरकार ने उनके संपर्क में आए दो सौ से अधिक लोगों का पता लगाया है.

76 वर्षीय शख़्स सऊदी अरब से धार्मिक यात्रा के बाद भारत लौटे थे. तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें पहले कलबुर्गी में अपने घर पर और फिर हैदराबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्हें कलबुर्गी में अस्तपाल में भर्ती कराने के लिए लाया जा सरहा था लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई.

उनकी मौत के दो दिन के बाद उनकी जांच की रिपोर्ट सामने आई जिसमें उनके कोरोना वायरस संक्रमित होने की पुष्टि हुई.

इसके बाद से पूरे शहर को एक तरह से बंद कर दिया गया है.

राज्यसभा के पूर्व सदस्य 82 वर्षीय केबी शनप्पा ने बीबीसी हिंदी से कहा, "मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी में कलबुर्गी को ऐसे पहले कभी नहीं देखा. यह बेहद सुनसान है और ऐसा लग रहा है कि जैसे कर्फ़्यू लगाया गया हो."

पूर्व पत्रकार और शहर के एक विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले टीवी शिवानंदन कहते हैं, "सरकारी दफ़्तर बंद हैं केवल नगर निगम की कुछ ज़रूरी सेवाएं जारी हैं. दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद हैं, शराब की खुदरा बिक्री बंद है और यहां तक की कुछ प्रसिद्ध चाय की दुकानें भी बंद हैं. लेकिन किराने की दुकानें खुली हैं."

हाल ही में Covid-19 के पहले पीड़ित का इलाज कर रहे डॉक्टर का भी कोरोना वायरस टेस्ट किया गया जो पॉज़िटिव पाया गया है. वहीं, पीड़ित की बेटी भी टेस्ट में पॉज़िटिव पाई गई है.

कलबुर्गी के डिप्टी कमिश्नर शरत बी का कहना है कि चार और सैंपल्स के रिज़ल्ट आना अभी बाकी हैं.

ज़िले के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि शहर और ज़िले में सार्वजनिक और निजी परिवहन सेवाओं को सीमित कर दिया गया है जबकि पहले ही सार्वजनिक और निजी दफ़्तरों को बंद करने का आदेश दे दिया गया था.

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मस्जिदों से कराया गया ऐलान

पहले पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आए शुरुआती 71 लोगों और फिर बाद में संपर्क में आए 243 लोगों के बारे में पता लगाए जाने के बाद लॉकडाउन का फ़ैसला लिया गया था. इसके लिए शहर और ज़िले में सार्वजनिक घोषणा की गई जिसके लिए मस्जिदों का भी इस्तेमाल किया गया.

नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया, "उनके वापस आने के बाद कौन-कौन उनसे मिला इसका पता हम नहीं लगा सकते थे तो हमने सभी मस्जिदों से इसका ऐलान कराया."

कोरोना वायरस के बारे में जानकारी
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डिप्टी कमिश्नर शरत बी कहते हैं, "516 लोगों को निगरानी में उन्हीं के घर में रखा गया है."

इन 516 लोगों में से 202 वो लोग हैं जो हाल ही में विदेश से लौटे हैं.

कोरोना वायरस के कारण महाराष्ट्र के नासिक और नागपुर में धारा 144 लागू कर दी गई है लेकिन कलबुर्गी में ऐसा कुछ नहीं किया गया है.

हालांकि, डिप्टी कमिश्नर शरत कुछ विस्तार से बताए बिना कहते हैं कि पूरी तरह से कड़ी नीति अपनाई गई है.

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1993 के बाद कर्फ़्यू जैसे हालात

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव जावेद अख़्तर बीबीसी हिंदी से कहते हैं, "शटडाउन का फ़ैसला ज़िला प्रशासन का है. यह Covid-19 को बढ़ने से रोकने के लिए उठाया गया है."

वहीं विधायक और पूर्व मंत्री प्रियांक खड़गे कहते हैं कि इस तरह की कठोर नीति अपनाना ज़रूरी है.

कोरोना वायरस को बढ़ने से रोकने के लिए डिप्टी कमिश्नर ने विभिन्न समुदायों के नेताओं से सहयोग के लिए मुलाक़ात की है.

उत्तरी कर्नाटक के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "किसी भी नियम का हवाला देना ज़रूरी नहीं है. अगर आप स्थानीय लोगों से बात करेंगे और हर इलाक़े में घोषणाएं करेंगे तो अफ़वाहों की बजाय सकारात्मक संदेश भी दिया जा सकता है. इस बार कलबुर्गी के लोगों को मामले की गंभीरता समझते हुए ख़ुद को घरों में बंद कर लेना चाहिए."

वहीं, शिवनंदन कहते हैं, "1993 में दंगों के बाद से यह शहर कभी भी बंद नहीं हुआ. कर्फ़्यू लगाए बिना इस समय कलबुर्गी में कर्फ़्यू जैसी स्थिति है."

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भारत में अभी दूसरा स्टेज

नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी ने कहा, "यह बंद बेहद ज़रूरी कदम है. हमें इस वायरस को समुदाय में बढ़ने से रोकने की ज़रूरत है. वरना हम Covid-19 के तीसरे स्टेज में पहुंच जाएंगे."

इसी सप्ताह इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने कहा था कि है भारत इस समय Covid-19 के दूसरे स्टेज पर है.

इसका मतलब है कि इस समय केवल विदेशों से आने वाले लोगों में यह संक्रमण पाया गया है जबकि उनके संपर्क में पहले आए लोगों (प्राइमरी कॉन्टेक्ट्स) को अलग-थलग किया गया है और सेकंडरी कॉन्टेक्टस को 14 दिनों तक घरों में रहने को कहा गया है.

तीसरा स्टेज वो होता है जब यह वायरस स्थानीय समुदाय में फैलने लगता है.

एक और कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कलबुर्गी में यह शटडाउन ज़रूरी था, क्योंकि आगे के संकेत बेहद ख़तरनाक हैं.

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