कोरोना वायरस जाने में समय लगेगा, बच्चों को लेकर चिंतित: WHO प्रमुख
नई दिल्ली। इस वक्त पूरी दुनिया कोरोना वायरस (कोविड-19) संकट का सामना कर रही है। चीन के वुहान शहर से फैले इस वायरस ने दुनिया में अब तक दो लाख से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। साथ ही 30 लाख लोग इस वायरस से संक्रमित हैं। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम ग्रेबेसियस ने अब बच्चों को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने सोमवार को कहा कि महामारी का असर अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है, जिसे लेकर WHO बहुत चिंतित है, खासकर बच्चों को लेकर।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने कहा कि जीएवीआई ग्लोबल नाम के वैक्सीन एलायंस का अनुमान है कि 21 देश ऐसे हैं जो वैक्सीन की कमी का सामना कर रहे हैं। क्योंकि कोरोना के चलते बॉर्डर बंद हैं और परिवहन का कोई साधन भी उपलब्ध नहीं हो रहा है। ग्रेबेसियस ने कहा कि महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए संगठन अफ्रीका, पूर्वी यूरोप, लातिनी अमेरिका समेत कई अन्य देशों को लेकर अधिक चिंतित है।
उन्होंने आगे कहा कि कोविड-19 के कारण सहारा-अफ्रीका के 41 देशों में मलेरिया के खिलाफ अभियान में अड़चन आने का खतरा है। हालत और ज्यादा खराब हुए तो सब-सहारा अफ्रीका के देशों में मलेरिया से मौतों की संख्या दोगुनी तक बढ़ सकती है। हम इन देशों को समर्थन देने पर काम कर रहे हैं।
डब्लूएचओ के महानिदेशक ने कहा कि डब्ल्यूएचओ ने इबोला वैक्सीन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और हम कोविड-19 के लिए भी ऐसा ही कर रहे हैं। कोविड-19 वैक्सीन तेजी से विकसित करने पर काम चल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया के तमाम देशों को संगठन की बात सुननी चाहिए थी जब उसने इस वायरस को लेकर 30 जनवरी को 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न' घोषित किया था। उस दौरान चीन के बाहर केवल 82 मामले सामने आए थे और किसी की भी मौत नहीं हुई थी। उस दौरान पूरी दुनिया को डब्लूएचओ की बात को ध्यान से सुनना चाहिए था।












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