सेबी के नए नियमों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, अडानी मामले में भी की जांच की मांग
कांग्रेस ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए नए मानदंडों के अनुपालन पर सवाल खड़े किए हैं। 9 सितंबर को एफपीआई के लिए अपनी होल्डिंग्स के लाभार्थी मालिकों का खुलासा करने की समय सीमा थी। लेकिन कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस प्रक्रिया में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इन नियमों को लागू करने में सेबी को 18 महीने का समय क्यों लग गया।
जयराम रमेश ने अडानी मामले में शामिल दो मॉरीशस स्थित एफपीआई का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने नए नियमों का पालन करने से बचने के लिए प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण से राहत मांगी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सभी एफपीआई ने सेबी को अपने अंतिम लाभार्थी मालिकों का खुलासा किया है। उन्होंने विशेष रूप से अडानी मामले में शामिल निवेशकों को लेकर सवाल उठाए है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले सेबी को निर्देश दिया था कि वह इन एफपीआई द्वारा किए गए उल्लंघनों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करे। रमेश ने पूछा कि क्या इस देरी ने इन फंड्स और उनके मालिकों को शेयर बाजार से विनिवेश करने का मौका दिया। जिससे नियोजित पारदर्शिता में कमी आई।
उन्होंने सेबी से यह भी पूछा कि वह अडानी मामले में अपनी जांच की निष्पक्षता और अखंडता कैसे सुनिश्चित कर रही है। जयराम रमेश का यह बयान तब सामने आया है जब सेबी की जांच अडानी समूह के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के बाईपास के आरोपों को लेकर चल रही है।
कांग्रेस ने पहले भी सेबी पर हमला किया था। जब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट में उल्लेखित अडानी समूह के दो मॉरीशस स्थित एफपीआई ने सेबी के नए नियमों से राहत के लिए याचिका दायर की थी।
हिंडनबर्ग रिसर्च ने हाल ही में सेबी अध्यक्ष मधबी बुच और उनके पति पर अडानी घोटाले में शामिल ऑफशोर फंड्स में हिस्सेदारी होने का आरोप लगाया था।जिसे दोनों ने खारिज करते हुए निराधार बताया है। अडानी समूह ने भी इन आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और बेबुनियाद बताया।
कांग्रेस ने अडानी समूह पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार समूह का पक्ष लेकर उनके मुनाफे को बढ़ावा दे रही है। विपक्षी पार्टी ने हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद अडानी समूह के शेयरों में आई गिरावट के बाद से अपने हमले तेज कर दिए हैं। लेकिन अडानी समूह ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है।












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