कोरोना संकट के बीच स्‍टार्टअप कंपनियों ने बड़ी संख्‍या में कर दी है कर्मचारियों की छंटनी, इन सेक्टरों में जा सकती हैं और नौकरियां?

बेंगलुरु। लॉकडाउन का खराब असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, इससे पूरे देश में बिजनेस गतिविधियां थम गई हैं, जिससे अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसकी वजह से लाखों कर्मचारियों की नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। विश्व की कुछ बड़ी कंपनियों की ओर से कुछ कठिन फैसले लेने की वजह से भारत के लोगों के अंदर भी डर बैठ गया है, खासकर के स्टार्टअप कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी अपनी नौकरी को लेकर भयभीत हैं। बता दें साल भर की मेहनत के बाद अप्रैजल और प्रमोशन के समय लॉकडाउन में प्रमोशन और इन्‍क्रीमेंट देने की बात तो दूर, कर्मचारियों की छंटनी की जानी शुरु कर दी गई है।

इन सेक्टरों में जा सकती हैं और नौकरियां

इन सेक्टरों में जा सकती हैं और नौकरियां

इकनामिक टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार अगले छह से आठ महीनों में स्टार्टअप कंपनियों में काम करेने वाले सैकड़ों लोगों को नौकरी से निकाला दिया जाएगा क्योंकि लॉकडाउन के कारण कंपनियों का बिजनेस कम होता जा रहा हैं। इतना ही रिपोर्ट के अनुसार अब तक कई स्‍टार्टअप कंपनियों ने बड़ी संख्‍या में अपने अस्‍थायी कर्मचारियों की छटनी कर नौकरी से निकाल दिया हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारी घाटा होने के कारण कई स्‍टार्टअप कंपनियों के भविष्‍य में विलय होने की संभावना है जिस कारण भी आने वाले दिनों में बड़े स्‍तर पर खासकर ट्यूरिजम, होटल इडस्‍ट्री, रिटेल, ट्रांसपोर्ट और बैंक संबंधी सेवाओं में खासकर छटनी अधिक होगी।

इन कंपनियों में 30 प्रतिशत लोगों को नौकरी से बाहर किया गया

इन कंपनियों में 30 प्रतिशत लोगों को नौकरी से बाहर किया गया

पिछले एक महीने में अस्थायी इंटरनेट सहित ओयो, ब्लैकबक, ट्रीबो, एको, फैब होटल्स, मीशो, शुट्टल, कैपिलरी, निकी.ई, स्विगी और फेयरपोर्टल सहित कई इंटरनेट कारोबार में तीस प्रतिशत लोगों को नौकरी से निकाला जा चुका हैं। मीशो नामक सोशल कामर्स कंपनी की क्रास कटिंग के उपायों का हवाला देते हुए 150 अधिकारियों को निकाल बाहर किया है और जो बचे हुए कर्मचारी हैं उनको भी कंपनी में अपना फ्यूचर सिक्योर नजर नहीं आ रहा हैं। फर्मों के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय में सभी कर्मचारियों में बेहतर परफार्मेंस दिखाने का प्रेशर हैं उन्‍हें अपनी नौकरी के जाने का डर समाया हुआ है।

कंपनी को बचाने के लिए बड़े स्‍तर पर की जा रही छंटनी

कंपनी को बचाने के लिए बड़े स्‍तर पर की जा रही छंटनी

स्टेलारिस वेंचर के पार्टनर, आलोक गोयल ने कहा कि सीईओ का काम यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी तब जीवित रहे और जहां तक संभव हो सके और उसे फायदा होता रहे। यदि आप एक बार कटौती करते हैं, और यदि आवश्यक हो तो और भी बड़े स्‍तर पर कटौती कर सकते हो। लेकिन अगर हर महीने 5 लोगों को कंपनी से निकाला जाता है तो इससे डर का माहौल उत्पन्‍न होगा ।

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