राफेल डील में हेराफेरी के आरोपों पर कांग्रेस ने की जेपीसी जांच की मांग
नई दिल्ली, जुलाई 03: फ्रांस और भारत के बीच हुए लड़ाकू विमान राफेल की डील एक बार फिर सुर्खियों में बन गई है। देश में पहले विपक्ष राफेल की कीमत को लेकर केंद्र सरकार पर हमला कर रहा था, हालांकि इसके बाद डील पूरी हुई और फाइटर प्लेन भारत आकर देश के जंगी बेड़े में शामिल भी हो गए, लेकिन एक बार फिर राफेल की डील चर्चाओं में आ गई। दरअसल, फ्रांस में इस सौदे की जांच को लेकर एक जज की नियुक्ति की गई है, जिसके बाद एक बार फिर कांग्रेस केंद्र सरकार पर हमलावर हो गई है।
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फ्रांस की ओर से 14 जून को न्यायिक जांच शुरू करने के बाद कांग्रेस पार्टी ने राफेल सौदे की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग की है। विपक्षी दल ने जेपीसी जांच की मांग की क्योंकि केवल एक जेपीसी ही प्रधानमंत्री और अन्य अधिकारियों को बुलाकर मामले की गहराई में जा सकती है।
कांग्रेस नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि फ्रांस की वेबसाइट 'मीडियापार्ट' ने रिलायंस-डसॉल्ट डील के सारे सबूत सार्वजनिक कर दिए हैं। मोदी सरकार और 'चेहती' डील (राफेल डील) अब साफ हो गई है। क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब संयुक्त संसदीय समिति की जांच की अनुमति देंगे?
इसके साथ ही सुरजेवाला ने एक और ट्वीट करते हुए कहा कि फ्रांस के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने राफेल सौदे में भ्रष्टाचार की जांच शुरू कर दी और हमारे देश के TV चैनलों ने 'पूर्ण चुप्पी' साध ली है। बता दें कि भारत सरकार और फ्रांसीसी विमान निर्माता डसॉल्ट के बीच साल 2016 में 7.8 अरब यूरो के 36 लड़ाकू विमानों के लिए राफेल सौदे पर हस्ताक्षर किए गए थे। राफेल सौदे पर कांग्रेस ने कहा कि आखिरकार भ्रष्टाचार उजागर हो गया। फ्रांसीसी सरकार द्वारा इसकी जांच के आदेश के बाद कांग्रेस और राहुल गांधी सही साबित हुए हैं।
इधर कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि फ्रांस में राफेल सौदे को लेकर जांच होने वाली है। यह स्वाभाविक है। किसी NGO ने फ्रांस की कोर्ट में शिकायत की थी, इस जांच को भ्रष्टाचार की नजर से देखना ठीक नहीं है। लेकिन इस पर राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी जिस तरह से राजनीति कर रहे हैं वह दुखद है।












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