कोरोना की दूसरी लहर में वैक्सीन लेने वाले रहे सबसे ज्यादा सुरक्षित, आंकड़े दे रहे गवाही
नई दिल्ली, 30 सितम्बर। इस साल अप्रैल में कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने देश में जमकर कोहराम मचाया था। इस दौरान हजारों लोग वायरस की चपेट में मारे गए थे। आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं लेकिन इसी दौरान आंकड़े ये भी बताते हैं कि कैसे वैक्सीन ने इस दौरान लोगों को वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा देने में अपनी भूमिका निभाई। सीधे शब्दों में कहें तो वैक्सीन ने बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई।

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि दूसरी लहर के पहले सात सप्ताह में टीका न लेने वाले 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 10 लाख लोगों में प्रति सप्ताह 121 मौतें कोरोना से दर्ज की गईं जबकि इसी दौरान टीका की पहले डोज लेने वालों में प्रति 10 लाख में 2.6 मौतें हुईं। वहीं अगर दोनों डोज लेने वालों को देखें तो प्रति 10 लाख पर साप्ताहिक मौतें मात्र 1.76 पर रही।
जल्द ही लॉन्च होने वाले वैक्सीन ट्रैकर के लिए यह डेटा विशेष रूप में महत्वपूर्ण है जब स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अक्टूबर में आने वाले त्योहारों को लेकर कोरोना के मामलों में संभावित वृद्धि को लेकर चिंता जताई है। इसके अतिरिक्त कोविड संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित माने जाने वाली 60 वर्ष से अधिक उम्र की 24 प्रतिशत आबादी को अभी भी टीका नहीं लगाया गया है।
हाल में ही जारी डाटा के मुताबिक 60 प्रतिशत से अधिक उम्र वाले 10.09 करोड़ लोगों को पहला टीका लगाया गया है जबकि 5.58 करोड़ लोग दोनों डोज ले चुके हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किया रियल टाइम डाटा
9 सितंबर को स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत के टीकाकरण अभियान का पहला रीयल-टाइम आंकड़ा जारी किया, जिसमें बीमारी की गंभीरता और मृत्यु को रोकने में लगभग पूर्ण प्रभाव दिखाया। चार महीने (18 अप्रैल से 15 अगस्त) के आंकड़ों से पता चला है कि पहली खुराक के बाद मौतों को रोकने में वैक्सीन 96.6 प्रतिशत और दूसरी खुराक के बाद 97.5 प्रतिशत प्रभावी रही। इस दौरान कुल 2,52,873 मौतें हुईं।
इस डेटा का अध्ययन करने के बाद ये सामने आया है कि इस अवधि के दौरान टीका लगाने वालों की तुलना में गैर टीकाकरण वाले लोगों के बीच मौतों की संख्या में भारी अंतर रहा है।
आंकड़ों से समझिए वैक्सीन का असर
18 अप्रैल से 30 मई के बीच 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के आंकड़ों पर नजर डालें तो गैर टीकाकरण वाले समूह में 10 लाख लोगों में 121.21 साप्ताहिक मौतें हुईं जबकि टीके की एक डोज लेने वाले में यह संख्या 2.46 साप्ताहिक मौत प्रति 10 लाख पर रही। दोनों डोज लेने वाले प्रति 10 लाख लोगों में सिर्फ 1.76 लोग ही सप्ताह में मौत का शिकार हुए।
इसी अवधि में 45 से 59 आयु वर्ग में वैक्सीन न लेने वालों में प्रति दस लाख पर मौत का आंकड़ा 39.9 प्रति सप्ताह रहा। पहली डोज लेने वालों में 0.87 मौत प्रति सप्ताह जबकि पूरी तरह वैक्सीन ले चुके लोगों में 0.42 मौतें ही प्रति सप्ताह हुईं।
18-44 आयु वर्ग में वैक्सीन न लेने वालों में मौत का आंकड़ा प्रति दस लाख पर 5.6 प्रति सप्ताह रहा। पहली डोज लेने वालों में प्रति सप्ताह 0.6 मौत जबकि दोनों डोज लेने वाले समूह में 10 लाख में प्रति सप्ताह केवल 0.01 मौत दर्ज हुई।












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