कोरोना से संक्रमित बच्चों को MIS-C का खतरा, सामने आए 177 मामले
दिल्ली एनसीआर में कोरोना से ठीक होने के बाद बच्चों में मल्टी-सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (MIS-C) के 177 मामले सामने आए हैं। इनमें से 109 मामले अकेले दिल्ली में मिले हैं। वहीं, 68 मामले गुरुग्राम और फरीदाबाद में सामने आए
नई दिल्ली, 29 मई। दिल्ली एनसीआर में कोरोना से ठीक होने के बाद बच्चों में मल्टी-सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (MIS-C) के 177 मामले सामने आए हैं। इनमें से 109 मामले अकेले दिल्ली में मिले हैं। वहीं, 68 मामले गुरुग्राम और फरीदाबाद में सामने आए हैं।
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बच्चों में तेजी से बढ़ रहे मामले
डॉक्टरों ने कहा है कि MIS-C के मामले उन बच्चों में बढ़ रहे हैं जो कोरोना वायरस से ठीक हो चुके हैं। इस बीमारी के लक्षण बहुत कुछ कोविड-19 जैसे ही होते हैं। बीमारी के दौरान पीड़ित बच्चे को बुखार रहता है, नसों, मांसपेशियों, फेंफड़ों, दिमाग और हृदय में सूजन आ जाती है। गंभीर स्थिति में अंक काम करना बंद कर देते हैं।
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लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार बुखार, सांस लेने में कठिनाई, पेट में दर्द और त्वचा और नाखूनों का नीला पड़ना रोग के लक्षण हैं। 6 से 15 वर्ष की आयु के बच्चे इससे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि ज्यातर मामले 5 से 15 साल के बच्चों में मिले हैं।
सर गंगा राम अस्पताल में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स इंटेंसिव केयर चैप्टर और बाल रोग विशेषज्ञ के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ धीरेन गुप्ता ने कहते हैं कि, 'बच्चों में कोविड-19 के तीव्र संक्रमण से दो बदलाव आते हैं- एक बच्चो को निमोनिया हो सकता है या उसे MIS-C हो सकती है। केवल शीघ्र पहचान ही समस्या को समय पर पकड़ने में मदद कर सकती है।'
पहली लहर में सामने आए 2 हजार मामले
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स इंटेंसिव केयर चैप्टर के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना की पहली लहर के दौरान देश में MIS-C के 2 हजार से ज्यादा मामले सामने आए थे।
समय पर पता चलने से इलाज संभव
एसएआएमएस में बाल लोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुंजन केला के मुताबिक यदि समय पर इस सिंड्रोम का पता चल जाए तो इसका निदान संभव है। उन्होंने कहा कि यह सिंड्रोम फेफड़, तंत्रिका तंत्र और हृदय सहित शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि इसका इलाज संभव है और यदि समय पर पता चल जाए तो इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।
माता-पिता रहें सतर्क
बच्चे के कोरोना से रिकवर होने के 1 महीने बाद तक सतर्क रहें, क्योंकि शुरुआती निदान में सिंड्रोम को ठीक किया जा सकता है।












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