दिल्ली में 10 बजे थी राहुल की रैली, 11 बजे तक मैदान खाली

यह नजारा साफ दर्शा रहा है कि दिल्ली में परिवर्तन की लहर उठ चुकी है, बस चुनावी समुंदर पार कर उसे जनता की नैया को पार लगाना है। खास बात यह है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री इस रैली में 50 हजार लोगों के आने की उम्मीद कर रही थीं, फिलहाल बमुश्किल एक हजार लोग ही दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने जो 1400 बसें भीड़ जुटाने के लिये की थीं, उनमें भी ज्यादातर खाली पहुंचीं हैं।
दिल्ली में राहुल का यह हाल सिर्फ मोदी के कारण नहीं
उधर पटना के गांधी मैदान में चल रही हुंकार रैली में मोदी को एक बजे पहुंचना है, लेकिन जनता की भीड़ सुबह से जुटी हुई है। ऐसा लग रहा है गांधी मैदान पर दशहरे का मेला चल रहा हो। राहुल की रैली के इस हाल को देखकर अगर आप यह समझ रहे हैं कि यह सब सिर्फ मोदी की हुंकार के कारण है, तो ऐसा नहीं है। कम से कम दिल्ली में तो नहीं।
दिल्ली में कांग्रेस के पंजे को काटने के लिये एक और पार्टी का जलवा सिर चढ़कर बोल रहा है। वो है आम आदमी पार्टी यानी आप। आप के नेता अरविंद केजरीवाल ने तो यहां तक कह दिया है कि जहां-जहां से शीला दीक्षित चुनाव लड़ेंगी, वहां-वहां से वो भी चुनाव में खड़े होंगे।
खास बात यह है कि दिल्ली के अधिकांश युवा अन्ना आंदोलन के बाद से लेकर दिल्ली गैंगरेप के खिलाफ प्रदर्शन तक के दौरान केजरीवाल से जुड़ चुके हैं। यह वो वर्ग है जो सत्ता में परिवर्तन लायेगा।
अंत में इस रैली की सबसे खास चीज होगी राहुल गांधी का भाषण। देखने वाला होगा कि क्या राहुल गांधी मोदी के सारे सवालों का जवाब रविवार को मंच से दे पाते हैं या फिर से दादा-दादी की कहानियां लेकर कोई रोना रोते हैं।












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