सोनिया गांधी का बड़ा ऐलान, घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों के ट्रेन टिकट का सारा खर्च उठाएगी कांग्रेस
केंद्र सरकार मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए उनसे ट्रेन का किराया वसूल रही है, जिसे लेकर सोनिया गांधी का एक बड़ा बयान सामने आया है...
नई दिल्ली। कोरोना वायरस की महामारी के बीच प्रवासी मजदूरों को उनके अपने राज्यों में पहुंचाने के लिए शुरू की गई स्पेशल ट्रेनों को लेकर विवाद शुरू हो गया है। दरअसल, रेलवे मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए उनसे ट्रेन का किराया वसूल रहा है। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने जहां पहले केंद्र सरकार पर हमला बोला, वहीं अब पार्टी ने फैसला किया है कि मजूदरों के रेल टिकट का पैसा वो खुद देगी। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से इसे लेकर सोमवार को एक बयान जारी किया गया।
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प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई उठाएगी खर्च
सोनिया गांधी ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा, 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह निर्णय लिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक व कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी व इस बारे जरूरी कदम उठाएगी। यह हमारे हमवतन लोगों की सेवा में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का विनम्र योगदान होगा और साथ ही हमें उनके साथ एकजुटता से कंधे से कंधा मिलाकर चलना भी होगा।'
राहुल गांधी ने ट्वीट कर उठाए सवाल
आपको बता दें कि प्रवासी मजदूरों से ट्रेन टिकट के पैसे लेकर को लेकर कांग्रेस समेत विपक्ष की कई पार्टियों ने भी केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोमवार को ट्वीट करते हुए इस मामले पर कहा, 'एक तरफ रेलवे दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों से टिकट का भाड़ा वसूल रही है, वहीं दूसरी तरफ रेल मंत्रालय पीएम केयर फंड में 151 करोड़ रुपए का चंदा दे रहा है। जरा ये गुत्थी सुलझाइए!' राहुल गांधी ने अपने इस ट्वीट में भारतीय रेलवे की तरफ से पीएम केयर्स फंड में 151 करोड़ रुपए चंदा देने की खबर का स्क्रीन शॉट भी शेयर किया है।
'भाजपा अमीरों के साथ है और गरीबों के खिलाफ'
वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए कहा, 'ट्रेन से वापस घर ले जाए जा रहे गरीब, बेबस मजदूरों से भाजपा सरकार द्वारा पैसे लिए जाने की ख़बर बेहद शर्मनाक है। आज साफ हो गया है कि पूंजीपतियों का अरबों माफ करने वाली भाजपा अमीरों के साथ है और गरीबों के खिलाफ। विपत्ति के समय शोषण करना सूदखोरों का काम होता है, सरकार का नहीं।'

श्रमिक साथियों के साथ यह अन्याय: हेमंत सोरेन
रेलवे के इस फैसले पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी सवाल उठाए हैं। हेमंत सोरेन ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ये वाकई दुखद है। केंद्र सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। आपदा की इस घड़ी में अपने घर वापस लौट रहे श्रमिक साथियों के साथ यह अन्याय है। आपको बता दें कि सबसे पहले रेलवे ने झारखंड के मजदूरों के लिए शुक्रवार को स्पेशल ट्रेन चलाई थी, जो हैदराबाद से चलकर हटिया पहुंची थी। बताया जा रहा है कि इस ट्रेन के 24 डिब्बों में 1200 मजदूरों को बैठाया गया था।












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