चिदंबरम बोले- मोदी सरकार लाई पूंजीवादियों का बजट, पैरा 6 में सिर्फ दो बार आया 'गरीब' शब्द
नई दिल्ली, 1 फरवरी: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट पेश किया। सरकार इसे ऐतिहासिक बजट बता रही है, लेकिन विपक्षी दल लगातार इसकी कमियां गिना रहे। बजट पेश होने के बाद पूर्व वित्तमंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने इसे पूंजीवादी बजट बताया है। साथ ही दावा किया कि सरकार ने अपने बजट में गरीब वर्ग को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।

मीडिया से बात करते हुए चिदंबरम ने कहा कि आज का बजट भाषण किसी वित्तमंत्री द्वारा पढ़ा गया अब तक का सबसे पूंजीवादी भाषण था। 'गरीब' शब्द पैरा 6 में केवल दो बार आया है। हम वित्तमंत्री को ये याद रखने के लिए धन्यवाद देते हैं कि इस देश में गरीब लोग हैं। सरकार के इस पूंजीवादी बजट को लोग खारिज कर देंगे। उन्होंने कहा कि मैं स्तब्ध हूं कि वित्तमंत्री अगले 25 वर्षों के लिए एक योजना की रूपरेखा तैयार कर रही थीं। सरकार को लगता है कि वर्तमान पर किसी को ध्यान देने की जरूरत नहीं है। जनता को 'अमृत काल' के उदय होने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करने के लिए कहा जा सकता है। देखा जाए तो ये बजट भारत के लोगों का मजाक उड़ा रहा है।
वर्चुअल डिजिटल करेंसी पर टैक्स को लेकर चिदंबरम ने कहा कि ये जाहिर तौर पर देश के बहुत अमीर लोगों के इशारे पर हुआ है। आरबीआई के बजाए वित्तमंत्री ने खुद घोषणा की है कि क्रिप्टोकरेंसी आज से कानूनी है, जबकि ये सब भारत के 99.99 प्रतिशत लोगों के लिए फायदेमंद नहीं है।
सरकार का बचाव कर रहीं वित्तमंत्री
विपक्ष के हमले के बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमने टैक्स नहीं बढ़ाया। एक भी पैसा अतिरिक्त टैक्स के द्वारा कमाने की कोशिश नहीं की। पिछली बार प्रधानमंत्री का आदेश था कि घाटा कितना भी हो, महामारी में जनता पर टैक्स का बोझ नहीं डालना। इस बार भी वही निर्देश थे। वहीं कोविड महामारी के दौरान दुनियाभर में लोगों ने नौकरियां गंवाई हैं। हमारे आत्मानिर्भर भारत पैकेज ने बहुत से लोगों की नौकरियां बचाईं। हम विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्होंने इस दौरान अपनी नौकरी गंवाई।












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