फंगस के बाद अब कोरोना से ठीक हुए मरीजों में 'बोन डेथ' का खतरा, मुंबई में मिले 3 नए मरीज
नई दिल्ली, 5 जुलाई: पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। मई-जून में किसी तरह दूसरी लहर खत्म हुई थी, जिसके बाद ब्लैक फंगस के हजारों मामले सामने आ गए। हालांकि ज्यादातर राज्यों ने इस पर काबू पा लिया, लेकिन अब एक नई बीमारी कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में देखने को मिल रही है। जिसका नाम एवैस्कुलर नेक्रोसिस (Avascular necrosis- AVN) यानी बोन डेथ है। इसके तीन मरीज भी मुंबई में मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इसके मामले और तेजी से बढ़ सकते हैं।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक हिंदुजा अस्पताल ने तीन ऐसे मरीजों का इलाज किया, जो कोविड से ठीक हो चुके थे। इसके कुछ महीने बाद उनको एवैस्कुलर नेक्रोसिस की शिकायत हुई। तीनों पेशे से डॉक्टर हैं और उनकी फीमर की हड्डी (जांघ की हड्डी का सबसे ऊंचा हिस्सा) में दर्द हो रहा था। जिस वजह से वो तुरंत समझ गए कि ये बोन डेथ का मामला है। ऐसे में उन्होंने तुरंत इसकी जांच करवाई और उन्हें वक्त रहते इलाज मिल गया।
डॉक्टर वैस्कुलर नेक्रोसिस को खतरनाक बीमारियों में से एक मानते हैं। इसमें बोन टिशू तक ब्लड ठीक से नहीं पहुंच पाता, ऐसे में हड्डियां गलने लगती हैं। मामले में हिंदुजा अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संजय अग्रवाल ने कहा कि रिसर्च पेपर 'एवैस्कुलर नेक्रोसिस ए पार्ट ऑफ लॉन्ग कोविड-19' ने शनिवार को रिपोर्ट प्रकाशित की। जिसमें बताया गया है कि जीवन रक्षक दवा कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स का ज्यादा उपयोग करने से बोन डेथ के मामले तेजी से बढ़े हैं।
दोनों में स्टेरॉयड का रोल
कोरोना की दूसरी लहर के जाते ही म्यूकोरमाइकोसिस के मामले तेजी से सामने आने लगे, जिसे ब्लैक फंगस कहा गया। डॉक्टरों के मुताबिक स्टेरॉयड के ज्यादा इस्तेमाल और कई दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है। अब बोन डेथ के मामले में भी स्टेरॉयड की भूमिका सामने आई है।












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