प्रियंका गांधी यूपी में महिलाओं को कांग्रेस तक लाने में कितनी सफल होंगी? - ग्राउंड रिपोर्ट
कांग्रेस पार्टी ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ने का फ़ैसला किया है और वह सभी 403 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी. प्रियंका गांधी ने बुधवार को लखनऊ में कहा कि कांग्रेस 40 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगी. पर महिला वोट बैंक बनाने की ये रणनीति क्या काम करेगी?
सीतापुर में कांग्रेस नेता शमीना शफ़ीक़ रहीमाबाद गांव में एक बैठक में मौजूद महिलाओं के बीच ज़ोर से कहती हैं, "लड़की हूँ", जवाब आता है, "लड़ सकती हूँ".
कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में 'महिला सशक्तिकरण अभियान' बहुत धूमधाम से शुरू किया है. शमीना शफ़ीक़ विधानसभा चुनावों में गांवों में जाकर पार्टी के 'महिला सशक्तिकरण अभियान' को आगे बढ़ा रही हैं.
बुधवार को पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने लखनऊ में 'महिला घोषणापत्र' या 'वीमन्स मेनिफेस्टो' जारी करते हुए कहा कि उनकी पार्टी की प्राथमिकता महिलाएं होंगी.
https://twitter.com/priyankagandhi/status/1468477314535100419
उन्होंने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में महिला सशक्तीकरण के लिए जो वादे किये वो 15 पन्नों पर थे. लेकिन ख़ास वादे ये थे:
- 40 प्रतिशत सीटों में महिला उम्मीदवार होंगी
- नए सरकारी पदों में आरक्षण प्रावधानों के अनुसार 40 फीसदी महिलाओं की नियुक्ति
- 50 फीसदी महिलाओं को नौकरी देने वाले व्यवसायों को कर में छूट और सहायता
- 10+2 में प्रत्येक लड़की को स्मार्टफ़ोन
- राज्य भर में महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ़्त यात्रा
- उत्तर प्रदेश की 'ग़रीबी' की चर्चा चुनाव में क्यों नहीं हो रही?
- उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य बोले-मथुरा की तैयारी, छिड़ी बहस
40 प्रतिशत सीटों पर महिलाओं को टिकट
राज्य में पहले से ही चर्चा इस बात पर हो रही है कि पार्टी की तरफ़ से अगले विधानसभा चुनावों में 40 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों को चुनावों में उतारा जायेगा.
प्रियंका गांधी ने बुधवार को घोषणा की कि यूपी में लिए पार्टी के पहले 100 उम्मीदवारों में से 60 महिला हैं.
शमीना शफ़ीक़ उन सैकड़ों महिलाओं में हैं जो पार्टी की उम्मीदवार बनना चाहती हैं. वो कहती हैं इस फ़ैसले से पार्टी के अंदर और बाहर 'मर्दों में खलबली मची है'.
वो कहती हैं, "खलबली तो सब जगह मची है. बाहर ही नहीं हमारे अंदर संगठन में भी. पार्टी में पुरुष कह रहे हैं कि अब तो आपको 40 प्रतिशत सीटें मिल रही हैं. आप लोग आवेदन पर आवेदन भेज रही हैं. ये बात कभी तंज़ में हो सकती है, कभी मज़ाक़ में और कभी एक ईमानदाराना विचार भी हो सकता है. मगर उसके जवाब में फिर हम वही कहते हैं कि आप पुरुष अभी भी 60 प्रतिशत हैं. हमें तो 50 प्रतिशत पर आना है."
पार्टी द्वारा महिलाओं को स्कूटी, गैस सिलेंडर और स्मार्टफ़ोन इत्यादि देने के वादे किए जा रहे हैं.
कांग्रेस के लिए चिंता की बात ये है कि कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इसे चुनाव से पहले ही ख़ारिज कर दिया है और उनका कहना है कि इस बार विधानसभा चुनाव में बीजेपी का सीधा मुक़ाबला समाजवादी पार्टी से होगा. उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 32 सालों से सत्ता से बाहर है और राज्य में अपना जनाधार खो चुकी है.
एक जानकार ने कहा, "मुसलमान और यादव समाजवादी पार्टी का वोट बैंक माना जाता है जबकि बहुजन समाज पार्टी के वोट बैंक दलित माने जाते हैं. लेकिन कांग्रेस का अपना वोट बैंक नहीं रहा."
तो क्या पार्टी महिलाओं के बीच अपना जनाधार बनाना चाहती है?
शमीना, जो महिला कांग्रेस की एक अहम नेता भी हैं, कहती हैं, "कांग्रेस जानती है कि महिलाएं अपने आप में एक शक्ति हैं और वो जातिवाद से उठ कर, जात-बिरादरी से उठ कर एक कंसोलिडेटेड वोट बैंक हैं. और महिलाएं वोट करेंगी गुड गवर्नेंस के लिए."
- सरकार में चल रहे संकट के बीच यूपी में विपक्षी दल क्या कर रहे हैं?
- यूपी चुनाव में आम आदमी पार्टी क्या करिश्मा दिखा पाएगी
क्या ये दांव आएगा काम?
पार्टी के एक सीनियर नेता सचिन नाइक कहते हैं 40 प्रतिशत महलाओं को टिकट देना एक ऐतिहासिक फ़ैसला है.
वो कहते हैं, "निश्चित तौर पर हर दल की कोशिश होती है कि उसका जनाधार बढे. पार्टी ये एक ऐतिहासिक काम कर रही है कि 40 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दे रही है. इससे देश की राजनीति में एक अहम बदलाव आएगा. महिलाओं की भागीदारी देश की सियासत में बढ़ेगी. इसमें हमें कठिनाई होगी लेकिन निश्चित रूप से समय के साथ इसमें हमें कामयाबी मिलेगी."
पार्टी ने इस बार यूपी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का फ़ैसला किया है और सभी 403 सीटों पर अपने उमीदवार उतारने का भी निर्णय लिया है.
लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षक कहते हैं इन कोशिशों के बावजूद पार्टी चुनाव में पिछली बार से बेहतर नहीं करेगी. 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को केवल सात सीटें हासिल हुई थीं. तो क्या पार्टी का ये क़दम सही है?
रायबरेली में कांग्रेस पार्टी के एक स्थानीय नेता आशीष द्विवेदी इसका जवाब यूँ देते हैं, "जो पूर्व के हमारे अनुभव हैं और जो हमारे सीनियर लीडर हैं, वॉलंटियर्स हैं उनके अनुभवों और विचारों के आधार पर हम लोगों ने कहीं न कहीं फ़ैसला किया है कि अगर हम पार्टी वर्कर को ही लड़ाते हैं तो बेहतर है."
द्विवेदी आगे कहते हैं, "हम जब गठबंधन करते हैं तो हमारा वोट शिफ़्ट होता है. जब भी हम दूसरे के साथ गठबंधन में होते हैं तो वहां का वर्कर शिफ़्ट होता है. और ऐसे में हमें अपनी ज़मीन और अपने जनाधार को वापस पाना है तो हमें गठबंधन से दूर हटना चाहिए. ख़ुद हर मुद्दे पर, हर मोर्चे पर, हर विधानसभा पर स्वयं लड़ते हुए दिखना पड़ेगा और वही हम करने जा रहे हैं."
प्रियंका गांधी स्वयं लोगों से जुड़ने के लिए प्रतिज्ञा यात्राएं कर रही हैं. पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए सदस्यता अभियान राज्य भर में जारी है.
सचिन नाइक कहते हैं कि कांग्रेस ने राज्य भर में एक करोड़ नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है. वो कहते हैं, "हमें जनता के बीच रिस्पांस अच्छा मिल रहा है. लाखों की संख्या में लोग पार्टी में शामिल हो रहे हैं."
लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षक कहते हैं इन कोशिशों के बावजूद पार्टी चुनाव में पिछली बार से बेहतर करेगी, इसकी उम्मीद बेहद कम है.
- योगी सरकार के नए जनसंख्या प्रस्ताव को मुसलमानों से जोड़ना कितना सही?
- यूपी में छेड़छाड़ की शिकायत करने वाले पीड़िता के पिता की हत्या
पार्टी छोड़ रही हैं महिला नेता
लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि के अनुसार गांधी परिवार के अलावा पार्टी में कोई ऐसा चेहरा नहीं है जो पार्टी के पैग़ाम को आम लोगों तक पहुंचा सके.
वो कहते हैं, "अफ़सोस की बात ये है कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के अतिरिक्त कोई ऐसा चेहरा नहीं लगता जो पूरे प्रदेश भर में चुनाव प्रचार करके लोगों की भीड़ जुटा पाए और उनसे एक मज़बूती से अपनी बात कह सके.
"प्रियंका सामने आई हैं. उन्होंने ये ज़िम्मेदारी उठायी है. प्रतिज्ञा यात्रा के सहारे वो कई जगह पहुँचने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बहुत लंबे समय तक प्रयास करना हो और बहुत बड़े क्षेत्र में अपने आप को फैलाना हो, तो किसी भी एक व्यक्ति से इससे बहुत एक लंबे दौर तक फ़ायदा नहीं पहुँचता है."
हालांकि वो मानते हैं कि पार्टी को सदस्यता अभियान से फ़ायदा हो सकता है.
वो कहते हैं, "इसमें कोई शक़ नहीं कि सभी सीटों पर लड़ने का जो फ़ायदा होता है कि सभी 403 चुनावी क्षेत्रों में उम्मीदवार का अपना एक दफ़्तर और वहां के आसपास के लोगों में पार्टी की चर्चा होती है. लोगों को पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी भी चुनाव में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रही है."
"उत्तर प्रदेश के दूर दराज़ के ज़िलों के लोग ये अब मनाने लगे थे और शायद अभी भी मानते हों कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी में वो ताक़त नहीं है कि सभी सीटों पर चुनाव लड़े. तो अब अगर पार्टी सभी सीटों पर लड़ती है तो तो निश्चित तौर पर ये संकेत तो जाएगा कि पार्टी हर ज़िले में अपनी उपस्थिति को मज़बूत करना चाहती है."
लेकिन एक तरफ़ कांग्रेस महिला सशक्तीकरण का नारा लगा रही है, महिलाओं को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने की बात कर रही है तो दूसरी तरफ़ कुछ महिला नेता पार्टी छोड़ कर जा रही हैं.
अगस्त में महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुष्मिता देव पार्टी छोड़ कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गईं और रायबरेली सदर चुनावी छेत्र की विधायक अदिति सिंह पिछले महीने बीजेपी में शामिल हो गईं. वो एक ऐसे क्षेत्र से विधायक हैं जहाँ की सांसद सोनिया गाँधी हैं.
- यूपी में अखिलेश की सपा और जयंत की आरएलडी क्या मिला पाएँगे हाथ?
- मोदी सरकार के 'समर्थन' पर चीनी अख़बार हुआ फिदा
अदिति सिंह उन सात कांग्रेस विधायकों में से हैं जिन्होंने 2017 विधानसभा चुनावों में मोदी लहर का मुक़ाबला कर मैदान जीता था.
वो कहती हैं, "वाक़ई आपको लगता है कि जनता ऐसी चीज़ों पर विश्वास करेगी? ये जो सारी चीज़ें मुफ़्त बाटने की बात कर रहे हैं महिलाओं को - स्कूटी, गैस सिलेंडर और स्मार्टफ़ोन - अगर वाक़ई ये इन सब चीज़ों को लेकर गंभीर होते तो ये सब चीज़ें इन्होंने छत्तीसगढ़, राजस्थान या मध्यप्रदेश में भी शुरू में इनकी सरकार बनी थी या पंजाब में क्यों नहीं लागू कीं."
कांग्रेस के लोग इसे एक ऐतिहासिक क़दम ज़रूर मान रहे हैं लेकिन सियासी विश्लेषक इसे बहुत क्रांतिकारी क़दम नहीं मानते.
कांग्रेस में महिलाओं के हौसले बुलंद हैं लेकिन शायद पार्टी में बहुत सीटें जीतने की उम्मीद नहीं नज़र आती.
पार्टी के अंदर एक सोच ये भी है कि विधानसभा चुनाव में अगर इसका ख़ास फ़ायदा ना हुआ तो साल 2024 के आम चुनाव में फ़ायदा ज़रूर होगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
-
Ravindra Kaushik Wife: भारत का वो जासूस, जिसने PAK सेना के अफसर की बेटी से लड़ाया इश्क, Viral फोटो का सच क्या? -
Iran Vs America: ईरान की 'सीक्रेट मिसाइल' या सत्ता जाने का डर, अचानक ट्रंप ने क्यों किया सरेंडर -
US Iran War: 5 दिन के सीजफायर की बात, 10 मिनट में Trump का पोस्ट गायब! ईरान ने कहा- 'हमारे डर से लिया फैसला’ -
Iran War Impact: क्या महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल और LPG सिलेंडर? संसद में PM मोदी ने दिया बड़ा अपडेट -
Bangalore Gold Silver Rate Today : सोना-चांदी धड़ाम, बैंगलोर में कहां पहुंचा ताजा भाव? -
US Iran War: ईरान ने की Trump की घनघोर बेइज्जती, मिसाइल पर फोटो, लिखी ऐसी बात कि लगेगी मिर्ची- Video -
LPG Crisis: 14.2 किलो के सिलेंडर में अब सिर्फ इतनी KG ही मिलेगी गैस! LPG किल्लत के बीच सरकार ले सकती है फैसला -
Petrol Shortage In Ahmedabad: अहमदाबाद में पेट्रोल पंप पर लगी लंबी लाइन, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट -
Ravindra Kaushik कौन थे? Dhurandhar क्यों कहलाए? Pakistan में कैसे मेजर बना भारत का जासूस? जेल में गुमनाम मौत -
PM Modi Speech Highlights: संसद में गरजे PM मोदी, Hormuz Strait पर दिया बड़ा बयान, भारत का बताया प्लान -
West Bengal Election 2026: बंगाल की ये 7 सीटें बना सकती हैं नया CM! जहां हार-जीत का अंतर 1000 वोट से भी था कम -
Anjali Arora Net Worth: 'काचा बादाम गर्ल' ने शुरू किया ये बिजनेस, कैसे छापेंगी नोट? कितनी संपत्ति की मालकिन?












Click it and Unblock the Notifications