Manipur Violence: मल्लिकार्जुन खड़गे ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, कहा-'आपके हस्तक्षेप की संवैधानिक जरूरत'
Manipur Violence: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मणिपुर में बिगड़ती स्थिति को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने राज्य में शांति और सम्मान बहाल करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया है। खड़गे ने मणिपुर में जारी हिंसा और सरकार की निष्क्रियता पर गहरी चिंता जताई। जिसमें 300 से अधिक लोग मारे गए हैं और 1 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो गए हैं।
मणिपुर की गंभीर स्थिति का विवरण
खड़गे ने पत्र में मणिपुर में महिलाओं और बच्चों सहित निर्दोष नागरिकों की मौत, बड़े पैमाने पर विस्थापन और राहत शिविरों में दयनीय हालात पर प्रकाश डाला। उन्होंने राज्य में 18 महीनों से सामान्य स्थिति बहाल करने में केंद्र और राज्य सरकार की विफलता की आलोचना की।

प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल
खड़गे ने हैरानी जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2023 से मणिपुर का दौरा नहीं किया है। जबकि राज्य में स्थिति बद से बदतर हो गई है। उन्होंने विपक्षी नेताओं की सक्रियता का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कई बार मणिपुर का दौरा किया है। लेकिन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का जनता में विश्वास समाप्त हो चुका है।
राष्ट्रपति के संवैधानिक कर्तव्य पर जोर
कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रपति मुर्मू से मणिपुर में नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने की अपील की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति का हस्तक्षेप राज्य में शांति और सुरक्षा बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सरकार की निष्क्रियता पर आरोप
खड़गे ने केंद्र और राज्य सरकारों पर जानबूझकर लापरवाही का आरोप लगाया। जिससे राज्य में अराजकता और मानवाधिकारों के उल्लंघन का माहौल बना। उन्होंने कहा कि यह स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
कांग्रेस की सक्रियता
मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि पार्टी नेता जयराम रमेश और मणिपुर कांग्रेस प्रमुख के मेघाचंद्र सिंह ने उनके साथ शांति बहाली के लिए रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने विपक्ष के प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा कि कांग्रेस जनता की आवाज बनकर सरकार की नाकामी को उजागर करती रहेगी।
खड़गे ने मणिपुर की विकट स्थिति को लेकर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की उम्मीद जताई और केंद्र-राज्य सरकारों को जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने दायित्व को निभाने में विफल बताया। उनका यह पत्र मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।












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