Lockdown में घरवालों से मिलने 12 दिनों में 1600 KM पैदल चलकर गांव पहुंचा मजदूर, 4 घंटे में हुई मौत
गोरखपुर। कोरोना वायरस के चलते पूरे में लॉकडाउन है। जो जहां है वो वहीं रहने को मजबूर है। खासकर मजदूर जो रोजी-रोटी की तलाश में अपने घरों से हजारों किमी दूर रह रहे थे। इसी तरह घर से दूर रह रहे एक युवक के पास जब खाने-पीने को कुछ नहीं बचा तो उसने अपने घर की तरफ रुख किया। लॉकडाउन के चलते जब उसे कोई साधन नहीं मिला तो उसने पैदल ही जाने का फैसला किया। पेशे से मजदूर युवक बहराइच के रास्ते 1600 किमी की दूरी पैदल तय कर मुंबई से अपने गांव श्रावस्ती पहुंचा। उसने ये दूरी तो तय कर ली लेकिन घर वालों से मिल नहीं सका। जी हां होनी को कुछ और ही मंजर था। घर से कुछ ही दूर पहले संदिग्ध परिस्थितियों में उसने दम तोड़ दिया। हालांकि उसे कोरोना संक्रमित था या नहीं ये रिपोर्ट में पता चलेगा लेकिन पुलिस ने शव को अभी परिवारवालों को नहीं सौंपा है। विस्तार से जानिए पूरा मामला

गांव पहुंचने के 4 घंटे बाद ही हो गई मौत
जानकारी के मुताबिक मल्हीपुर थाना क्षेत्र के मटखनवा गांव निवासी 35 वर्षीय एक युवक सुबह करीब सात बजे बहराइच होकर मुंबई से पैदल अपने गांव आया। यहां उसे प्राथमिक विद्यालय में क्वारंटीन कर दिया गया। लेकिन तकरीबन साढ़े दस बजे उसे पेट दर्द के साथ उल्टी-दस्त शुरू हो गई। गांव के सेक्रेटरी ने युवक की हालत बिगडने की जानकारी भंगहा सीएचसी अधीक्षक डॉ. प्रवीर कुमार को दी। जब तक सीएचसी से एंबुलेंस पहुंचती। तब तक युवक ने दम तोड़ दिया।

परिवार के 8 लोगों को भी किया क्वारंटीन
युवक की मौत के बाद जिले में हड़कंप मच गया। सीएचसी अधीक्षक के साथ सीएमओ डॉ. एपी भार्गव, डिप्टी सीएमओ डॉ. मुकेश मातनहेलिया, सीओ हौसल प्रसाद, मल्हीपुर थानाध्यक्ष देवेंद्र पांडेय पुलिस टीम के साथ पहुंचे। सीएमओ ने बताया कि मृतक की कोरोना जांच के लिए सैंपल भेजा गया है। क्वारंटाइन सेंटर में पहुंचने के बाद उसके संपर्क में आए परिवार के आठ लोगों को स्कूल में ही क्वारंटाइन किया गया है। सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम संस्कार कराया जाएगा।

12 दिनों में पहुंचा था गांव
मुंबई में मजदूरी कर रहा युवक लॉकडाउन में काम बंद होने के बाद से परेशान था। घर पहुंचने का कोई रास्ता न निकलते देख 12 दिन पूर्व वह पैदल ही चल पड़ा। रास्ते में ट्रक आदि वाहनों का सहारा लेते हुए किसी तरह गांव पहुंचा था। यहां सुकून से चार घंटे भी गांव के लोगों के साथ नहीं रह सका।












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