एक रिक्‍शावाला जो पूछता है कौन हैं नरेंद्र मोदी

narendra modi
पटना। 'पूरे देश में नरेंद्र मोदी की लहर है और रैलियों में आने वाली भीड़ इस बात का साफ इशारा है,' नरेंद्र मोदी की हर रैली के बाद बीजेपी की ओर से इस तरह के दावे किए जाते हैं। वहीं इससे उलट अगर आप एक रिक्‍शावाला या ऑटोवाला के बारे में बात करें तो स्थिति कुछ अजीब ही नजर आती है।

इन्‍हें न तो नरेंद्र मोदी से कोई मतलब होता है और न ही इस बात से कोई सरोकार होता है कि देश में किसकी लहर है। इन्‍हें अगर किसी बात से कुछ लेना-देना है तो वह है कि कैसे एक दिन की मेहनत के बाद मुश्किल से जो कुछ पैसे हाथ में आए हैं उससे क्‍या रात में रोटी का इंतजाम हो सकेगा।

आज हम आपको एक ऐसे ही रिक्‍शावाला से रूबरू करवाते हैं जो न तो टीवी देखता है और न ही उसे नरेंद्र मोदी की दिन भर होने वाली रैलियों में रटी-रटाई बातों को सुनने में कोई रूचि है। बिहार के किशनगंज में रहने वाले रिक्‍शाचालक रामलाल को इस बात को कहने में जरा भी हिचक नहीं है कि वह एक हिन्‍दु हैं। बिहारा का किशनगंज एक ऐसा इलाका है जहां की दो तिहाई जनसंख्‍या मुस्लिम है।

जाति से नहीं मेहनत से मिलता है वोट
किशनगंज के इस वृद्ध रिक्‍शाचालक ने अपनी जिंदगी का एक लंबा समय दिल्‍ली और पंजाब में गुजारा है। रामलाल को दिल्‍ली के कुछ खास इलाके जैसे शकरपुर, तिलक नगर, सदर बाजार के साथ ही कुछ और इलाकों के बारे में काफी बेहतरी से मालूम है। पंजाब के भी कई शहरों में रामलाल ने कभी खेतों में काम किया तो कभी लुधियाना में रिक्‍शा चलाया। रामलाल के मुताबिक दिल्‍ली में अपने आखिरी दिनों के दौरान उन्‍होंने एक फैक्‍ट्री में काम किया और बड़े शौक से बताते हैं कि उन्‍होंने मेट्रो का सफर भी किया है।

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कांग्रेस से किया किनारा
राजनीति के गढ़ दिल्‍ली में कई साल बिताने के बावजूद रामलाल इस बार चुनावों के दौरान वोट डालने के लिए जरा भी उत्‍साहित नहीं हैं। रामलाल के मुताबिक पिछले कई वर्षों से वह वोट डालते आ रहे हैं लेकिन कभी भी वोट डालने के बावजूद उनके जैसे गरीब लोगों को वोट डालने का कोई फायदा नहीं मिला। रामलाल की मानें तो गरीबों की फिक्र किसी भी राजनीतिक पार्टी को नहीं है लेकिन उनका नाम वोटर लिस्‍ट में हैं तो उन्‍हें वोट डालना पड़ता है। उनके मुताबिक वोटर लिस्‍ट सिर्फ एक दिखावा है ताकि राजनीतिक पार्टियां इस बात को साबित कर सकें कि आप इस देश के नागरिक हैं।

जिस समय वह युवा थे बडे़ जोश से वोट डालते थे और अंग्रेजों को देश से बाहर खदेड़ने वाले गांधीजी की वजह से कांग्रेस उनकी पसंदीदा पार्टी थी। पिछले 10-20 वर्षों में उन्‍होंने कांग्रेस से किनारा कर लिया है क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि जब सारे लोग कांग्रेस पार्टी से किनारा कर रहे हैं तो फिर सिर्फ उनका वोट कैसे इस पार्टी को चुनावों में जीत दिला सकता है।

जो नेता इस बात पर यकीन करते हैं कि जाति की वजह से उन्‍हें वोट मिल सकते हैं, उन सभी के लिए रामलाल का एक बयान कड़ा संदेश हो सकता है। रामलाल के मुताबिक जाति की वजह से आपको रोटी नहीं मिलती है। आपको रोटी मिलती है क्‍योंकि आप मेहनत करते हैं। अगर 10 लोग जातिवाद की दिशा में जा रहे हैं तो रामलाल को उसमें कोई भी बुद्धिमानी नजर नहीं आती है।

क्‍या है नरेंद्र मोदी का चुनाव चिहृन

रामलाल ने सिर्फ एक बार बीजेपी को वोट दिया वह भी तब जब बीजेपी की ओर से एक रथयात्रा का आयोजन किया गया था। उस समय वह दिल्‍ली में थे। रामलाल एक हिंदु सोच वाले व्‍यक्ति हैं और ऐसे में जब पार्टी की ओर से हिंदुत्‍व एजेंडे के दम पर चुनाव लड़ा गया तो रामलाल ने बीजेपी को वोट दिया। इस बार रामलाल का बीजेपी को वोट करने का कोई इरादा नहीं है।

वहीं जब इस रिक्‍शेवाले से नरेंद्र मोदी के बारे में सवाल किया तो वह थोड़ी देर को चुप हो गया। उसका पहला सवाल था कि वह कौन सी पार्टी के हैं और उनका चुनाव चिहृन क्‍या है। रामलाल कहते हैं कि नरेंद्र मोदी किशनगंज आए ही नहीं हैं तो फिर ऐसे में उनका नाम सुनना और वह कौन सी पार्टी से ताल्‍लुक रखते हैं, ऐसी बातें बेकार ही हैं। साफ है कि भले ही मोदी के बारे में लहर की बात कही जा रही हो लेकिन भारतीय वोटों का एक तबका ऐसा भी जो उन्‍हें न तो जानता है और न ही एक नेता के तौर पर पहचानता है।

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