19 देशों में पहुंचा Covid-19 का भारतीय वेरिएंट, जानिए इस डबल म्यूटेंट के तेजी से फैलने की वजह
नई दिल्ली, 4 मई। भारत में कोरोना वायरस की तेजी से बढ़ती संख्या के चलते जो हाहाकार मचा हुआ है उसके चलते अब देश में महामारी की दूसरी लहर को कोविड सुनामी कहा जाने लगा है। पिछले सप्ताह ही भारत में चार लाख केस एक दिन में मिले थे। मंगलवार को पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 3,57,229 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोविड मामलों की इस सुनामी के पीछे विशेषज्ञ वायरस के नए वेरिएंट बी.1.617 को जिम्मेदार बता रहे हैं।

दो नए देशों में भी पहुंचा वायरस
भारत में तेजी से फैल रहे वायरस के बी.1.617 वेरिएंट में दो महत्वपूर्ण म्यूटेशन ई484क्यू और एल452आर पाए गए हैं जिसके चलते इस वायरस डबल म्यूटेंट वेरिएंट भी कहा जा रहा है। चीनी वायरस का ये भारतीय वेरिएंट अब दूसरे देशों में पहुंच चुका है। अब तक करीब 17 देशों में बी.1.617 वेरिएंट के मामले सामने आए हैं।
पिछले महीने के आखिर में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा था कि बी.1.617 वेरिएंट से जुड़े कोरोना वायरस संक्रमण के मामले कम से कम 17 देशों में रिकॉर्ड किए गए हैं।
सोमवार को ही मोरक्को में भारतीय वेरिएंट के दो नए मामले सामने आए हैं जिसके बाद उनके संपर्क में आए लोगों को क्वारंटाइन किया गया है। इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्री बुदी गुनादि सादिकिन ने देश में डबल म्यूटेंट वेरिएंट के दो मामले रिकॉर्ड कि जाने की जानकारी दी है। इस तरह कुल मिलाकर इन देशों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है। ब्रिटेन और ईरान से लेकर स्विटजरलैण्ड तक तेजी से फैल रहे इस वेरिएंट को लेकर विश्व जगत में चिंता जताई जा रही है। कई देशों ने ऐहतियातन भारत से लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।

क्यों तेजी से हो रहा म्यूटेशन?
कनाडा के शोधकर्ताओं ने वायरस के बी.1.1.7 प्रकार में उत्परिवर्तन की पहली संरचनात्मक तस्वीर को प्रकाशित किया। जिसके पता चलता है यह पिछले स्ट्रेन की तुलना में अधिक संक्रामक साबित हुआ है। ब्रिटेन में खोजा गया ये वेरिएंट वहां पर तो तेजी से संक्रमण की वजह बना ही भारत और कनाडा में भी इसका असर हुआ। डब्ल्यूएचओ ने पिछले साल दिसम्बर में तेजी से फैले संक्रमण के लिए बी.1.1.7 वेरिएंट को जिम्मेदार बताया था। इस वेरिएंट में बड़ी संख्या में म्यूटेशन पाया गया था।
वैज्ञानिकों का मानना है कि एक वायरस में म्यूटेशन का होना स्वाभाविक है। हर बार वायरस अपने आपको बढ़ाता है यह खुद को कॉपी करता है जिसमें कई बार गलतियां होती हैं। इनमें से अधिकांश त्रुटियां वायरस के लिए हानिकारक होती हैं और वे म्यूटेशन जीवित नहीं रहते हैं। हालांकि कभी-कभी एक म्यूटेशन अपने पूर्ववर्ती की तुलना में कोशिकाओं को बांधने और प्रवेश करने से या पहले से मौजूद प्रतिरक्षा को थोड़ा बेहतर कर देते हैं। इन्हें म्यूटेंट वायरस कहा जाता है और मूल वायरस से आगे निकल जाते हैं।

नए वायरस में मरीज को क्या हो रहे लक्षण?
कोविड-19 से संक्रमित मरीजों में सामान्य तौर पर कफ, बुखार, स्वाद और गंध के चले जाने के लक्षण पाए जा रहे हैं। वहीं नए वायरस के मामले में देखा गया है कि मरीज में कोविड-19 के सारे लक्षण होने के बाद भी आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। जिसके मरीजों का समय पर इलाज करने में बहुत मुश्किल आ रही है।
मरीजों में जो नए लक्षण पाए जा रेहै हैं उनमें बुखार, मांसपेशियों में दर्द, सूखी और लगातार खांसी और स्वाद व गंध का चले जाना है। इसके साथ ही गले की खराश, सिरदर्ज, चकत्ते पड़ना और पेट खराब होना भी देखा जा रहा है।

वैक्सीन सबसे कारगर बचाव
सुनामी की तरह फैल रहे वायरस के चलते अब भारत में किसी एक चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है तो वह है टीकाकरण। कोरोना की इस लहर को रोकने की टीकों की उपलब्धता सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। हालांकि यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि क्या वायरस में आगे भी म्यूटेशन होंगे और यह उन लोगों को भी संक्रमित करने की क्षमता विकसित कर सकता है जिन्हें टीका लगाया जा चुका है।
पिछले हफ्ते ही व्हाइट हाउस के मुख्य चिकित्सा सलाहकार और अमेरिका में महामारी की निगरानी कर रहे डॉ. एंथोनी फाउची ने बताया था कि "भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोवैक्सीन कोरोना वायरस के बी.1.617 वेरिएंट को बेअसर करने में सक्षम है।












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