कर्नाटक में लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस सरकार का एक और दांव! आम लोगों पर बढ़ सकता है बोझ

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार लोकसभा चुनावों से पहले एक और बड़ा दांव खेल सकती है। राज्य की सिद्दारमैया की सरकार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लेनदेन के लिए सरचार्ज लगा सकती है। इस तरह से जमा हुए फंड का इस्तेमाल गिग वर्करों के लिए किया जा सकता है।

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार अमेजन, ओला और जोमैटो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाले लेनदेने पर सरचार्ज लगाने की पहल कर सकती है। अगर ऐसा हुआ तो इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले आम लोगों पर खर्च का अतिरिक्त बोझ बढ़ना तय है।

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3 लाख से ज्यादा गिग वर्करों के 'वोट बैंक' पर नजर
कर्नाटक में पिछले कुछ समय में गिग वर्करों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और एक अनुमान के मुताबिक इनकी संख्या 3 लाख से ज्यादा हो चुकी है। ऐसे वर्कर अधिकतर शहरी क्षेत्रों में हैं, जहां यह एक प्रभावशाली वोट बैंक की भूमिका निभा सकते हैं। अगले साल लोकसभा चुनाव है। इस लिहाज से यह सत्ताधारी दल के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है, क्योंकि वह हर हाल में विधानसभा चुनावों वाला प्रदर्शन जारी रखना चाहती है।

राजस्थान में 2% लिया जा रहा सरचार्ज
कर्नाटक अकेला ऐसा राज्य नहीं है, जहां आम लोगों से इस तरह का सरचार्ज लेने की बातें सामने आ रही हैं। इससे पहले एक और कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान गिग वर्करों के कल्याण के नाम पर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर पहले से ही सरचार्ज वसूल रहा है। राज्य सरकार के अधिकारियों के मुताबिक वहां इस तरह के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर 2% का सरचार्ज लिया जा रहा है और गिग वर्करों के कल्याण लिए खर्च किया जा रहा है।

कर्नाटक के श्रम मंत्री ने सरचार्ज या सेस लगाने के दिए संकेत
हालांकि, कर्नाटक सरकार अगर इस तरह का कदम उठाती है तो ऑनलाइन फूड डिलिवरी मंगवाने वालों, कैब का इस्तेमाल करने वालों और ई-कॉमर्स सेवाओं का उपयोग करने वालों को अपनी जेबें ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती हैं। राज्य के श्रम मंत्री संतोष लाड ने टीओआई को बताया है, 'एक दिन में लाखों ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को देखते हुए, हम कल्याण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के उद्देश्य से इनमें से प्रत्येक लेनदेन पर सेस या सरचार्ज लगाकर गिग वर्करों के लिए राजस्व पैदा करने की संभावनाओं का पता लगाएंगे।'

चुनावी वादों की मार, आम उपभोक्ता रहें तैयार!
यही नहीं उनके मुताबिक राज्य सरकार इस इरादे से अतिरिक्त सर्विस टैक्स वसूलने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने राज्य में गिग वर्करों के लिए भी सामाजिक सुरक्षा योजना का वादा किया था। लेकिन, अब कहा जा रहा है कि इसके लिए फंड का 'इंतजाम ही नहीं' हो पा रहा है।

एक कैबिनेट मंत्री के अनुसार, 'अधिकतर आवंटन तो पांचों चुनावी गारंटी पर चला जा रहा है, बाकी अन्य चुनावी वादों पर काम करने की जरूरत है। हमें उन प्रस्तावित योजनाओं के लिए अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता होगी।'

पांच गारंटी के चलते विकास प्रभावित होने की बात कह चुके हैं डिप्टी सीएम
इससे पहले पिछले महीने के आखिर में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार खुद स्वीकार कर चुके हैं कि 40,000 करोड़ रुपए तो इस साल पांच चुनावी गारंटी के लिए अलग कर दिए गए हैं। इसलिए इस वर्ष विकास के काम प्रभावित होंगे। यहां तक कि सिंचाई और लोक निर्माण के लिए भी फंड आवंटित नहीं किया जा सकता है।

कुछ निहित स्वार्थी तत्वों का झूठा प्रोपेगेंडा- सिद्दारमैया
लेकिन, सीएम सिद्दारमैया का अभी भी दावा है कि कर्नाटक में राजस्व की कोई कमी नहीं है और उनकी सरकार के खिलाफ झूठा प्रोपेगेंडा फैलाया गया है। कांग्रेस पार्टी की पांच चुनावी गारंटियों के आलोचकों पर भड़कते हुए उन्होंने मंगलवार को कहा, 'कुछ निहित स्वार्थी तत्व झूठे प्रोपेगेंडा में लगे हुए थे', जबकि इन योजनाओं को पूरा करने के लिए राजस्व संग्रह में कोई दिक्कत नहीं है।

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