Coronavirus: देश में करीब 10 हजार बच्चों को तत्काल देखभाल और सुरक्षा की जरूरत

नई दिल्‍ली, 1 जून। बच्‍चों के अधिकारों के ऑनलाइन ट्रैकिंग पोर्टल बाल स्‍वाराज ने रिपोर्ट दी है कि देश में लगभग 10,000 बच्चों की देखभाल और सुरक्षा की तत्काल आवश्यकता है। इसमें शून्‍य से लेकर 17 साल के वो बच्‍चे शामिल हैं जो मार्च 2020 से कोरोना वायरस के चलते अनाथ हो गए। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि इन बच्चों को तस्करी और देह व्यापार में धकेले जाने का एक हाई रिस्‍क है। आयोग ने कहा कि उसे पहले ही सरकारी अधिकारियों द्वारा बच्चों के विवरण को निजी संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों को अवैध रूप से स्थानांतरित करने की कई शिकायतें मिली हैं।

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    जस्टिस एल नागेश्वर राव और अनिरुद्ध बोस की एक बेंच उन बच्चों की सुरक्षा के तरीकों की जांच कर रही है, जिन्हें महामारी के कारण व्यक्तिगत नुकसान और आघात का सामना करना पड़ा है। अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने कहा, "प्रलयकारी कोरोना महामारी ने समाज के कमजोर वर्गों को तबाह कर दिया। ऐसे कई बच्चे हैं जो परिवार के कमाने वाले या अपने माता-पिता दोनों के निधन के कारण अनाथ हो गए हैं। 28 मई को बेंच ने केंद्र को महामारी से अनाथ बच्चों के लिए कल्याणकारी उपाय करने का निर्देश दिया था। अधिवक्ता स्वरूपमा चतुर्वेदी और राज्यों द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए एनसीपीसीआर को तत्काल देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करने वाले डेटा को संकलित करने के लिए कहा गया था।

    जिला अधिकारियों को अनाथ बच्चों को भोजन, आश्रय और कपड़े की बुनियादी जरूरतों को तुरंत पूरा करने के लिए कहा गया था। बेंच ने अपने आदेश में कहा था कि जिला अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे मार्च, 2020 के बाद अनाथ हो गए बच्चों की जानकारी कल शाम 29 मई से पहले "बाल स्वराज" पोर्टल पर अपलोड करें,। दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम बंगाल के अधिकारियों ने केवल एक बच्चे का विवरण प्रदान किया है, जबकि दिल्ली ने 29 मई तक एनसीपीसीआर पोर्टल पर केवल पांच बच्चों को सूचीबद्ध किया है।

    उत्तर प्रदेश के जिला अधिकारियों ने अनाथ, परित्यक्त या खोए हुए माता-पिता के 2,110 बच्चों को सूचीबद्ध किया है। 29 मई तक तमिलनाडु में 159 बच्चे, केरल में 952, बिहार में 1,327, महाराष्ट्र में 796, कर्नाटक में 36, आंध्र में 116, हरियाणा में 776, जम्मू-कश्मीर में 375 और गुजरात में 434 बच्चे हैं।

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