उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों को भी खुली हवा में सांस लेने का मौका मिले: SC

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने जेल में कैद सजायाफ्ता कैदियों को खुली हवा में सांस लेने और फैमिली लाइव जीने देने का हक मिलने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल और फर्लो को लेकर एक याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि सजायाफ्ता कैदियों को भी खुली हवा में सांस लेने का, परिवार के साथ वक्त बिताने का मौका मिलना चाहिए।

Convicts too must breathe fresh air, maintain family ties: Supreme Court

कोर्ट ने सरकार को पेरोल और फर्लो 1955 के रूल्स को सुधारने का आदेश दिया। मामले की सुनवाई जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने की और कहा कि सजा का मतलब कैदी को सुधारना भी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सजा काट रहे कैदियों को भी खुली हला में सांस लेने का अधिकार है। उन्हें भी अपने परिवार के साथ वक्त बिताने का मौका मिलना चाहिए। उन्हें भी सामाजिक जीने का मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कैदियों को कुछ वक्त के लिए रिहाई इसलिए दी जानी चाहिए ताकि वो पारिवारिक समस्या को सुलझा सके और अपने समाज का हिस्सा बना रह सके।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उम्र कैद काट रहे कैदियों को भी कुछ वक्त के लिए पेरोल या फर्लो दी जा सकती है। ताकि वो खुद को समाज से जोड़ सके और खुद को सुधारने की दिशा में बढ़ा सका। इन कैदियों को भी खुली हवा में सांस लेने का मौका देना चाहिए। आपको बता दें कि 1993 में मुंबई धमाकों में दोषी करार दिए गए अशफाक नाम के शख्स ने सुप्रीम कोर्ट में ये पिटीशन दायर की थी।

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