मोदी नाम का सुनामी ही कांग्रेस की जहरीली राजनीति को तहस-नहस करेगा

 Congress sowing
चुनाव प्रक्रिया के साथ यह समस्या है कि वह सत्ता के लिए पागलपन के हद तक जाने वाले लालच को प्रकट कर देता है और इसके बाद नेता मुर्ख और नादान दिखने लगते हैं। ऐसा ही हुआ कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ गुलबर्गा में जहाँ वह एक ईएसआई सुविधा का उद्घाटन करने पहुंची थीं। एक आम सभी को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी के प्रधानमन्त्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी जहर का बीज बोकर और हिंसा को भड़काकर विभाजक राजनीति कर रहे हैं।

घबरा गयी है कांग्रेस

सोनिया गांधी की कांग्रेस सरकार चुनाव के दौड़ में बुरी तरीके से जूझ रही है। यह सरकार हर एक मापदंड पर लड़खड़ाती हुई दिख रही है। प्रधानमन्त्री के कार्यकाल में जो भी घोटाले हुए हैं, इसने पार्टी को ऐसी संदिग्ध अवस्था में ला खड़ा किया है कि यूपीए के लिए अपनी तीसरी अवधि के लिए सहारा मांगने में मुश्किल आ रही है जिसका नेतृत्व राहुल गांधी करेंगे।

राहुल गांधी का कमजोर नेतृत्व!

राहुल गांधी कांग्रेस के उप सचिव हैं जिनके ऊपर इस बार पार्टी ने पूरा दारोमदार डाला है और पार्टी को यह उम्मीद है कि आने वाले लोक सभा चुनाव में वह उन्हें जीत की ओर ले जायेंगे। दिसंबर २०१३ में पार्टी के करीबन 4 असेंबली इलेक्शन में निराशाजनक हार का सामना करना पड़ा था। राहुल गांधी ने उन 4 राज्यों में जम कर प्रचार किया था। पर अफसोस कि उनका उपनाम गांधी भी उनको वोट दिलाने में सफल नहीं हुआ।

कांग्रेस का लोगों का मोहभंग

उप चुनाव परिणाम के बाद जब कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा तब से पार्टी का नसीब क्षीण होता हुआ दिख रहा है। सोनिया और राहुल गांधी की समझ में यह बात आ गयी है कि गांधी उपनाम का मतलब लोग भ्रष्टाचार और चापलूसी की तरह लेने लगे हैं। लोग परेशान हो रहे हैं और उनको चाहिए दूसरा विकल्प। और घाव पर नमक लगाने के लिए बीजेपी के प्रधानमन्त्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के समर्थक दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं।

देश मांग रहा है कांग्रेस से हिसाब

इसका कारण है देश कि समस्याओं के प्रति उनका ईमानदार रवैया और उनका समाधान ढूंढने की मंशा। उन्होंने कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार में लिप्त होने की पोल खोली है और बताया है कि साठ साल देश पर राज करने के बाद उन्होंने देश को ऐसी क्षति पहुंचाई है जिसे सुधारना काफी कठिन है। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा ही चापलूसी और पक्षपात को बढ़ावा दिया है। नरेंद्र मोदी ने जब भी लोगों से बात की है उन्होंने यह पक्का किया है कि वह भारत को लेकर अपनी दृष्टि को लोगों के सामने साफ कहें।

मोदी की सरल औऱ मोहक भाषा

नरेंद्र मोदी की इस योजना से जिससे एक तरफ तो कांग्रेस के कारनामों का पर्दाफाश होता है और दूसरी तरफ वह उन सारी समास्यों का समाधान देते हैं, जिससे उनके सुनने वाले इस बात से चकित हो जाते हैं। उनकी सरल भाषा कि वह कैसे इस देश और लोगों की मदद करना चाहते हैं लोगों से जल्द ही इनका एक संपर्क बना देती है।

नरेंद्र मोदी की इन कोशिशों से कि वह भारत को कांग्रेस की सरकार से छुटकारा दिलाएं, राहुल और सोनिया दोनों ही परेशान हैं। शायद इसलिए ही लोक सभा चुनाव से पहले वह निजी छींटाकशी कर रहे हैं ताकि नरेंद्र मोदी रुकेंगे और उनकी जान में जान आएगी।

कांग्रेस हमेशा ही दोहरी राजनीति में विश्वास करती आयी है

जहाँ तक धर्मनिरपेक्षता की बात है सच्चाई यह है कि कांग्रेस हमेशा ही दोहरी राजनीति में विश्वास करती आयी है। कांग्रेस जब सरकार में रही है तब जाति और धर्म के नाम पर कई दंगे हुए हैं जिसमें निर्दोष लोगों की जाने गयी हैं। वह कांग्रेस है जिसने जहर के बीज बोये हैं और इससे समय समय पर अप्रत्याशित लाभ पाया है।

हाल ही में राहुल गांधी का एक निजी टीवी चैनल को दिया गया साक्षात्कार काफी चर्चा में रहा और इससे 1984 दंगों का मुद्दा वापस उठा है जिसमें कई निर्दोष सिख समुदाय के लोगों की जानें गयीं।

1984 दंगे के मामले में कांग्रेस की चालाकी

नामी कांग्रेस नेताओं को उस भीड़ की अगुआई करते देखा गया जिसने निर्दोष सिखों की जान ली। यह काफी दुखदायी है कि उस हादसे के तीस साल बाद तक पीड़ित लोगों के परिवार को न्याय की आस है क्योंकि आज तक इस मामले में कोई अपराध सिद्धि नहीं हुई। ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस सरकार ने इस मुद्दे पर कोई रूचि नहीं दिखायी और कहा कि 1984 दंगे के मामले में उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की थी। ऐसे कई उदाहरण हैं जहां कांग्रेस ने ऐसे दंगों के लिए सहायक परिस्थितियां बनायी हैं और ऐसे तुष्टिकरण में शामिल हुई है जिससे उनकी "विभाजित करो, राज करो" की नीति सामने आयी है।

गुजरात बना रोल मॉडल

दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी के गुजरात में पिछले दशक से शान्ति बरकरार है। इसका कारण यह है की नरेंद्र मोदी अपने आप को गुजरात का मुख्यमंत्री मानते हैं न कि किसी विशिष्ट समुदाय का। वह गुजरात के विकास के लिए सोचते हैं जिससे सारे समुदाय का भला अपने आप ही हो जाता है। उन्होंने तुष्टीकरण के ऊपर सशक्तीकरण को चुना है। वह कड़ी मेहनत को पक्षपात के ऊपर और चापलूसी के ऊपर श्रेष्ठता को मानते हैं।

मोदी बने लोगों को आदर्श

उनके राज्य को चलाने के तरीके ने आईटी के दिग्गज, व्यवसाय के देश विदेश के सम्राट को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने कई बार नरेंद्र मोदी और उनके सरकार चलाने के तरीके को सराहा है और ऐसा माना है कि देश में निश्चित ही तरक्की होगी अगर ऐसा इंसान प्रधानमन्त्री बनता है। मोदी की विकाशशील कार्यसूची से भारत की तकदीर बदल जायेगी और वह विदेशों के टक्कर में आ जायेगा। नरेंद्र मोदी के प्रधानमन्त्री बनने और इस तरक्की से दूसरे देश के लोग भी विकास के लिये भारत का उदाहरण देंगे।

मोदी ने हमेशा आगे बढ़ने की बात कही

दुःख की बात यह है कि संकीर्ण विचारों वाला गांधी राजवंश इसको बर्दाश्त नहीं कर सकता। वह भूल जाते हैं कि जहाँ भी नरेंद्र मोदी बोलते हैं वह यह ज़रूर कहते हैं कि गरीबी हिंदुस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन है। एक दूसरे से लड़ने के बजाय हमें साथ मिलकर गरीबी को दूर करना चाहिए जो कांग्रेस सरकार ने इस देश को उपहार स्वरुप दिया है। सितंबर 2013 में पार्टी ने नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बताया क्योंकि दिन प्रतिदिन इसकी ज़ोरदार मांग हो रही थी।

भारत के लोग न्याय, शांति, विकास, इज़ज़त और सुनहरा कल चाहते हैं

इसका कारण यह है कि भारत के लोग न्याय, शांति, विकास, इज़ज़त और सुनहरा कल चाहते हैं। अभी के समय में नरेंद्र मोदी के अलावा ऐसा कोई नेता नहीं है जिसमें यह दृष्टिदिखती है कि लोगों की मंशा पूरी हो जाए। सिर्फ एक ही नेता है नरेंद्र मोदी जिसे देश की धड़कन का अंदाजा है और जिसके पास भारत में बदलाव लाने और उसे अलौकिक शक्ति दिलाने के कई उपाय भी हैं।

भारत को आगे बढ़ना है...

नरेंद्र मोदी दिल से भारत की एकता में भी विश्वास रखते हैं। उनको पता है कि आपस में लड़ाई से अस्थिरता आएगी और अपनी ही जनशक्ति कम होगी। अगर भारत को आगे बढ़ना है और व्यापक तौर पर अपनी शाख बनानी है तो सांप्रदायिक एकता और शान्ति सबसे ज्यादा ज़रूरी है। उनके हर भाषण में यह साफ झलकता है कि वह जातियों के भाईचारे में विश्वास करते हैं। उनके किसी भी भाषण से छुपी हुई धमकी नहीं दिखती। उन्होंने देश के गरीब लोगों के साथ वीआईपी की तरह व्यवहार करने की इच्छा ज़ाहिर की है।

अल्पसंख्यक बुरी स्थिति में

और यह सब जानते हैं कि हमारे देश में अल्पसंख्यक बुरी स्थिति में हैं और गरीबी की मार से जूझ रहे हैं। नरेंद्र मोदी गरीबों को गरीबी से निकलना चाहते हैं और उनकी हालत सुधार कर वह उन्हें गौरवान्वित महसूस करवाना चाहते हैं। उनके हर भाषण में यह मुद्दा साफ दिखता है।

गरीबों का शोषण

वह नेता जो गरीबी हटाने और देश में विकास लाने की बात करता है, कांग्रेस के लिए अभिशाप बन चुका है जो सत्ता में गरीबों का शोषण कर आयी और उनकी गरीबी का मज़ाक उड़ाती रही। नरेंद्र मोदी खुद उस गरीबी से गुज़र चुके हैं अनुभव से जानते हैं। इसलिए वह गरीबी को दूर करना चाहते हैं और भारत को इस शैतान से छुटकारा दिलाना चाहते हैं। यह तभी हो पायेगा जब भारत कांग्रेस के चंगुल से मुक्त हो पायेगी।

बौखला गयी है कांग्रेस

कांग्रेस चुप्पी साध कर अपना पतन नहीं देख सकती। इसलिए नरेंद्र मोदी के खिलाफ निजी टिपण्णी लाज़मी है। नरेंद्र मोदी की ज्ञान की बातें सोनिया गांधी के लिए ज़हर के बीज की तरह हैं। सोनिया के आस पास वही लोग रहते हैं जो उनकी तारीफ करते हैं और वही कहते हैं जो वह सुनना चाहती हैं।

जब आम आदमी ने ही नरेंद्र मोदी में अगला प्रधानमन्त्री होने की क्षमता देख ली है तो वह कैसी भी टिपण्णी हो, कुछ ख़ास असर नहीं डाल सकती। दूसरी तरफ आने वाले लोक सभा चुनाव में कांग्रेस और भी बुरी तरीके से हारेगी। मोदी नाम का सुनामी अब शुरू हो चुका है और वह रास्ते की कठिनाई को जड़ से उखाड़ता हुआ चलेगा।

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