क्या थी वह रिपोर्ट, इंदिरा गांधी की हत्या में आया था कांग्रेस नेता का नाम? निलंबित हुए थे 63 सांसद
146 MP suspended from Parliament: संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 146 सांसदों को सदन में उनके अशोभनीय आचरण के लिए निलंबित कर दिया गया। इससे पहले 1989 में भी एकसाथ 63 सांसदों को लोकसभा से निलंबित कर दिया गया था। आइए जानते हैं कि क्या था वह मामला?
15 मार्च,1989 की घटना है। तब बजट सत्र के दौरान एकसाथ लोकसभा के 63 एमपी को सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के आरोपों में डिप्टी स्पीकर ने निलंबित कर दिया था।

ठक्कर आयोग की रिपोर्ट पेश करने के लिए तैयार नहीं थी राजीव सरकार
तब, देश में राजीव गांधी की सरकार थी और विपक्षी सांसद ठक्कर आयोग की रिपोर्ट को सदन में पेश करने की मांग कर रहे थे। ठक्कर आयोग की रिपोर्ट उन परिस्थितियों की जांच पर आधारित थी, जिनकी वजह से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी।
इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश को लेकर थी रिपोर्ट
उस समय इस विषय पर लोकसभा में दो दिनों तक खूब हंगामा हुआ था। हुआ ये था कि 14 मार्च,1889 की एक न्यूज रिपोर्ट में कथित तौर पर यह दावा किया गया था कि ठक्कर आयोग ने इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश में कांग्रेस के तत्कालीन बड़े नेता आरके धवन की कथित संपलिप्तता पाई है।
रिपोर्ट पेश करने की विपक्ष की मांग को तत्कालीन स्पीकर ठुकरा रहे थे
इसपर विपक्ष के सदस्यों ने प्रश्नकाल स्थगित करके ठक्कर आयोग की रिपोर्ट पेश करके उसपर चर्चा की मांग शुरू कर दी। तत्कालीन लोकसभा स्पीकर बलराम जाखड़ ने पहले यह कहकर विपक्षी सदस्यों की मांग खारिज कर दी कि वह अखबार में छपी किसी खबर पर इस तरह से बहस की अनुमति नहीं देंगे।
सरकार ने जनहित की दलील देकर रिपोर्ट नहीं पेश की
हंगामा बढ़ने के साथ ही विपक्ष के कुछ सदस्यों ने तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह से भी सदन में बयान देने की मांग की। अगले दिन स्पीकर ने विपक्षी सदस्यों को अपने चैंबर में बैठक के लिए बुलाया। पूरे विपक्ष ने वहां भी रिपोर्ट सदन में पेश करने और उसपर चर्चा की मांग की। लेकिन, सरकार का कहना था कि वह जनहित में ऐसा नहीं कर सकती।
सरकार ने कांग्रेस नेता को दी 'क्लीनचिट'!
अगले दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने फिर से इस खास रिपोर्ट पर चर्चा की मांग की। इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला बताया गया। इसपर गृहमंत्री ने जवाब दिया कि ठक्कर आयोग का काम सिर्फ जांच-से पूर्व के अभ्यास की तरह था।
उन्होंने इसी रिपोर्ट का हवाला देकर यह भी कह दिया कि स्पेशल टीम ने इसमें आरके धवन की किसी भी तरह से संलिप्तता नहीं पाई है।
1989 में डिप्टी स्पीकर ने चलाया था डंडा, 63 सांसद हुए थे निलंबित
इसपर विपक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि जब गृहमंत्री ने रिपोर्ट का जिक्र कर दिया है तो फिर इसे सदन में पेश किया ही जाना चाहिए। विवाद खत्म नहीं हुआ। दोनों पक्ष अपनी ओर से अड़े रहे।
लंच ब्रेक के बाद जब डिप्टी स्पीकर एम थंबी दुरई आसन पर मौजूद थे तो विपक्ष के कुछ सदस्यों ने वेल में आना शुरू कर दिया।
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डिप्टी स्पीकर ने पहले चेतावनी दी और फिर केंद्रीय मंत्री एचकेएल भगत को उनके निलंबन का प्रस्ताव रखने को कह दिया। सरकार की सिफारिश पर डिप्टी स्पीकर ने पहले 58 और फिर 5 सांसदों को सदन से निलंबित कर दिया गया।
निलंबित होने वाले सांसदों की लिस्ट में वीपी सिंह और एस जयपाल रेड्डी भी शामिल थे।












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