राहुल गांधी की अयोग्यता के बहाने कांग्रेस-बीजेपी कैसे सेट कर रही हैं चुनावी एजेंडा? जानिए

कांग्रेस राहुल गांधी की अयोग्यता के मसले को कानूनी बनाने के बजाए राजनीतिक बनाए रखना चाहती है, क्योंकि इस साल कई राज्यों में चुनाव होने हैं। वहीं बीजेपी ने भी इसी हिसाब से अपना टोन सेट कर लिया है।

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि का दोषी पाए जाने के बाद अदालत ने दो साल की सजा सुनाई है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे सजायाफ्ता जन प्रतिनिधियों के लिए जो मापदंड तय कर रखा है, उसके मुताबिक ही उन्हें लोकसभा की सदस्यता के अयोग्य कर दिया गया है। लेकिन, कांग्रेस का आरोप है कि यह सब कुछ केंद्र में सत्ताधारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के इशारे पर हुआ है। जबकि, बीजेपी कह रही है कि राहुल गांधी ने सारे मोदी को चोर कहा, इसलिए अदालत ने उन्हें आपराधिक मानहानि का दोषी माना है। पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी ने सारे मोदी को चोर कहकर तमाम ओबीसी का अपमान किया है, इसलिए उनकी लोकसभा सदस्यता हुई है। दरअसल, इस आरोप-प्रत्यारोप के पीछे का पूरा खेल चुनावी है। लगता है कि दोनों ओर से अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार धारणाएं बनाने की कोशिशें की जा रही हैं।

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अयोग्यता के बहाने चुनावी बिसात
इस साल चार बड़े राज्यों में चुनाव होने हैं और इनमें से तीन में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होना है। कर्नाटक में जेडीएस की भी मौजूदगी है, लेकिन राजनीतिक रूप से वह फिलहाल कांग्रेस के ही ज्यादा नजदीक दिखती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में से राजस्थान में तो बारी-बारी से सरकारें बदलते रहने की परंपरा सी बनी हुई है। बाकी एमपी और छत्तीसगढ़ में एक जगह बीजेपी और दूसरी जगह कांग्रेस की सरकारें हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सूरत की अदालत ने आपराधिक मानहानि केस में जिस तरह से दो साल की सजा सुनाई है और उसको लेकर कांग्रेस हंगामा खड़ा कर रही है, उसकी वजह राज्यों में होने वाले यही विधानसभा चुनाव हैं। सबसे पहले कर्नाटक की लड़ाई है।

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सहानुभूति बनाम ओबीसी अपमान कार्ड
राहुल गांधी की अयोग्यता के बहाने जहां कांग्रेस सहानुभूति बटोरने की कोशिश में है तो भारतीय जनता पार्टी ने उसकी काट में ओबीसी के अपमान के वाला मसला उछालकर तुरुप का इक्का चलने की कोशिश की है। कुल मिलाकर कांग्रेस और भाजपा के बीच धारणा की लड़ाई जारी है। कांग्रेस जहां राहुल की अयोग्यता के नाम पर खुद के साथ ज्यादती होने की तस्वीर पेश करना चाहती है, वहीं भारतीय जनता पार्टी उनकी अयोग्यता को ओबीसी के अपमान से जोड़ रही है। इसकी एक झलक राहुल गांधी की उस प्रेस कांफ्रेंस में भी दिख चुकी है कि भाजपा की इस कोशिश पर जब राहुल से एक पत्रकार ने सवाल पूछ लिया तो वह सीधा जवाब देने की जगह तिलमिलाते नजर आए। भाजपा को फिलहाल इस राजनीतिक लड़ाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी होने देने में कोई परहेज नहीं दिख रहा है। क्योंकि, पीएम मोदी देश में इस वक्त ओबीसी का सबसे बड़ा चेहरा हैं।

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    'कांग्रेस विक्टिम कार्ड खेलना चाहती है'
    ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पॉलिटिकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन लोकनीति नेटवर्क के राष्ट्रीय संयोजक संदीप शास्त्री ने कहा, 'यह एक ऐसी जंग होने जा रही है, जहां दोनों ओर से इसे प्रोजेक्ट किया जाएगा, इसकी मार्केटिंग की जाएगी और इसी आधार पर लोगों को जोड़ने की कोशिश होगी।' उन्होंने कहा, 'कांग्रेस विक्टिम कार्ड खेलना चाहती है और कहती है कि 'हमारे नेता को गलत तरीके से निशाना बनाया गया है'। राहुल गांधी खुद को राजनीति में नैतिक रूप से बड़ा दिखाने का प्रयास करेंगे। जबकि, बीजेपी इस कोशिश में रहेगी कि इसे ओबीसी का अपमान बताकर भुनाया जाए। यह देखना दिलचस्प है कि यह कितना काम करता है। बीजेपी यह दिखाना चाहती है कि यह प्रधानमंत्री पर हमला है, जो कि ओबीसी हैं।'

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    कांग्रेस के अधिकतर क्षेत्रीय नेता ओबीसी
    बीजेपी के रणनीतिकारों को लगता है कि यह रणनीति उसके हक में है। क्योंकि, कांग्रेस के अधिकतर क्षेत्रीय नेता ओबीसी हैं, जो चुनावी राज्यों में पार्टी के चेहरा भी होंगे। जैसे कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्दारमैया और पार्टी के नेता डीके शिवकुमार, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल। ये सारे न सिर्फ ओबीसी हैं, बल्कि इनका अपने राज्यों में अपनी जातियों के अलावा बाकी पिछड़ी जातियों पर भी अच्छा-खासा प्रभाव है। दोनों दलों की पहली लड़ाई कर्नाटक में होनी है, जहां कुर्बा जाति के सिद्दारमैया अपनी Ahinda नीति के तहत अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित सभी को एकसाथ साधना चाहते हैं।

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    कांग्रेस को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी- बीजेपी
    कर्नाटक में बीजेपी ओबीसी को अपने साथ जोड़ने के लिए अभी भी बुजुर्ग लिंगायत नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के भरोसे है। भाजपा किसी भी सूरत में सूरत की अदालत के फैसले को ओबीसी से जोड़े रखना चाहती है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और कर्नाटक के एमएलए सीटी रवि ने कहा, 'मोदी के खिलाफ ऐसे ओछी बात, जो कि देश के सबसे बड़े नेता हैं और खुद ओबीसी भी हैं, इसकी प्रतिध्वनि पिछड़ों के बीच सुनाई देगी और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। '

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