भारत को कब तक मिलेगी कोरोना वायरस की वैक्सीन, एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया ने दिया जवाब

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के मामले अब भी बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। वायरस के खातमे के लिए हर किसी की नजर वैक्सीन पर टिकी हुई है। वैक्सीन बनाने के लिए देश की कई कंपनियां काम कर रही हैं। ऐसे में लोगों के जहन में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक कोरोना वायरस की वैक्सीन देश में आएगी। इस मामले में अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि अगर सबकुछ योजना के मुताबिक होता है तो कोरोना वायरस की प्रभावी वैक्सीन जनवरी, 2021 तक आ सकती है।

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    इंडिया टुडे ग्रुप के हेल्थगिरी अवॉर्ड्स कार्यक्रम में गुलेरिया ने इस बात को स्वीकार किया कि ये कहना मुश्किल है कि देश में वैक्सीन कब तक आएगी और ये अभी चल रहे ट्रायल्स से लेकर वैक्सीन की प्रभावशीलता सहित कई कारकों पर निर्भर करता है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो अगले साल की शुरुआत में वैक्सीन बाजार में हो सकती है। हालांकि वैक्सीन की शुरुआती संख्या भारत की बड़ी आबादी की पूर्ति मुश्किल से कर पाएगी। उन्होंने आगे कहा कि एक बार जब वैक्सीन आ जाएगी, तो उसके साथ कुछ चुनौतियां भी आएंगी। जैसे उसका उत्पादन और बडे़ पैमाने पर वितरण।

    उन्होंने बताया कि वैक्सीन का वितरण करते समय 'टीकाकरण प्राथमिकता' (vaccine prioritisation) का मॉडल अपनाया जा सकता है। यानी जिन लोगों को संक्रमण का अधिक खतरा है, उन्हें पहले वैक्सीन दी जाएगी। वह कहते हैं, 'दो ऐसे समूह हैं जिन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें स्वास्थ्यकर्मी, अन्य कोरोना योद्धा और वो लोग शामिल हैं, जिन्हें वायरस का उच्च जोखिम है।' अगर प्राथमिकता वाली ये सूची तैयार हो जाए और उसका ठीक से पालन हो तो वैक्सीन का वितरण भी समान रूप से हो सकेगा। अगर प्राथमिकता वाला ये मॉडल नहीं अपनाया जाएगा, तो वायरस तो फैलेगा ही साथ ही मृत्यु दर भी बढ़ सकती है। ऐसे में लोगों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ये एक वैश्विक बीमारी है और उन्हें इससे बचने के उपायों का पालन करना है।

    वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर कई विशेषज्ञों ने सवाल खड़े किए हैं और लंबे समय तक पड़ने वाले इसके दुष्प्रभाव को लेकर चिंता जताई है, जिसका कम समय में पता चलना मुश्किल है। इसपर गुलेरिया कहते हैं कि समय बचाने के लिए अभी मानवों पर वैक्सीन का पहला, दूसरा और तीसरा चरण साथ में चल रहा है। इस प्रक्रिया के दौरान लंबे समय तक होने वाले दुष्प्रभाव का तुलनात्मक रूप से कम समय में अध्ययन किया जा सकता है। वैक्सीन आने पर जिन लोगों को दी जाएगी, तो दीर्घकालिक दुष्प्रभाव का पता लगाने के लिए उनकी निगरानी की जाएगी।

    कोरोना वायरस की पीक को लेकर उन्होंने कहा कि कुछ दिनों से इसमें मामूली वृद्धि हो रही है, ऐसा ही दो और हफ्तों तक जारी रहा तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि पीक चरम पर है। उन्होंने ये भी कहा कि लोगों को अब भी वायरस के प्रति जागरुक किए जाने की जरूरत है, जिसमें मास्क पहनना, हाथों की सफाई रखना और एक दूसरे से दूरी बनाकर रखना शामिल है।

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