Coronavirus: पूर्व सीएम लालू यादव को कोरोना संक्रमण का खतरा, जेल IG ने किया अलर्ट

रांची। झारखंड में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्‍या में बढ़ोत्‍तरी हो रही हैं। इस कोरोना संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 7 साल तक की सजा पाए बंदी और विचाराधीन कैदियों को पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया था। ऐसे में ये भी खबर थी कोरोना का अत्‍यधिक प्रकोप हैं ऐसे में जेल में बंद बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव को बड़ी राहत मिल सकती हैं। लेकिन झारखंड में उनकी अपनी राजनीतिक पार्टी आरजेडी का गठबंधन होने के बावजूद उन्‍हें जेल से राहत नही मिली। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को पैरोल पर रिहा नही किया गया। वहीं पिछले कई दिनों से तबियत खराब होने के कारण चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू यादव को रिम्स अस्‍पताल में रखा गया था अब कोरोना संक्रमण के खतरे के चलते उनको रिम्स के पेइंग वार्ड से अन्यत्र शिफ्ट करने पर विचार चल रहा है।

 पत्र लिखकर मांगी अन्यत्र स्थानांतरित करने की इजाजत

पत्र लिखकर मांगी अन्यत्र स्थानांतरित करने की इजाजत

कारा महानिरीक्षक शशि रंजन ने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार के अधीक्षक अशोक कुमार चौधरी के आवेदन भेज कर गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगा है। इस पत्र में ये लिखा गया है कि 74 वर्षीय लालू प्रसाद उच्च श्रेणी सजावार बंदी हैं। वर्तमान में रिम्स के पेइंग वार्ड में इलाज किया जा रहा है। उसी पेइंग वार्ड भवन में ही कोरोना सेंटर बनाया गया है । इसके चलते कोरोना के संक्रमण से बचाया जाना असंभव होगा। रिम्स प्रबंधन के माध्यम से भी उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित करने पर विचार किया जा रहा है। मालूम हो कि रिम्स को कोरोना मरीजों के लिए आइसोलेशन सेंटर बनाए जाने के समय लालू यादव ने जमकर हंगामा भी काटा था ।

लालू प्रसाद को संभावित कोरोना संक्रमण से है खतरा

लालू प्रसाद को संभावित कोरोना संक्रमण से है खतरा

आइजी ने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि सजायाफ्ता-विचाराधीन बंदी लालू प्रसाद को संभावित कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए कहीं और सुरक्षित व समुचित चिकित्सीय सुविधायुक्त स्थल पर स्थानांतरित किए जाने पर दिशा-निर्देश दें। अब गृह विभाग के आदेश के बाद ही लालू प्रसाद को अन्यत्र शिफ्ट किया जाएगा। उनके पैरोल पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।गौरतलब है कि लालू प्रसाद वर्तमान में तीन मामालों में जेल की सजा काट रहे हैं। पांचों मामलों में विभिन्न न्यायालयों में केस विचाराधीन हैं। मेडिकल बोर्ड के परामर्श पर लालू प्रसाद का इलाज के लिए एम्स नई दिल्ली से वरीय नेफ्रोलोजिस्ट बुलाने के लिए भी पत्राचार किया गया है।।

नेफ्रोलोजिस्ट का अनुरोध

नेफ्रोलोजिस्ट का अनुरोध

बता दें पहले ही यहां के डाक्टरों की टीम ने नेफ्रोलॉजिस्ट के पास भेजकर जांच करवाने की दी है। डाक्टर ने सलाह रिम्स अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप ने बताया कि लालू यादव के लाईन ऑफ ट्रीटमेंट, दी जा रही दवाएं और प्रोटोकॉल देखने के बाद मेडिकल बोर्ड रिम्स में चल रहे उनके इलाज से संतुष्ट है। रिम्स बोर्ड ने पाया है कि लालू प्रसाद यादव सीकेडी (क्रोनिक किडनी डिजीज) स्टेज 3 के मरीज हैं। साथ ही अन्य कई बीमारियां भी है। चूंकि रिम्स में कोई नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं हैं यही कारण हैं कि रिम्स मेडिकल बोर्ड ने बाहर से किसी नेफ्रोलॉजिस्ट को बुलाकर ओपीनियन लेने का निर्णय या बाहर में किसी नेफ्रोलॉजिस्ट के पास भेजकर भी राय ली जा सकती है।

नेफ्रोलोजिस्ट की मांग की है

नेफ्रोलोजिस्ट की मांग की है

कारा महानिरीक्षक के आवेदन पर स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव डा. नितिन कुलकर्णी ने एम्स दिल्ली के निदेशक को पत्र लिखकर वहां के वरीय नेफ्रोलोजिस्ट की मांग की है। डा. कुलकर्णी ने अपने पत्र में लिखा है कि उच्च श्रेणी सजावार बंदी लालू प्रसाद उर्फ लालू प्रसाद यादव को इलाज के लिए रिम्स में भर्ती किया गया है।

चारा घोटाला में लालू को हुई थी जेल

चारा घोटाला में लालू को हुई थी जेल

बता दें बता दें कि लालू प्रसाद चारा घोटाले के झारखंड से जुड़े 4 मामलों में सजा काट रहे हैं। किडनी समेत एक दर्जन से ज्यादा बीमारियों से परेशान आरजेडी सुप्रीमो को रांची के होटवार जेल से लाकर रिम्स में इलाज कराया जा रहा है। जमानत पर बाहर निकलने के लिए उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन बेल नहीं मिली। लालू प्रसाद यादव को वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से पशु चारा घोटाला में जेल हुई थी। लालू यादव ने पशु चारा के नाम पर अवैध ढंग से 89 लाख, 27 हजार रुपये निकाला था इसी आरोप में वो सालों से जेल में सजा भुगत रहे हैं। जब ये घोटाला हुआ तो लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे। हालांकि, ये पूरा चारा घोटाला 950 करोड़ रुपये का है, जिनमें से एक देवघर कोषागार से जुड़ा केस है। इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्टूबर 1997 को मुकदमा दर्ज किया था। इतनी बड़ी धनराशि के घोटाले संबंधी मामले में लगभग 20 साल बाद इस मामले में फैसला सुनाया गया था। इससे पहले चाईबासा कोषागार से 37 करोड़, 70 लाख रुपये अवैध ढंग से निकालने के चारा घोटाले के एक दूसरे केस में सभी आरोपियों को सजा हो चुकी है।

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