बिलकिस बानो के लिए न्याय की मांग, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने किया Tweet
नई दिल्ली, 25 अगस्त: देश में 15 अगस्त की शाम को बिलकिस बानो रेप केस के 11 अभियुक्तों को गोदरा जेल से रिहा करने के मामले में हर तरफ रोष है। विपक्षी दल गुजरात सरकार की छूट नीति के तहत दी गई दोषियों की रिहाई पर सवाल उठा रहा है। वहीं बिलकिस बानो के दोषियों की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने गुजरात सरकार को इस मामले में नोटिस जारी किया है और मामले को दो हफ्ते के लिए टाल दिया है। इधर, कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए बिलकिस बानो केस के न्याय की मांग की है।
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बिलकिस बानो गैंगरेप मामले के 11 दोषियों की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने बिलकिस बानो के लिए न्याय की मांग की। राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'बेटी बचाओ' जैसे खोखले नारे देने वाले, बलात्कारियों को बचा रहे हैं। आज सवाल देश की महिलाओं के सम्मान और हक का है। बलकिस बानो को न्याय दो।
‘बेटी बचाओ जैसे खोखले नारे देने वाले, बलात्कारियों को बचा रहे हैं।
आज सवाल देश की महिलाओं के सम्मान और हक़ का है।
बिलकिस बानो को न्याय दो।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 25, 2022
वहीं 11 दोषियों की रिहाई और उसके बाद उनके स्वागत पर भाजपा नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, "बलात्कार की सजा पा चुके 11 लोगों की रिहाई, कैमरे पर उनके स्वागत-समर्थन में बयानबाजी पर चुप्पी साधकर सरकार ने अपनी लकीर खींच दी है। लेकिन देश की महिलाओं को संविधान से आस है। संविधान अंतिम पंक्ति में खड़ी महिला को भी न्याय के लिए संघर्ष का साहस देता है। बिल्किस बानो को न्याय दो।"
बलात्कार की सजा पा चुके 11 लोगों की रिहाई, कैमरे पर उनके स्वागत-समर्थन में बयानबाजी पर चुप्पी साधकर सरकार ने अपनी लकीर खींच दी है।
लेकिन देश की महिलाओं को संविधान से आस है। संविधान अंतिम पंक्ति में खड़ी महिला को भी न्याय के लिए संघर्ष का साहस देता है। बिल्किस बानो को न्याय दो।
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) August 25, 2022
गुजरात सरकार को भेजा नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिलकिस बानो के साथ बलात्कार और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा पाने वाले 11 दोषियों की रिहाई के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने याचिकाओं पर केंद्र और गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी रिहाई का आदेश नहीं दिया था, राज्य को "नीति के अनुसार छूट पर विचार करने" के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'सवाल यह है कि गुजरात के नियमों के तहत दोषी छूट के हकदार हैं या नहीं?












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