कोविशील्ड पर लैंसेट की स्टडी पर बोले पी चिदंबरम, कहा- बूस्टर डोज को अनुमति देने का आ गया वक्त
नई दिल्ली, 23 दिसंबर: देश में बढ़ते ओमिक्रॉन के मामलों के बीच हाल ही में सामने आई लैंसेट की स्टडी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोरोना के खिलाफ दी जाने वाली कोविशील्ड वैक्सीन के डोज का असर 3 महीने के बाद घट जाता है। कोविशील्ड पर सामने आई लैंसेट की इस चौंकाने वाली स्टडी को लेकर अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि देश में कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज को अनुमति देने का वक्त आ गया है।

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अब जाग जाने का वक्त आ चुका-चिदंबरम
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने ट्वीट करते हुए कहा कि यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त शोध और अकादमिक स्टडी है कि बूस्टर शॉट जरूरी है। कोविशील्ड की प्रभावकारिता पर लैंसेट स्टडी बतता है कि तीन महीने से ज्यादा इसका असर नहीं है तो अब जाग जाने का वक्त आ चुका है। बूस्टर शॉट्स की अनुमति देने का समय अभी है।
सरकार पर उठाए सवाल
इसी के साथ चिदंबरम ने कहा कि फाइजर और मॉडर्न जैसे अन्य स्वीकृत टीकों को इस्तेमाल करने की मंजूरी देने का समय भी आ गया है। इन दिनों को जितना जल्दी हो सकते अनुमति देनी चाहिए। चिदंबरम ने कहा कि सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (संरक्षणवाद) के आर्थिक हितों की रक्षा करने के अपने गलत उत्साह में सरकार टीकाकरण कराने वाले लाखों भारतीयों को संक्रमण की चपेट में ले रही है।
वहीं सरकार को चेताते हुए चिदंबरम ने कहा कि हुए अगर तीसरी लहर बड़ी संख्या में टीका लगाए गए भारतीयों को प्रभावित करती है और संक्रमित करती है, तो अकेले सरकार को इसका दोष देना होगा। आपको बता दें कि शोधकर्ताओं ने ब्राजील और स्कॉटलैंड के डेटा का विश्लेषण किया है, जिसके नतीजे बताते हैं कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लगवाने वालों को गंभीर बीमारी से सुरक्षा के लिए बूस्टर खुराक देने की जरूरत है।












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